झारखंड

चतरा में वेटनरी डॉक्टर का मिला शव:शुक्रवार की शाम घर से निकले थे, जंगल में मिला शव, बाइक-मोबाइल भी मिला

चतरा के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत तुड़ाग गांव के पास एक सरकारी वेटनरी डॉक्टर का संदिग्ध अवस्था में शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान गंधरिया गांव के बहराकोचा निवासी 58 वर्षीय योगेंद्र यादव के रूप में हुई है।

शनिवार सुबह महुआ चुनने जंगल गए ग्रामीणों ने रास्ते में एक अधेड़ व्यक्ति का शव देखा, जिसके बाद यह खबर तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल गई। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

वेटनरी डॉक्टर योगेंद्र शुक्रवार की शाम घर से निकले थे। आज सुबह उनकी बॉडी जंगल में मिली।

 

शुक्रवार शाम घर से निकले थे, तलाशते रहे परिजन

परिजनों के अनुसार योगेंद्र यादव शुक्रवार शाम करीब 5 बजे अपने घर से ऊंटा मोड़ जाने की बात कहकर निकले थे। जब वे रात 8 बजे तक घर वापस नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता हुई और उनकी तलाश शुरू की गई।

पूरी रात परिजनों ने आसपास के इलाकों में खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। शनिवार सुबह देवरिया के मुखिया कृष्णा दुबे ने फोन कर जंगल में शव मिलने की सूचना दी। जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे। शव की पहचान योगेंद्र यादव के रूप में की।

ग्रामीणों में आक्रोश, हत्या की आशंका जताई

योगेंद्र यादव क्षेत्र के एक सम्मानित व्यक्ति माने जाते थे। उनकी संदिग्ध मौत से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मौके पर पहुंचे जिला परिषद सदस्य चंद्रदेव गोप, मुखिया कृष्णा दुबे और पूर्व मुखिया कुमार विवेक सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है।

लोगों ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की घटना से क्षेत्र में भय का माहौल बन गया है। दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

मौके पर पहुंचे जिला परिषद सदस्य चंद्रदेव गोप, मुखिया कृष्णा दुबे और पूर्व मुखिया कुमार विवेक सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है।

पुलिस जांच में जुटी, फॉरेंसिक टीम ने की जांच

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ संदीप सुमन और सदर थाना प्रभारी अवधेश सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव के पास से मृतक का मोबाइल फोन बरामद किया है। उसकी कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं।

एसडीपीओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है, इसलिए साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योगेंद्र यादव वहां कैसे पहुंचे और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।

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