इंद्रेश उपाध्याय बोले- प्रभाव देखकर नहीं, स्वभाव देखकर गुरु बनाएं:भक्त याकूब हुसैन की तारीफ की, कहा- कथा सुनने बाइक और गाड़ियों से कम आया करें

अलवर के विजयनगर ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का आज पांचवां दिन है। इस दौरान कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि बोलने की कला कई लोगों में होती है, लेकिन हर व्यक्ति भागवत चर्चा नहीं कर सकता। यह सब गुरु कृपा का ही परिणाम है कि हम भगवान की कथा कह और सुन पाते हैं।
इंद्रेश उपाध्याय ने कहा- कथा सुनने बाइक और गाड़ियों से कम आया करें, थोड़ा पैदल चलकर आए जिससे कढ़ी कचौरी पचेगी।

इंद्रेश उपाध्याय ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा- जीवन में गुरु होना बेहद आवश्यक है, लेकिन गुरु का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। आजकल लोग किसी के प्रभाव और लोकप्रियता को देखकर आकर्षित हो जाते हैं। ज्यादा फॉलोवर्स और भीड़ देखकर ही उन्हें गुरु बना लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा- प्रभाव नहीं, बल्कि स्वभाव देखकर गुरु बनाना चाहिए। सच्चा गुरु वही होता है, जो अपने आचरण और जीवन से मार्गदर्शन दे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा – कई ऐसे बालक हैं, जिन्होंने अपने जीवन में अनेक प्रकार के भोग-विलास देखे। लेकिन अंत में सब कुछ त्याग कर भगवान की भक्ति का मार्ग अपनाया।

कथा की प्रमुख बातें…
- भक्त याकूब हुसैन के बारे में कहा- अलवर के ही भक्त थे। साथ ही उनका एक श्लोक भी सुनाया।
- इंद्रेश उपाध्याय ने कहा- कथा सुनने बाइक और गाड़ियों से कम आया करें, थोड़ा पैदल चलकर आए जिससे कढ़ी कचौरी पचेगी।
- इंद्रेश उपाध्याय ने कहा- विदेशों के लोग अधिक सुखी दिखाई देते हैं। उनके पास सारी सुविधाएं हैं। सब कुछ अच्छा है, लेकिन वह सुख केवल शरीर का है।, मानसिक नहीं।



