
अगर आप अपनी बेटी को राजस्थान सरकार की सैनिक स्कूल में भर्ती कराना चाहते हैं तो एक साल की फीस डेढ़ लाख रुपए देनी होगी। हालांकि आय कम है तो फीस में छूट भी मिल सकती है लेकिन इसके बाद भी सालाना खर्च करीब एक लाख रुपए के आसपास ही होगा। शिक्षा विभाग ने फीस का निर्धारण करने के साथ ही प्रवेश प्रक्रिया को शुरू कर दिया है।
दरअसल, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सैनिक स्कूलों में फीस निर्धारण के लिए बीकानेर के संयुक्त निदेशक कार्यालय को जिम्मेदारी दी थी। संयुक्त निदेशक कार्यालय ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा, जहां से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजकर स्वीकृति ली गई। अलग अलग मद में फीस निर्धारण करते हुए डेढ़ लाख रुपए सालाना का खर्च तय किया गया है।

इस तरह होगा फीस निर्धारण
ट्यूशन फीस के रूप में स्टूडेंट्स से पचास हजार रुपए, हॉस्टल फीस के रूप में पचास हजार रुपए और डाइट फीस के रूप में चालीस हजार रुपए की वसूली की जानी है। इसके अलावा युनिफॉर्म के दो हजार रुपए सहित अन्य छोटे बड़े मदों को मिलाकर डेढ़ लाख रुपए फीस तय की गई है।
इन वर्गों को मिलेगी छूट
राज्य सरकार ने कम आय वाले अभिभावकों को छूट देने का भी निर्णय किया है। हालांकि ये छूट सिर्फ ट्यूशन फीस में होगी। सात लाख रुपए से कम आय वाले बीपीएल व खाद्य सुरक्षाके चयनित परिवारों की बालिकाओं को फीस से मुक्त रखा गया है।
वहीं, 7 लाख से 9 लाख रुपए वार्षिक आय वाले परिवारों की स्टूडेंट्स को पचास प्रतिशत और 8 लाख से 11 लाख रुपए तक की आय वाले परिवरों की बेटियों को पच्चीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी। ये छूट ट्यूशन फीस पर होगी, अन्य फीस यथावत रहेगी।
रिजल्ट के बाद बताई फीस
प्रदेश के नए बालिका सैनिक स्कूलों में प्रवेश के लिए परीक्षा के समय फीस स्पष्ट नहीं की गई। ऐसे में हर परिवार की बेटियों ने ये एग्जाम दिया लेकिन अब अचानक फीस बताईगई है। ये भी डेढ़ लाख रुपए के आसपास है, जिससे सामान्य परिवार की बेटियों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। अगर पहले ही फीस का पता होना चाहिए था।
सैनिक स्कूल में एडमिशन की प्रक्रिया
सैनिक स्कूल रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित होते हैं और यहां एडमिशन के लिए अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा (AISSEE) पास करना जरूरी होता है। इस परीक्षा का संचालन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करती है। कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश के लिए निर्धारित आयु सीमा, आरक्षण नियम और स्कॉलरशिप की जानकारी होना जरूरी है।
पढ़ाई के साथ फिजिकल ट्रेनिंग पर फोकस
सैनिक स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि खेलकूद, फिजिकल ट्रेनिंग और कैरेक्टर डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है। इन स्कूलों को भारतीय सशस्त्र बलों के लिए अधिकारियों की तैयारी का प्रमुख माध्यम माना जाता है, जहां से स्टूडेंट्स आगे NDA और INA जैसी संस्थाओं की ओर बढ़ते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया जारी है
संयुक्त निदेशक सुनीता चावला का कहना है कि स्कूल में एडमिशन के लिए प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल सरकार ने फीस तय कर दी है।



