जयपुर

सरकारी स्कूल की छात्राओं ने हेलिकॉप्टर में भरी उड़ान;बोलीं- यह सपना सच होने जैसा; अच्छे मार्क्स लाने पर प्रिंसिपल ने दिया पुरस्कार

राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में सरकारी स्कूल की छात्राओं के अच्छ मार्क्स आए तो प्रिंसिपल ने निजी खर्च से उनकी हवाई सैर की मांग को पूरा किया।

स्कूल की 3 बच्चियों की डिमांड को पूरी करने के लिए जयपुर के चौमूं लेकर आए, जहां से हेलिकॉप्टर में बच्चों ने उड़ान भरी।

करीब 30 मिनट तक छात्राओं ने जयपुर को आसमान से देखा तो उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी।

टेस्ट में आए थे अच्छे मार्क्स दरअसल, डीडवाना-कुचामन जिले के केराप गांव के महात्मा गांधी गर्वनमेंट स्कूल में प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने पिछले महीने एक टेस्ट आयोजित किया।

आठवीं बोर्ड एग्जाम से पहले हुए इस टेस्ट में खुशी मेहरा, रंजना कड़वा और ज्योति ने टॉप 3 में जगह बनाई। तीनों छात्राओं से प्रिंसिपल ने पुरस्कार के रूप में उनकी इच्छा पूछी, तो छात्राओं ने हेलिकॉप्टर की सवारी करने की बात कही।

छात्राओं की इच्छा को प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने गंभीरता से लिया और ‘सपनों की उड़ान’ पहल के तहत अपने निजी खर्च पर इसे पूरा करने का फैसला लिया।

नागौर में नहीं मिली अनुमति, चौमूं से भरी उड़ान तय शेड्यूल के अनुसार- हेलिकॉप्टर की उड़ान नागौर जिले से होनी थी, लेकिन तकनीकी कारणों और एटीसी (फ्लाइंग) अनुमति नहीं मिल पाने के कारण अंतिम समय में स्थान बदलना पड़ा।

छात्राओं का सपना अधूरा न रह जाए, इसके लिए प्रिंसिपल ढाका ने तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करने की प्लानिंग की। वे तीनों छात्राओं को जयपुर के पास चौमूं लेकर पहुंचे, जहां सुबह साढ़े 11 बजे निजी हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी और जयपुर की सैर करवाई। इस दौरान आसमान से जयपुर और उसके आसपास की लोकेशंस को देखने पर तीनों छात्राएं खुशी से झूम उठी।

हेलिकॉप्टर से उतरने के बाद छात्राओं ने कहा कि कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी इच्छा इतनी जल्दी हकीकत बन जाएगी।

छात्राएं बोलीं- यह सपने के सच होने जैसा

छात्रा खुशी मेहरा ने बताया- जब घरवालों को हेलिकॉप्टर में बैठने की बात पता चली तो वे बहुत खुश हुए। सभी को गर्व महसूस हुआ। हेलिकॉप्टर में बैठने का अनुभव बेहद अच्छा रहा। अपने आसपास के लोगों को भी इस स्कूल में बच्चों का प्रवेश कराने के लिए प्रेरित करूंगी।

छात्रा रंजना कड़वा ने बताया- क्लास 8वीं की बोर्ड परीक्षा से पहले हुए टेस्ट में मैं और मेरी दो सहेलियां पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर टॉप 3 में आई थीं। जब सर ने हमसे पूछा कि पुरस्कार में क्या चाहिए, तो हमनें मजाक में हेलिकॉप्टर में बैठने की बात कही थी, लेकिन आज सबकुछ सच हो गया।

छात्रा ज्योति ने कहा- जब हेलिकॉप्टर में बैठने की इच्छा जताई थी, तब लगा था कि सर मजाक कर रहे हैं। बाद में जब एक दिन प्रिंसिपल उनके घर आए और बताया कि उन्हें हेलिकॉप्टर की सैर करवाई जाएगी, तो आश्चर्य हुआ। आज सपना पूरा होने पर बहुत खुश हूं।

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