अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए देने की बात को फर्जी बताया:यह झूठ विपक्ष ने फैलाया; नेतन्याहू पर कहा- मैं न होता, तो इजराइल नहीं होता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए देने की बात को फर्जी बताया है। उन्होंने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स की तरफ से फैलाई गई झूठी खबर है।
दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि समझौता होने पर अमेरिका, ईरान को आर्थिक मदद के तौर पर करीब 28 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देगा।
वहीं, ट्रम्प ने फ्रांस में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से मुलाकात में भी बताया कि अमेरिका अभी ईरान में कोई पैसा नहीं लगा रहा है। उन्होंने कहा,
हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमें भविष्य में कभी भी वहां जाकर निवेश करने का अधिकार है।

साथ ही, ट्रम्प ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान मुद्दे पर ज्यादा जिम्मेदारी दिखाने की सलाह दी है। ट्रम्प ने कहा, “मैं न होता, तो इजराइल नहीं होता। किसी दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइल के लिए उतना नहीं किया, जितना मैंने किया है”।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
1. ट्रम्प बोले- ईरान शर्तें पूरी करे तभी राहत मिलेगी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी, जब वह समझौते की सभी शर्तों का पालन करेगा। अमेरिका ने फिलहाल किसी भी तत्काल आर्थिक राहत से इनकार किया है।
2. इजराइल ने डील से किनारा किया: इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा कि यह ट्रम्प की डील है और इजराइल इससे बंधा नहीं है। वहीं रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी साफ किया कि दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटेगी।
3. मैक्रों ने यूरेनियम पर शर्त रखी: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय कर IAEA की निगरानी में रखा जाना चाहिए, ताकि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए न हो सके।
4. ईरान ने समझौते को अपनी जीत बताया: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ‘जीत का दस्तावेज’ बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल की नाराजगी ही साबित करती है कि बातचीत में ईरान मजबूत स्थिति में रहा।
5. दुनियाभर के देशों ने समझौते का स्वागत किया: UAE, कुवैत, स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान समेत कई देशों ने अमेरिका-ईरान समझौते को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है।



