राजस्थान का बॉर्डर से सटा इलाका श्रीगंगानगर,5 साल में आई 6 अरब की हेरोइन:खेप पंजाब जा रही फिर टुकड़ों में वापस आ रही; पुलिस की स्पेशल टीम तस्कर पकड़ेगी

राजस्थान का बॉर्डर से सटा इलाका श्रीगंगानगर, 5 सालों में अब तक यहां 140 किलो से ज्यादा की हेरोइन और 15 ड्रोन पकड़े जा चुके हैं। इस 140 किलो हेरोइन की कीमत करीब 6 अरब रुपए हैं।
इसी नशे से निपटने के लिए अब जिले में क्विक इन्वेस्टिगेशन एंड डिस्पोजल टीम (QI DT) का गठन कर दिया गया है, जो राजस्थान में ऐसा करने वाला पहला जिला बन गया है। साथ ही प्रतिबंधित प्रेगाबालिन कैप्सूल की तस्करी पर लगाम कसने के लिए विशेष जांच टीम (SIT) भी तैयार कर दी गई है।
खेप टुकड़ों में राजस्थान आ रही
पाकिस्तान से सटे बॉर्डर इलाके होने के कारण श्रीगंगानगर ड्रग्स तस्करी का बड़ा हब बन चुका है। 2022 से 2025 तक बॉर्डर एरिया से 140 किलो से ज्यादा हेरोइन और 15 ड्रोन जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 6 अरब रुपए से अधिक बताई जा रही है। यही नशा पंजाब के तस्कर आगे ले जाते हैं और छोटी

फाइलें QI DT को सौंपी
ट्रेनी आईपीएस और सीओ सिटी विशाल जांगिड़ ने बताया- अब क्विक इन्वेस्टिगेशन एंड डिस्पोजल टीम (QI DT) टीम इन नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। QIDT टीम को बॉर्डर से जुड़े हेरोइन तस्करी के सभी 61 मामलों की फाइल ट्रांसफर कर दी गई है। इसके अलावा 2023 से अब तक दर्ज 35 फिरौती के मामलों की जांच भी इसी टीम को सौंपी गई है। टीम का नेतृत्व एएसपी भंवरलाल मेघवाल कर रहे हैं।
टीम का फोकस आरोपियों की पूरी चेन तक पहुंचना और नेटवर्क को पूरी तरह क्रैक करना है। जांच गहराई से होगी, जबकि गिरफ्तारी का काम संबंधित थाना अधिकारियों को सौंपा जाएगा।

ड्रोन ड्रॉपिंग का सीजनल पैटर्न
जानकारी के अनुसार, अब तक की जांच में सामने आया कि ड्रोन से हेरोइन ड्रॉपिंग का पैटर्न सीजनल है। गर्मियों में (अप्रैल-अगस्त) दोपहर 12 से 3 बजे और सर्दियों में (नवंबर-फरवरी) रात 1 से सुबह 4 बजे के बीच यह ज्यादा होती है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में ड्रॉपिंग के हॉटस्पॉट चिन्हित कर लिए गए हैं। 2 बार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार भी आए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया।
प्रेगाबालिन की तस्करी
जिले में प्रतिबंधित प्रेगाबालिन (Pregabalin) कैप्सूल की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है, जो युवाओं में नशे के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हाल ही में अनूपगढ़ पुलिस ने एक कार्रवाई में 36 हजार प्रेगाबालिन कैप्सूल जब्त किए और 2 तस्करों- रवि कुमार और मनप्रीत सिंह को पकड़ा गया। इससे पहले भी हजारों कैप्सूल अलग-अलग ठिकानों से बरामद हो चुके हैं।

सप्लायरों तक पहुंचना है मकसद
इस लगातार आवक को देखते हुए SIT का गठन कर दिया गया है। SIT दवा कंपनियों से डेटा जुटाकर सप्लाई चेन की पूरी ‘कुंडली’ तैयार करेगी। मकसद सिर्फ छोटे तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि बड़े डीलरों और सप्लायरों तक पहुंचना है।
पुलिस के मुताबिक, प्रेगाबालिन 300 MG कैप्सूल न्यूरोलॉजिकल दर्द के इलाज के लिए निर्धारित है, लेकिन इसका दुरुपयोग नशे के रूप में हो रहा है। यह NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित है और जिले में इसकी बिक्री-खरीद पर सख्त पाबंदी है। फिर भी बॉर्डर इलाकों से पाकिस्तान या पंजाब की तरफ से बड़ी खेपें आ रही हैं।



