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जलडेगा के किसान सोनू सिंह ने डेवलप किया मॉडल फॉर्म:झारखंड फल उत्पादन के लिए सही, उगा रहे हैं ताइवान अमरूद, सालों भर मिलती है फसल‎

मैंने कृषि विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एनजीओ के साथ वर्षों‎ तक किसानों के बीच काम किया। किसानों को उन्नत कृषि के लिए प्रेरित करने का अनुभव ने मुझे इतना प्रभावित किया कि खुद भी खेती करने का फैसला लिया। इसके लिए जलडेगा में बंजर पड़ी 20 एकड़ जमीन को 20 साल‎ के लिए लीज पर ली। इसमें आधुनिक फल बागवानी का मॉडल फॉर्म बनाने की दिशा में काम शुरू किया।‎

किसान सोनू सिंह ने 5 एकड़ में ताइवान अमरूद की फसल लगाई है।

तकनीकी शिक्षा और अनुभव का सही मिश्रण करते हुए मैंने परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने के उद्देश्य से‎ मिशन में जुटा। अपने मॉडल फॉर्म पर सबसे पहले 5 एकड़ में अल्ट्रा हाई डेंसिटी यूएचडी पद्धति (अति घनत्व‎ वाली बागवानी) के तहत ताइवान पिंक किस्म के 5 हजार अमरूद के पौधे लगाए। इस किस्म की प्रमुख विशेषता‎ होती है कि अमरूद गहरे पिंक रंग के होते हैं। इसमें गूदा खूब होता है। खाने में अधिक मिठास होती है।

साल भर मिलती है ताइवान अमरूद की फसल

ताइवान अमरूद के पौधे सालभर‎ फल देने की क्षमता होती है। वर्तमान में झारखंड में अमरूद की भारी मांग है। और इसकी होलसेल कीमत 50-60‎ रुपए प्रति किलो तक है। अमरूद के कारण स्थानीय बाजार के अलावा आसपास के गांवों में रोजगार के नए स्रोत खुल रहे हैं। यूएचडी तकनीक की खासियत यह है कि 15वें महीने से ही फलों की पैदावार शुरू हो जाती है। पहले‎ वर्ष प्रति पौधा 10 किलो तक उत्पादन देता है। आगे चलकर उत्पादन 30 किलो प्रति पौधा तक पहुंच जाता है।‎

डेढ़ एकड़ में ग्रीन एप्पल बेर, दो एकड़ में शरीफा सीताफल दो एकड़ में ताइवान‎ सुपर अर्ली कटहल समेत जामुन, शहतूत और ड्रैगन फ्रूट लगाने की भी तैयारी में है।
डेढ़ एकड़ में ग्रीन एप्पल बेर, दो एकड़ में शरीफा सीताफल दो एकड़ में ताइवान‎ सुपर अर्ली कटहल समेत जामुन, शहतूत और ड्रैगन फ्रूट लगाने की भी तैयारी में है।

फलों की प्रीमियम क्वालिटी बनाए रखने के लिए फॉर्म में नेट बैगिंग की व्यवस्था करते हैं, जिससे फल साफ,‎ सुरक्षित और रोगमुक्त रहे। अपने मॉडल फार्म में सिर्फ अमरूद तक सीमित न रहते हुए मैंने कई अन्य व्यावसायिक‎ फलों की खेती भी शुरू की है। डेढ़ एकड़ में ग्रीन एप्पल बेर, दो एकड़ में शरीफा सीताफल दो एकड़ में ताइवान‎ सुपर अर्ली कटहल समेत जामुन, शहतूत और ड्रैगन फ्रूट लगाने की भी तैयारी में जुटा हूं।‎ किसान तभी उत्साहित होते हैं जब सफल बागवानी देखते हैं‎।

20 एकड़ में डेवलप किया डेमो मॉडल फॉर्म

मैंने 20 एकड़ के फार्म को एक डेमो मॉडल फार्म के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। झारखंड की मिट्टी‎ और मौसम फल उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है। यहां कई एग्री लैंड है जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। इसलिए‎ यह किसानों के लिए प्रेरणा का मॉडल फार्म बनेगा। किसान तभी सीखते हैं, जब वे अपनी आंखों से सफल मॉडल‎ देखते हैं। बस सही तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत है। मेरा लक्ष्य है कि आधुनिक बागवानी से किसान‎ आय दोगुनी करें।‎

कृषक 26 वर्षीय सोनू सिंह कृषि विज्ञान में स्नातक हैं।

जानिए… कौन हैं सोनू सिंह‎

युवा कृषक 26 वर्षीय सोनू सिंह कृषि विज्ञान में स्नातक हैं। वर्तमान में बरसात प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड में‎ कार्यरत हैं। मूल रूप से वे खूंटी जिला, प्रखंड कर्रा, ग्राम जेरगा के रहने वाले हैं। पिता बसंत सिंह, माता प्रमीला‎ देवी, बहन सोनी कुमारी वर्तमान में सिमडेगा के जलडेगा ग्राम कारीमाटी में रहते हैं। सोनू सिंह के पिता पारंपरिक‎ खेती करते थे जो आय के लिहाज से बहुत कम था, इसे देखकर उन्होंने इससे हटकर खेती करने की ठानी।‎ इसके लिए वे 25 किसानों के दल के साथ नागपुर भी गए और उन्नत तकनीक की व्यावहारिक ज्ञान लिया।‎

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