झारखंड

जागरूकता और अभियान के बावजूद धनबाद में तेजी से एचआईवी के मरीज टीबी के शिकार हो रहे

एचआईवी और एड्स से कैसे सुरक्षित रहे

धनबाद में तेजी से एचआईवी के मरीज टीबी के शिकार हो रहे हैं। शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण टीबी और कमजोर कर रही है। इस वर्ष लगभग 50 एचआईवी के मरीज टीबी से ग्रसित पाए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 25 से 45 के बीच के उम्र के लोग हैं।

दूसरी ओर, काफी जागरूकता और अभियान के बावजूद धनबाद में एचआईवी मरीजों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रत्येक वर्ष लगभग 250 एचआईवी के मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में विभाग की ओर से जांच अभियान तेज किए गए हैं।

शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता हो रही है कम

स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी के मरीज को एचआईवी की जांच की जा रही है। वहीं, एचआईवी के मरीज को टीबी की जांच की जारही है। मेडिकल कालेज के एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर के नोडल पदाधिकारी डा. सुजीत कुमार तिवारी बताते हैं कि एचआईवी से ग्रसित मरीज को टीबी होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है और मौत का कारण भी टीबी बनती है।

एचआईवी होने से शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, टीबी के लगभग 25 प्रतिशत बैक्टीरिया पहले से ही मानव शरीर में विद्यमान होते हैं। शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर यह बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं और मरीज को बीमार कर देते हैं। दूसरी और टीबी के ऐसे भी मरीज होते हैं, जिन्हें खुद पता नहीं होता कि वह पहले एचआईवी से ग्रसित हुए हैं।

इन बातों का रखें ख्याल

*असुरक्षित संबंध से दूर रहें

*सैलून में ब्लेड चेंज करवाने के साथ अस्तूरा को भी सैनिटाइज जरूर कराएं

*टैटू लगाते वक्त इसके नीडल को जरूर चेंज कराएं

*लगातार खांसी हो रही है, शरीर कमजोर हो रहा है, तो इसकी जांच करें

*नशा का सेवन करने से बचें

धनबाद में 3400 एचआईवी के मरीज

विभाग की मानें तो धनबाद में फिलहाल 3400 एचआईवी के मरीज हैं। इसमें महिलाओं की संख्या लगभग 1200 है। लगभग 300 बच्चों की संख्या है। सेंटर से फिलहाल मरीजों को निशुल्क दवा दी जा रही है। एचआईवी के मरीज के लिए प्रोत्साहन राशि भी सरकार की ओर से शुरू की गई है।

तीन वर्षों में मिले एचआइवी मरीज

वर्ष मरीजों की संख्या

2023 254

2024 233

2025 240

एचआइवी को लेकर जागरूक रहना बेहद जरूरी है। बीमारी से बचने यही सबसे बड़ा उपाए है। लेकिन दवा नियमित सेवन करने, नियमों का पालन करने से मरीज लंबे समय तक जीवन जी सकता है। कई ऐसे मरीज हैं, जो 20 से 25 वर्षों से दवा खा रहे हैं और ठीक है।- डा. सुजीत कुमार तिवारी, नोडल पदाधिकारी, एरआरटी सेंटर, एसएनएमएमसीएच।

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