मेवाड़ के प्रसिद्ध तीर्थ धाम चारभुजानाथ मंदिर में चांदी की पिचकारी से खेली होली:पुजारी परिवार ने लाल पगड़ी पहनकर किया पारंपरिक गेर नृत्य
मेवाड़ के प्रसिद्ध तीर्थ धाम चारभुजानाथ मंदिर में रविवार को फागोत्सव के सातवें दिन मंदिर परिसर में श्रद्धा और उत्साह का अनूठा माहौल देखने को मिला। रात्रि के समय मंदिर के पुजारी परिवार के सदस्यों ने पारंपरिक वेशभूषा और लाल पगड़ी पहनकर मंदिर की परिक्रमा में गेर नृत्य किया।
इस अनोखे गेर नृत्य को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में भक्तों ने इस पारंपरिक आयोजन का आनंद लिया।

रंगपंचमी पर केसरिया पानी से खेली होली
रंगपंचमी के अवसर पर मंदिर परिसर में हर ओर गुलाल की रंगत नजर आई। इस दौरान केसरिया पानी का गोल बनाकर ठाकुरजी के साथ होली खेली गई। चांदी की पिचकारी और चांदी के बर्तनों से भगवान को रंग अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने भी भक्ति भाव से इस फागोत्सव में भाग लिया।
मेवाड़ में अनोखी परंपरा, होली के बाद शुरू होता है फागोत्सव
मेवाड़ के अधिकांश पुष्टिमार्गीय मंदिरों, जैसे श्रीनाथजी मंदिर में होली के अगले दिन फागोत्सव समाप्त हो जाता है। लेकिन चारभुजानाथ मंदिर में इसकी परंपरा अलग है। यहां होली के बाद फागोत्सव की शुरुआत होती है।
इस वर्ष मंदिर में फागोत्सव 3 मार्च से शुरू होकर 18 मार्च तक चलेगा। इस दौरान 16 दिनों तक विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
सुबह मंगला झांकी से शुरू होते हैं आयोजन
फागोत्सव के दौरान मंदिर में रोजाना सुबह 5 बजे मंगला झांकी के साथ पट खुलते हैं और मंगला आरती के बाद राज श्रृंगार की तैयारी की जाती है।
दोपहर में राजभोग आरती के बाद पुजारी भीमकुंड की बावड़ी से सोने के कलश में जल भरकर भगवान को अर्पित करते हैं। इसके बाद ठाकुरजी को सोने के झूले में विराजित किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु होली के हरजस गान के साथ ठाकुरजी को होली खिलाते हैं।



