बैरागढ़ के बुढ़ागांव और बेहटा क्षेत्र में सर्वे के दौरान 100 से ज्यादा झुग्गियां इस दायरे में मिली;बड़े तालाब के कैचमेंट में बांट दिए पट्टे

बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में नया पेंच फंस गया है। बैरागढ़ के बुढ़ागांव और बेहटा क्षेत्र में सर्वे के दौरान 100 से ज्यादा झुग्गियां इस दायरे में मिली हैं। इनमें से कई झुग्गियों के पास सरकारी पट्टे हैं। ऐसे में प्रशासन इन्हें सीधे नहीं हटा सकता।
अब प्रशासन को पहले इन पट्टों की जांच करनी होगी। इसके बाद पात्र लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के बाद ही हटाने की कार्रवाई संभव होगी। इधर हुजूर तहसील के दोनों तहसीलदार सुप्रीम कोर्ट में सरकारी कार्य के कारण बाहर हैं, इसलिए वहां कार्रवाई टल गई है।
टीटी नगर क्षेत्र में सोमवार से सीमांकन शुरू होगा। पहले के सर्वे में 108 अतिक्रमण 50 मीटर दायरे में मिले थे, जबकि नए सर्वे में यह संख्या 200 से ज्यादा तक पहुंच सकती है। होली से पहले यहां 12 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए थे।
हुजूर में अभी कार्रवाई नहीं हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया ने बताया कि तालाब के 50 मीटर दायरे में तीन गांवों की कृषि भूमि अतिक्रमण में आई है। इसके अलावा तीन से ज्यादा अन्य अतिक्रमण भी मिले हैं। फिलहाल सर्वे पूरा नहीं हुआ है और तहसीलदारों के बाहर होने के कारण बुधवार से ही कार्रवाई शुरू हो सकेगी। अभी तक यहां एक भी कार्रवाई नहीं हुई है।
अब नोटिस, सुनवाई, पुनर्वास…तब हटेंगे कब्जे
बैरागढ़ एसडीएम रवि शंकर राय ने बताया कि सीमांकन का करीब 90% काम पूरा हो चुका है। सर्वे में बोरवन गांव की बुढ़ागांव झुग्गी बस्ती और बेहटा की झुग्गी बस्ती में 100 से ज्यादा झुग्गियां तालाब के 50 मीटर दायरे में मिली हैं। इनमें कई पट्टाधारी हैं।
ऐसे में उन्हें हटाने से पहले नोटिस देकर सुनवाई करनी होगी और पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। कोहेफिजा, हलालपुर, खानूगांव, बेहटा और बोरबन में 70 से ज्यादा पक्के अतिक्रमण भी चिह्नित किए गए हैं। इन पर दो दिन बाद कार्रवाई शुरू हो सकती है।
50 झुग्गियों पर कार्रवाई टल सकती हैं… हलालपुर, कोहेफिजा व खानूगांव क्षेत्र में 50 झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई टल सकती है। होली से पहले यहां चिह्नित 18 पक्के अतिक्रमणों में से 4 को हटाया गया था।
बड़ा सवाल.. जहां प्रतिबंध, वहां कैसे बांट दिए पट्टे
बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में किसी भी तरह के निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद प्रशासन ने न सिर्फ यहां झुग्गियां बसने दीं, बल्कि कई को सरकारी पट्टे भी जारी कर दिए। इन झुग्गियों का सीवेज सीधे तालाब में गिर रहा है, जिससे पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक यह गंदगी तालाब की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। इतना ही नहीं, झुग्गियां बसाने के लिए कई जगह तालाब के हिस्से को पाटकर जमीन तैयार की जा रही है, जिससे तालाब का प्राकृतिक स्वरूप और जलग्रहण क्षेत्र दोनों प्रभावित हो रहे हैं।


