पाली में माइंस के पानी से गायों की मौतें हो रही;जो जिंदा है वे चल भी नहीं पा रही; पानी की वजह से फैली बीमारी

पाली में माइंस के पानी से गायों की मौतें हो रही है। हालात ये है कि इस पानी को पीने की वजह से 20 से ज्यादा गायें बीमार तक हो चुकी है। वहीं पिछले 15 दिनों में 20 से ज्यादा गायों ने दम तोड़ दिया है।
मामला जिले से 22 किलोमीटर दूर बाला-कूरणा गांव का है। हालात ये है कि दिन ब दिन गायों की मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस एरिया में पत्थर की खदानों का पानी गोचर भूमि में छोड़ा जा रहा है। इसकी वजह से इन गायों की तबीयत बिगड़कर मौतें हो रही है। यहां तक की इस पानी से गोचर भूमि में लगे पेड़-पौधे तक जल चुके हैं।
जो गाय जिंदा है उनकी इस पानी पीने से ये हालात हो गई कि वे न तो खड़ी हो पा रही है और न चल पार ही है। ग्रामीण उन्हें उठाकर पिकअप में डाल, दूसरी गोशाला में शिफ्ट कर रहे है।

गोचर में फैला माइंस का पानी, 100 के करीब पत्िारों की खदान
दरअसल, बाला और कूरना गांव के आस-पास करीब 100 से ज्यादा पत्थर की खदान है। ग्रामीणों ने बताया कि इस एरिया में 500 बीघा में गोचर की जमीन है।
ग्रामीण देवीसिंह ने बताया कि पिछले एक महीने से पत्थरों की खदानों में भरे बरसाती पानी को मड पंप लगाकर गोचर भूमि में छोड़ा जा रहा है। इस दूषित पानी पीने से इनके पेट फुल रहे है और इसके बाद इनकी मौतें हो रही है।
फरवरी के पहले सप्ताह से लेकर अब तक करीब 20 से ज्यादा गोवंश की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 20 बीमार

पेड़-पौधें भी जल रहे, जमीन हो रही खराब बाला गांव के रहने वाले पप्पूराम सुथार बताते है कि माइंस के पानी से गोचर में उगे पेड़-पौधों को भी नुकसान हो रहा है। पेड-पौधे जल रहे है। जमीन खराब हो रही है लेकिन कार्रवाई को लेकर प्रशासन कुछ नहीं कर रहा।
ग्रामीण मांगूसिंह बताते है कि गांव के बेसहारा पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी पूरे गांव ने उठा रखी है। एक बाड़ा बनाया गया है। जहां सभी मवेशियों को रखा जाता है। र एक पशुपालक भी उन्होंने लगा रखा है। गांव में पानी के दो अवाले बने हुए थे। जहां से पशु पानी पीते थे। लेकिन पीएचईडी ने वहां से कनेक्शन काट दिए। ऐसे में अब ग्रामीण अपने खर्चे पर यहां पानी का टैंकर डलवाते है।

माइंस और PHED को लिखा लेटर मामले में पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉक्टर मनोज कुमार पंवार ने बताया- ग्रामीणों की शिकायत पर शुक्रवार को वे मौके पर गए थे। यहां गोचर में माइंस का पानी फैला हुआ था। इस पानी को पीने की वजह से पशु बाीमार होकर मर रहे है।
इसे लेकर माइंस विभाग सोजत को लेटर लिखा है ताकि वे माइंस संचालकों को गोचर में पानी खाली नहीं करने के लिए पाबंद करे। इसके साथ ही पीएचईडी को लेटर लिखा है कि वे गांव के अवाले में वापस पेयजल कनेक्शन करे ताकि पशुओं को पीने के लिए फ्रेश वॉटर मिल सके।



