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विटामिन-डी की कितनी मात्रा है पोषण के लिए ज़रूरी, जानिए किन खाद्यों से मिलता है विटामिन-डी

आज के दौर में विटामिन-डी की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है। शोध बताते हैं कि हर पांच में से एक व्यक्ति इस कमी से प्रभावित है। चिंता की बात यह है कि इसकी कमी धीरे-धीरे कई तरह की स्वास्थ्य परेशानियों को जन्म देती है, क्योंकि विटामिन-डी सिर्फ़ हडि्डयों को मज़बूत रखने के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के सुचारु संचालन के लिए भी बेहद ज़रूरी है।

ऐसे काम करता है विटामिन-डी

जब हमारी त्वचा सूर्य की किरणों के संपर्क में आती है, तब शरीर स्वयं विटामिन-डी बनाता है। यह विटामिन शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में मदद करता है, जिससे हडि्डयां व दांत मज़बूत बने रहते हैं। वहीं, जब शरीर में विटामिन-डी का स्तर कम हो जाता है, तो कैल्शियम ठीक ढंग से अवशोषित नहीं हो पाता। इसका सीधा असर हडि्डयों, मांसपेशियों व रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। महिलाओं में हॉर्मोन संतुलन बनाए रखने में भी इसकी अहम भूमिका होती है।

इसलिए होती है कमी

लोग ज़्यादातर समय घर या कार्यालय के भीतर बिताते हैं व सुबह की धूप भी नहीं लेते। असंतुलित आहार, प्रोसेस्ड चीज़ों पर निर्भरता और बढ़ती उम्र भी इस कमी को बढ़ाते हैं।

लक्षण बताते हैं ज़रूरत

लगातार थकान महसूस होना, हडि्डयों, जोड़ों और कमर में दर्द, बार-बार सर्दी-ज़ुकाम होना, बालों का झड़ना व मनोदशा में बदलाव इसके आम संकेत हैं। लंबे समय तक विटामिन-डी की कमी से हडि्डयां कमज़ोर हो जाती हैं, मांसपेशियों में कमज़ोरी और रोग-प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, ख़ासकर महिलाओं और बुज़ुर्गों में।

रोज़ के आहार से होगी पूर्ति

बच्चे… (1-12 वर्ष) दैनिक ज़रूरत- लगभग 10-15 माइक्रोग्राम।

किशोर और वयस्क… (13-55 वर्ष) दैनिक ज़रूरत- 15-20 माइक्रोग्राम।

वरिष्ठ… (56+ वर्ष) दैनिक ज़रूरत- 20-25 माइक्रोग्राम।

महिलाएं… (18-40 वर्ष) दैनिक ज़रूरत- 15-20 माइक्रोग्राम।

गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं दैनिक ज़रूरत- 20-25 माइक्रोग्राम।

40+ महिलाएं/मीनोपॉज़ के आसपास दैनिक ज़रूरत- 20-25 माइक्रोग्राम।

यहां मिलेगा विटामिन-डी

धूप सबसे अच्छा स्रोत है, विटामिन-डी पाने का। सुबह 8:30-10:30 बजे के बीच धूप में 15-20 मिनट बैठें। हाथ, पैर और चेहरा खुले हों, इसका ध्यान रखें। शी️शे की आड़ में, बादलों वाली धूप में या सनस्क्रीन लगाकर धूप न लें।

आहार… घी, मक्खन, दूध या दही लें। घर का बना पनीर लेना फ़ायदेमंद है। तिल, मूंगफली और चने (हड्डियों को मज़बूत करने के लिए) का सेवन करें। मांसाहारी आहार… अंडे की ज़र्दी (2-3 बार/सप्ताह) लें। फैटी मछलियां, जैसे- मैकेरल, हिल्सा और सारडिन आदि विटामिन-डी का अच्छा स्रोत हैं। इन्हें नियमित आहार में शामिल करें। इनके अलावा, रोहू, साल्मन और ट्यूना मछलियां भी विटामिन-डी के अच्छे स्रोत होती हैं, जिनका सेवन सप्ताह में 1-2 बार करें। 3 सप्लीमेंट्स… आहार से विटामिन-डी की पूर्ति नहीं की जा सकती। अधिक कमी की स्थिति में चिकित्सक की सलाह पर सप्लीमेंट्स लिए जाते हैं। इसे ख़ुद न लें।

कैल्शियम के साथ फ़ायदा मिलेगा

विटामिन-डी कैल्शियम के साथ लेने से फ़ायदा मिलता है। उदाहरण के लिए-

फैटी फिश और तिल/चना- मछली में विटामिन-डी और तिल/चने में कैल्शियम और खनिज होते हैं।

अंडे की ज़र्दी व दूध/दही- अंडे की ज़र्दी में विटामिन-डी व दूध/दही में कैल्शियम होता है।

विटामिन-डी और कैल्शियम का सही संयोजन होना ज़रूरी है, लेकिन सही मात्रा के बिना सिर्फ़ संयोजन से कमी पूरी नहीं होती। इसलिए इसके लिए आहार विशेषज्ञ की सलाह लें तो बेहतर है।

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