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क्रॉनिक डिजीज है तो नौतपा में सावधान:हीट स्ट्रोक का रिस्क ज्यादा, ये 11 संकेत इग्नोर न करें, तुरंत डॉक्टर से मिलें

आज नौतपा का दूसरा दिन है। गर्मी अपने चरम पर है, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। हाई टेम्परेचर में शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है। इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।

जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है, उनके लिए यह समय और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटी-सी लापरवाही उनके लिए बड़ी परेशानी की वजह बन सकती है।

आज बात करेंगे कि किन लोगाें को नौतपा में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही जानेंगे कि-

  • शरीर के कौन-से संकेत इग्नोर नहीं करने चाहिए?
  • इस दौरान खुद को सुरक्षित कैसे रखें?

सवाल- नौतपा में किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं?

जवाब- इन 9 दिनों में तापमान इतना ज्यादा होता है कि बॉडी अपना कोर टेम्परेचर कंट्रोल नहीं कर पाती है। इसके कारण कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।

हार्ट डिजीज

  • सांस फूल सकती है।
  • सीने में दर्द बढ़ सकता है।
  • हार्ट रेट इर्रेगुलर हो सकती है।
  • बेहोशी हो सकती है।
  • गंभीर केस में हार्ट फेलियर हो सकता है।

लिवर डिजीज

  • थकान और कमजोरी बढ़ सकती है।
  • भूख न लगने, उल्टी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • पेट या पैरों में सूजन बढ़ सकती है।
  • गंभीर मामलों में लिवर डैमेज का रिस्क बढ़ता है।

किडनी डिजीज

  • यूरिन फ्रीक्वेंसी कम हो सकती है।
  • शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ सकता है।
  • थकान, चक्कर की समस्या हो सकती है।
  • पोटेशियम/सोडियम बैलेंस बिगड़ने से हार्ट बीट घट-बढ़ सकती है।
  • गंभीर स्थिति में किडनी फंक्शनिंग खराब हो सकती है।

डायबिटीज

  • ब्लड शुगर अचानक फ्लक्चुएट (कम-ज्यादा) हो सकता है।
  • डीहाइड्रेशन हो सकता है, बहुत ज्यादा प्यास लग सकती है।
  • चक्कर आ सकता है, कमजोरी महसूस हो सकती है।
  • घाव/इन्फेक्शन बढ़ सकते हैं।
  • गंभीर मामलों में बेहोशी हो सकती है।

हाई ब्लड प्रेशर

  • BP अचानक लो हो सकता है।
  • चक्कर/बेहोशी हो सकती है।
  • BP कंट्रोल से बाहर जा सकता है।
  • सिरदर्द, भारीपन लग सकता है।
  • कमजोरी या अस्थिर महसूस हो सकता है।

ओबिसिटी

  • बहुत जल्दी थकान हो सकती है।
  • सांस फूल सकती है।
  • ज्यादा पसीना आ सकता है, डीहाइड्रेशन हो सकता है।
  • हीट एग्जॉशन/हीट स्ट्रोक हो सकता है।

अस्थमा/COPD

  • सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है।
  • बार-बार खांसी या व्हीजिंग (सीटी जैसी आवाज) हो सकती है।
  • सीने में जकड़न हो सकती है।
  • बार-बार इनहेलर की जरूरत पड़ सकती है।
  • गंभीर मामलों में अचानक अटैक हो सकता है।
  • गर्मी के साथ धूल/प्रदूषण हो तो लक्षण और बिगड़ सकते हैं।

ऑटोइम्यून डिजीज

  • रूमेटाइड आर्थराइटिस, ल्यूपस जैसी हेल्थ कंडीशंस हो सकती हैं।
  • बहुत ज्यादा थकान हो सकती है।
  • चक्कर या कमजोरी हो सकती है।
  • बीमारी के लक्षण अचानक बढ़ सकते हैं।
  • जोड़ों में दर्द/सूजन बढ़ सकती है।
  • ल्यूपस में स्किन पर रैशेज बड़ सकते हैं।
  • अगर इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं ले रहे हैं तो-
  • इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
  • शरीर की गर्मी झेलने की क्षमता कम हो सकती है।

    सवाल- किस स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

    जवाब- इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें-

    • अगर बेहोशी आए।
    • बॉडी टेम्परेचर बहुत ज्यादा बढ़ जाए और हीटस्ट्रोक का शक हो।
    • सांस लेने में दिक्कत हो या घुटन महसूस हो।
    • सीने में लगातार दर्द, दबाव या जलन महसूस हो।
    • हार्ट बीट बहुत तेज, धीमी या अनियमित हो जाए।
    • बार-बार उल्टी हो और बॉडी पानी स्टोर करने लगे।
    • कन्फ्यूजन हो, बोलने में दिक्कत हो या व्यवहार अचानक बदल जाए।
    • सवाल- क्या इन हेल्थ कंडीशंस में पहले ही डॉक्टर से मिलकर अपना रूटीन बदलना चाहिए?

      जवाब- हां, अगर कोई क्रॉनिक बीमारी है तो मौसम बदलने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी होता है।

      डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा या थायरॉइड जैसी कंडीशंस में शरीर पहले से ही बैलेंस की कोशिश कर रहा होता है। अचानक मौसम बदलने से वर्कलोड और बढ़ सकता है।

      डॉक्टर से कंसल्ट करने के फायदे

      • सेफ्टी: कौन-सी एक्सरसाइज या डाइट सुरक्षित है, यह तय होता है।
      • दवाओं का एडजस्टमेंट: रूटीन बदलने पर दवा की डोज बदलनी पड़ सकती है।
      • पर्सनल प्लान: उम्र, बीमारी की स्टेज और लाइफस्टाइल के हिसाब से कस्टम प्लान मिलता है।
      • कम्प्लीकेशन्स से बचाव: गलत बदलाव से होने वाले साइड-इफेक्ट्स रोके जा सकते हैं।

      सवाल- अगर किसी को रोज ऑफिस जाना है तो उसे क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

      जवाब- ज्यादा तेज गर्मी में रोज ऑफिस जाना थोड़ा रिस्की हो सकता है, लेकिन सावधानी से इसे मैनेज किया जा सकता है।

      सबसे पहले समझ लें कि ऐसी गर्मी में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है और हीट स्ट्रोक या डीहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है, जो क्रॉनिक पेशेंट्स के लिए ज्यादा गंभीर हो सकता है।

      क्या-क्या सावधानी रखें?

      • दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।
      • सिर्फ सुबह-शाम बाहर निकलें।
      • हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
      • छाता, कैप या गमछा इस्तेमाल करें।
      • दवाएं समय पर खाएं, कोई दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
      • ज्यादा ऑयली, स्पाइसी और हैवी फूड अवॉइड करें।
      • खाने में तरबूज, खीरा, दही जैसे कूलिंग फूड शामिल करें।
      • AC/कूलर का सही इस्तेमाल करें।
      • हर आधे घंटे में पानी पीना न भूलें।
      • बहुत ज्यादा फिजिकल स्ट्रेस से बचें।

      सवाल- क्या डॉक्टर से पूछकर दवा की डोज बदलनी चाहिए?

      जवाब- हां, डोज बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूरी है। खुद बदलाव करने से असर घट या बढ़ सकता है और साइड-इफेक्ट्स या समस्याएं बढ़ सकती हैं।

      सवाल- क्या गर्मी में दवाइयों का असर बदल सकता है?

      जवाब- हां, तेज गर्मी में शरीर का मेटाबोलिज्म और फ्लूइड बैलेंस बदलता है, जिससे कुछ दवाओं का असर ज्यादा या कम हो सकता है।

      सवाल- किन दवाओं से डीहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ता है?

      जवाब- डाइयूरेटिक्स (यूरिन बढ़ाने वाली दवाएं), लैक्सेटिव्स (कब्ज दूर करने वाली दवाएं) और BP की कुछ दवाओं से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इससे डीहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है।

      सवाल- इंसुलिन या अन्य दवाओं को गर्मी में कैसे स्टोर करें?

      जवाब- इंसुलिन और कई दवाओं को ठंडी, सूखी जगह (आमतौर पर 2-8°C) में रखें। धूप और ज्यादा गर्मी से बचाएं।

      सवाल- नौतपा में शरीर को ठंडा रखने के लिए क्या खाएं?

      जवाब- तरबूज, खीरा, दही और नारियल पानी जैसे हल्के, पानी से भरपूर चीजें खाएं। ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल करने में मदद करते हैं।

      सवाल- क्या इस दौरान कैफीन और अल्कोहल ले सकते हैं?

      जवाब- कैफीन और अल्कोहल सीमित रखें। ये यूरिन फ्रीक्वेंसी को बढ़ाकर शरीर से पानी निकालते हैं, जिससे डीहाइड्रेशन और थकान हो सकती है।

      सवाल- क्या घर में रहने पर भी डीहाइड्रेशन हो सकता है?

      जवाब- हां, कम पानी पीने, पसीना आने या AC में लंबे समय रहने से भी शरीर डीहाइड्रेट हो सकता है, भले ही आप घर के अंदर ही क्यों न हों।

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