झारखंड

कार्तिक जतरा से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश:गुमला में विश्वविद्यालय बनाना था कार्तिक उरांव का सपना, यह जल्द होगा साकार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड पहुंचीं। उन्होंने यहां आयोजित दो दिवसीय अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ में भाग लिया। यहां जनसभा को संबोधित करने के दौरान राष्ट्रपति ने पंखराज साहेब कार्तिक उरांव के उस सपने को पूरा करने का भरोसा दिलाया, जिसमें गुमला जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना की कल्पना की गई थी।

राष्ट्रपति बोली- कार्तिक उरांव के सपने को जल्द ही साकार किया जाएगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि गुमला में विश्वविद्यालय की स्थापना करना न केवल कार्तिक उरांव का सपना था, बल्कि यह उनके जीवन का भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इस सपने को जल्द ही साकार किया जाएगा।

जनजातीय कला-संस्कृति की सराहना की

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में जनजातीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संगीत, नाटक, नृत्य और कला परंपराएं बेहद समृद्ध हैं। इसी वजह से देशभर से 100 से अधिक कलाकारों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है।

‘कार्तिक जतरा’ के मंच से उन्होंने आदिवासी पहचान, परंपरा और संस्कृति को संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आई आदिवासी पारंपरिक नृत्य मंडलियों ने अपनी लोक कला और संस्कृति का रंगारंग प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

लोगों से राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा से ही राज्य का विकास संभव है।

शिक्षा से ही राज्य का विकास संभव

कहा कि शिक्षा विकास की सबसे बड़ी पूंजी है। जब शिक्षा का विकास होगा, तभी राज्य और समाज का समग्र विकास संभव हो सकेगा। शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास किए जा रहे हैं, वे निस्संदेह सराहनीय हैं। हालांकि, इससे जुड़े जमीन संबंधी विषयों का समाधान होने के बाद ही यह प्रयास पूरी तरह साकार हो पाएंगे। इसके बावजूद शिक्षा के विस्तार को लेकर जो संकल्प और मेहनत की जा रही है, वह एक न एक दिन जरूर सफल होगी।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

पंखराज कार्तिक उरांव सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वे भारत के गौरव थे और उन्होंने शिक्षा के महत्व पर हमेशा विशेष जोर दिया। भले ही उन्होंने विदेश में शिक्षा ग्रहण की, लेकिन उनकी सोच अपनी माटी और अपने लोगों के लिए समर्पित रही। उनका सपना था कि इस क्षेत्र में एक विश्वविद्यालय स्थापित हो, जहां आज लोग जतरा के माध्यम से उन्हें याद करते हैं। यह भी एक संयोग है कि आज झारखंड का नेतृत्व एक जनजातीय मुख्यमंत्री कर रहे हैं।

तीन राज्य के सीएम और केंद्रीय मंत्री रहे उपस्थित

पंखराज साहेब कार्तिक उरांव चौक बैरियर बगीचा, मांझाटोली में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मौजूद थे।

इनके अतिरिक्त केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव, एसटी-एससी विषयक संसदीय समिति के अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते और झारखंड के राज्यपाल आशीष गैंगवार भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन ने जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

 

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