झारखंड

जामताड़ा में नववर्ष पर लाधना डैम में उमड़ रही भीड़:सूर्योदय-सूर्यास्त, नौका विहार और हरियाली से बना पहली पसंद

नववर्ष के आगमन पर जामताड़ा जिले का प्रसिद्ध लाधना डैम पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है। नए साल के जश्न और दिसंबर के अंतिम महीने में यहां सैलानियों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

जामताड़ा सहित आसपास के जिलों और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं।

लाधना डैम की मुख्य विशेषता यहां से दिखने वाला सूर्योदय और सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य है। पर्यटक यहां नौकाविहार का आनंद लेते हैं और डैम के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच समय बिताते हैं।

यहां से दिखने वाला सूर्योदय और सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य है।

यहां पर्यटकों का आना वर्ष के अंतिम महीने से ही शुरू हो जाता है

जामताड़ा मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित यह डैम पानी, ऊंचे पहाड़ों और हरियाली से घिरा है। शहर के कोलाहल से दूर शांति चाहने वाले लोग यहां सुकून के पल बिताने आते हैं।

यह पिकनिक स्थल पूरे झारखंड में प्रसिद्ध है। नववर्ष के पहले दिन यहां हजारों लोग डीजे, संगीत और व्यंजनों के साथ जश्न मनाते हैं। पर्यटकों का आना वर्ष के अंतिम महीने से ही शुरू हो जाता है।

पर्यटकों की सुविधा के लिए डैम पर एक पहाड़ी सेल्फी प्वाइंट और बच्चों के लिए एक छोटा पार्क भी विकसित किया गया है।

साहिबगंज से मिहिजाम अपने रिश्तेदार के यहां पहुंचे पर्यटक सत्येंद्र ओझा ने बताया कि उन्होंने लाधना डैम के बारे में काफी सुना था। उन्हें यहां का नौकाविहार, हिल्सटॉप, सूर्यास्त का दृश्य और ऊंची पहाड़ियां पसंद आईं। उन्होंने इस स्थान की तुलना कश्मीर की डल झील से की।

सरकार को इन क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए: पर्यटक

वहीं, दोस्तों के साथ पहुंचे जामताड़ा के ही संजय परशुरामका ने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पर्यटन के विकास से वहां की जीवनशैली में बदलाव आया है। लेकिन प्राकृतिक संपदा से भरपूर होने के बावजूद झारखंड पर्यटन के क्षेत्र में अभी पीछे है।

उन्होंने कहा कि लाधना डैम, पर्वत बिहार और मां मालांचा पहाड़ जैसे स्थल बेहद खूबसूरत हैं और सरकार को इन क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि झारखंड भी पर्यटन के मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना सके।

सैलानी यहां नौका विहार का लुत्फ उठाते हैं।

लगभग 15 से 20 नाव रोजाना चलते हैं

लाधना डैम के नाविक बाबन मंडल ने बताया कि वर्ष के अंतिम महीने से ही लगभग 15 जनवरी तक यहां खूब सैलानियों का जमावड़ा रहता है, यहां अभी लगभग 15 से 20 नाव रोजाना चलते हैं और इसी से उनके परिवार का भरण पोषण भी होता है। लोग शांति की तलाश में यहां पहुंचते हैं और प्रकृति का आनंद उठाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button