उत्तर प्रदेश

लेपर्ड 10 मिनट तक बच्चे की गर्दन पकड़कर बैठा रहा:रोजाना पिता के साथ मंदिर जाता था, बोले-जिंदगी भर अफसोस रहेगा, बेटे को बचा नहीं पाया

सवाई माधोपुर के रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में गुरुवार को लेपर्ड ने एक सात साल के बच्चे काे मार डाला था। पिता के पास से लेपर्ड बच्चे को झपट्टा मार जंगल में ले गया।

इस हादसे के बाद परिजनों ने शव उठाने से मना कर दिया था। शुक्रवार को 17 घंटे बाद सहमति बनी और शव को उठाया।

मेडिकल बोर्ड से हुए पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में बच्चे की गर्दन पर लेपर्ड के दांतों के निशान मिले है। बताया जा रहा है कि लेपर्ड करीब 10 मिनट तक बच्चे की गर्दन को जकड़ कर बैठा रहा।

इधर, इस घटना के बाद पिता रामजीलाल को बेटे को न बचा पाने का अफसोस है। पिता का कहना है कि- जिंदगीभर बच्चे को नहीं बचा पाने का अफसोस रहेगा।

फोटो गुरुवार का है। जब विक्रम का शव झाड़ियों में मिला था।

लेपर्ड के हमले से गर्दन की ह​ड्डियां तक टूट गई

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि सात साल के विक्रम की मौत ज्यादा खून बहने से हुई थी। डॉक्टर्स का कहना है बच्चे के गले में लेपर्ड के दांतों के निशान मिले है।

लेपर्ड बच्चे की गर्दन दबोच कर दस मिनट तक झाड़ियों में बैठा रहा। इस दौरान ज्यादा खून बहने से और गले की हड्डी टूटने से बालक की मौत हो गई थी।

पिता बोले- रोज मेरे साथ मंदिर जाता था

विक्रम के पिता रामजीलाल बंजारा बताते हैं कि बंजारा लोग यहां 45 साल से रह रहे हैं। विक्रम का जन्म भी इसी बस्ती में हुआ था। वह रोज मेरे साथ घर से 150 मीटर दूर आटीला बालाजी मंदिर जाता था।

शाम को जब घर आता तो उसके बाद उसे लेकर मैं धूप और दीपक करने अपने साथ ले जाता था। गुरुवार को भी वह हमेशा की तरह मेरे साथ गया था। मेरा हाथ उसने पकड़ रखा था। पता नहीं कब लेपर्ड आया और उसे झाड़ियों में लेकर चला गया।

विक्रम को बचाने के लिए मैं पीछे भागा और चिल्लाया लेकिन उसे बचा नहीं पाया। इसका मुझे जिंदगीभर अफसोस रहेगा। इस हादसे के बाद विक्रम की मां भी बेसुध है।

सड़क पर खून बिखरा, वन विभाग ने पिंजरा लगाया

इस हादसे के बाद जब मौके पर पहुंचे तो सड़क पर खून बिखरा हुआ था। यहां मौजूद बच्चों ने बताया कि लेपर्ड जब विक्रम को गर्दन से दबोच कर ले गया तो सड़क पर खून बिखर गया था।

वहीं इस घटना के बाद वन विभाग की ओर से आटीला बालाजी मंदिर के पास पिंजरा लगाया गया है। वनाधिकारियों ने लेपर्ड को पकड़ने के लिए टीम का गठन कर दिया है।

इधर, शुक्रवार को विक्रम का शव परिजनों को सौंपा गया। इस घटना के बाद परिजन मुआवजा समेत अन्य मांगों पर अड़ गए थे। 17 घंटे बाद मृतक के परिजनों को वन विभाग की ओर से 5 लाख रुपए का मुआवजा, आश्रित को वन विभाग में गाइड या वॉलंटियर योग्यता अनुसार बनाने, मुख्यमंत्री आयुष्मान बीमा योजना के तहत 5 लाख रुपए की सहायता, मुख्यमंत्री सहायता कोष से अधिकतम रराशि दिलवाने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिलवाने की मांग पर सहमति बनी।

शुक्रवार का पुलिस अधिकारी घटना की जानकारी लेने मौके पर पहुंचे थे।

वन विभाग के रिकॉर्ड में फूल की एंट्री

इस घटना के बाद जब वन विभाग से जानकारी जुटाई तो सामने आया कि दोपहर 3:30 बजे से ही लेपर्ड का मूवमेंट इस इलाके में था।

राजबाग के ट्रैकिंग बीट गार्ड ने फूल ( ट्रेकिंग की भाषा में लेपर्ड को फूल कहते हैं) की जानकारी बताई थी। बताया जा रहा है कि इसके बाद आस-पास के लोगों को भी लेपर्ड के मूवमेंट के बारे में बताया गया था।

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