साल 1984 में एक अंग्रेज़ी फिल्म आई थी, 'द टर्मिनेटर' उस फिल्म की कहानी में एक कंप्यूटर रक्षा नेटवर्क खुद जागरूक हो जाता है उसे यह लगने लगता है कि इंसान उसके अस्तित्व के लिए ख़तरा हैं, और वह मानव जाति को समाप्त करने की कोशिश शुरू कर देता है इसका परिणाम परमाणु युद्ध के रूप में सामने आता है

उस दौर में यह केवल साइंस फ़िक्शन थी एआई के अपने निर्माताओं के ख़िलाफ़ हो जाने की एक कल्पना लेकिन लगभग चार दशक बाद दुनिया के कुछ प्रमुख एआई शोधकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि उस कल्पना के कुछ हिस्से किसी न किसी रूप में वास्तविकता का रूप ले सकते हैं एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोदेई ने इसी संदर्भ में 'पेस द फ़्रंटियर' की बात कही है उनका तर्क यह नहीं है कि एआई का विकास रोक दिया जाए, बल्कि यह है कि इसकी प्रगति इतनी तेज़ न हो कि सुरक्षा उपाय और शोध उससे पीछे छूट जाएं |

यह चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अब एआई सिस्टम केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं हैं वे धीरे-धीरे स्वयं कार्य करने की दिशा में बढ़ रहे हैं यहां तक कि साइबर ऑपरेशंस जैसे क्षेत्रों में भी एंथ्रोपिक के अनुसार, उसके क्लॉड एआई सिस्टम का उपयोग साइबर अपराध, धोखाधड़ी, निगरानी और हथियारों से जुड़े कार्यों में किया गया है कंपनी के शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिक सक्षम एआई सिस्टम को अब पहले की तुलना में अधिक स्वायत्तता, अधिक पहुंच और लंबे समय तक काम करने की क्षमता दी जा रही है


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