अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का ऐलान किया है। अभी तक रूसी तेल खरीद के लिए भारत और चीन पर टैरिफ वाले बिल पर साइन करने वाले ट्रंप ने अगले तीन महीने रूसी तेल को अमेरिकी और वैश्विक बाजार में आने देने का समझौता किया है। बता दें, यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन सिर पर हैं और कच्चे तेल की बड़ी हुई कीमतों की वजह से ट्रंप के ऊपर दबाव बढ़ रहा है। होर्मुज बंद होने से परेशानी और भी ज्यादा बढ़ गई है।
कभी रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ऐलान किया कि उन्होंने पुतिन के साथ मिलकर एक बेहतरीन एनर्जी डील साइन की है। सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने इस डील का ऐलान एक पोस्ट के जरिए किया। ट्रंप ने लिखा, "अभी-अभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक बहुत सफल बातचीत पूरी की है। इसमें तय हुआ है कि रूस तुरंत अमेरिकी और ग्लोबल मार्केट में 3,00,000 टन से ज्यादा डीजल फ़्यूल सप्लाई करेगा, नवंबर के महीने में 5,00,000 टन और सप्लाई करेगा, उसके तुरंत बाद 10,00,000 टन और सप्लाई करेगा। इसके बाद अपनी डीजल रिफाइनरीज की स्थिति के आधार पर रूस कुछ ही समय में 30,00,000 टन डीजल फ्यूल और सप्लाई करेगा।"

बता दें, ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईरान युद्ध की वजह से वैश्विक बाजार में लगातार तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। कच्चे तेल की महंगी होती कीमतों की वजह से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है। इसके असर अमेरिका में भी दिख रहा है। ट्रंप ने रूस के साथ इस डील के लिए नवंबर तक का समय निश्चित किया है। तब तक अमेरिका में मध्यावधि चुनाव चल रहे होंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज पर कंट्रोल और रूस के साथ एनर्जी डील के बाद पूरी दुनिया और अमेरिका में तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर कम होंगी। अमेरिकियों, खासकर हमारे महान किसानों, पशुपालकों और ट्रक ड्राइवरों के लिए कीमतें कम करना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यह एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणा है। साथ ही, यह भी समझना ज़रूरी है कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं होगा!" हालांकि, अभी तक इस डील के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। पूरी डिटेल सामने आने पर ही पता लगेगा कि इससे भारत को किस स्तर तक फायदा होगा।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार आने के बाद से लगातार भारत पर निशाना साधा जा रहा है। इसके लिए ट्रंप के एक मंत्री ने भारत को यूक्रेन युद्ध के लिए जिम्मेदार तक करार दे दिया था। हालांकि, अब वही अमेरिका अपने फायदे के लिए रूसी डीजल खरीदने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका की कांग्रेस ने अभी हाल ही में रूसी तेल खरीद रहे देशों के ऊपर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाला कानून भी बनाया है। उस वक्त भी अमेरिकी सांसदों ने भारत और चीन को चेतावनी दी थी। लेकिन अब यह फैसला अमेरिका के दोहरे चरित्र को दिखाता है। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही यूक्रेन भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। पहले तो ट्रंप ने यूक्रेन भेजे जाने वाले हथियारों की कीमत नाटो से वसूलनी शुरू कर दी थी। अब जिस रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए अमेरिका सेंक्शन्स लगाए हुए था। अब वह उसी से डीजल खरीदने और वैश्विक बाजार में सप्लाई करने की डील कर रहा है। इससे रूस के पास और पैसा पहुंचेगा।


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