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Sun, Nov 1, 2026
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23 दिन की खौफनाक कहानी: साइबर ठगों ने बुजुर्ग को बेटे के नाम पर डराया, 16 लाख मांगे

मनी लॉन्डिंग केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर विदिशा में साइबर ठगों ने बिजली कंपनी के रिटायर्ड एक्जीक्यूटिव सेक्शन ऑफिसर (70) से 69.27 लाख रुपए ठग लिए। बुजुर्ग को पत्नी समेत 23 दिन तक डिजिटल अरेस्…

23 दिन की खौफनाक कहानी: साइबर ठगों ने बुजुर्ग को बेटे के नाम पर डराया, 16 लाख मांगे

मनी लॉन्डिंग केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर विदिशा

 में साइबर ठगों ने बिजली कंपनी के रिटायर्ड एक्जीक्यूटिव सेक्शन ऑफिसर (70) से 69.27 लाख रुपए ठग लिए। बुजुर्ग को पत्नी समेत 23 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। रिटायर्ड कर्मचारी को इतना डराया कि स्टेट बैंक के खाते से उन्होंने 8 बार ट्रांजेक्शन कर ठगों के खाते में रुपए भेज दिए। इतने दिन ठगों के चंगुल में फंसे रहे बुजुर्ग इतने खौफजदा हो गए कि पुलिस से शिकायत करने की कोशिश ही नहीं कर सके। बैंक ने लगातार हैवी ट्रांजेक्शन देखा तो खाते में होल्ड लगा दिया। इसके बाद पीडि़त सिविल लाइन थाने पहुंचा। पुलिस से कहा कि मेरा खाता होल्ड हो गया है। बेटे को 16 लाख रुपए भेजने हैं, खाता खुलवा दीजिए। पुलिस ने जब पीडि़त से गहराई से पूछताछ की तब जाकर ठगी का मामला सामने आया।

थाना पुलिस ने एसपी रोहित काशवानी को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद सक्रिय हुई पुलिस टीम ने ठगों के उन खातों से लेनदेन पर पाबंदी लगवा दी, जिन खातों से ठग रकम नहीं निकाल सके थे। पुलिस की इस सक्रियता से पीडि़त के 23 लाख रुपए बच गए। एसपी के अनुसार न्यायालय के माध्यम से जल्द ही पीडि़त को यह रकम मिल जाएगी। बाकी की रकम और पूरे मामले की जांच के लिए एसपी ने 5 टीमें बनाई है। सभी टीमों ने अलग-अलग फैक्ट पर जांच शुरू कर दी है।

 

सिविल लाइन पुलिस के अनुसार पार्वतीपुरम बंटीनगर थाना क्षेत्र के शिवमंदिर वाली गली में रहने वाले बुजुर्ग रिटायर्ड ऑफिसर को 5 अक्टूबर को फोन आया। कॉलर ने कहा, आपके नाम से सिम जारी की गई है। साथ ही सिम से मनी लॉन्डिंग की गई है। इस अपराध में रिटायर्ड अफिसर को भी शामिल बताया गया। कहा गया कि अब उनकी गिरफ्तारी होगी। कॉलर ने खुद को सीबीआइ अफसर बताया। इस कॉल से बुजुर्ग डर गए। कॉलर ने गिरफ्तार न करने के लिए रुपए मांगे। इससे बुजुर्ग ने उनके खाते में रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठगों न रुपए मांग। उन्होंने 28 अक्टूबर तक फोन पर उन्हें अरेस्ट रखा। रुपए के दबाव बनाते रहे। बताते हैं कि 8 ट्रांसजेक्शन कर बुजुर्ग ने ठगों के खाते में 69.27 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।

ठगों के दबाव में आए बुजुर्ग की पूरी जिंदगी की जमा पूंजी उनके खाते में डाल दी। रिटायरमेंट के बाद मिले फंड, बीमा और पत्नी के खाते में जमा राशि ठगों की ओर से बताए गए खातों में ट्रांसफर करने के बाद नौबत अब घर बेचने की आ गई है। वे आर्थिक संकट में फंस गए। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है। थाना प्रभारी राजपाल सिंह जादौन ने बताया कि मोबाइल और सोशल मीडिया नंबरों की जांच की जा रही है। पीडि़त की मनोदशा अभी भी ठीक नहीं है। वे डरे हुए हैं। पुलिस ने बताया कि बुजुर्ग ने पेंशन और एलआइसी से आए रुपए अपने खाते में रखे थे। ठगों ने खाते की पूरी जानकारी बुजुर्ग से पहले ही ले ली थी। जब लगातार खाते से मोटी रकम भेजी जाने लगी तो बैंक हरकत में आ गया। ठगी की आशंका पर तत्काल खाता होल्ड कर दिया। बैंक की ओर से 28 अक्टूबर को खाता होल्ड किए जाने के बाद ठगों ने बुजुर्ग को सुझाव दिया कि वह पुलिस थाने में जाकर बेटे को रुपए भेजने के नाम पर आवेदन देकर खाता दोबारा चालू कराएं। इसके बाद बुजुर्ग सिविल लाइन थाने पहुंचे और पुलिस की पूछताछ में पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को ही डिजिटल अरेस्ट के मामलों की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने चिंता जताई थी। कहा था, इतनी जागरूकता के बावजूद पढ़े-लिखे लोग कैसे मोबाइल पर गिरफ्तार हो रहे हैं। मोबाइल दीवार पर मार दो, डिजिटल अरेस्ट खत्म हो जाएगा। सीजेआई ने यह भी कहा कि ये लोग ऐसे कैसे फंस रहे हैं। ऐसे मामलों में बैंकों को भी जिम्मेदार बनाना होगा। एसपी रोहित काशवानी ने लोगों से अपील की है कि सीबीआइ, ईडी या पुलिस डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। रुपए नहीं मांगती। इसलिए किसी को कोई जानकारी न दें और न ही डरें। ऐसा कॉल आए तो पुलिस से शिकायत करें। ठगी हो तो 1930 पर शिकायत करें।

 

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