मध्य प्रदेश लोकायुक्त के बर्खास्त ड्राइवर अमित विश्वकर्मा ने कबूलनामा दिया- डीएसपी ने 5 लाख मांगे थे:खुलासे के बाद पहली बार लोकायुक्त में CCTV से निगरानी

मध्य प्रदेश लोकायुक्त के बर्खास्त ड्राइवर अमित विश्वकर्मा ने कबूलनामा दिया है। डीजी लोकायुक्त को दिए स्पष्टीकरण में उन्होंने स्वीकार किया कि डीएसपी बीएम द्विवेदी ने केस रफा-दफा करने के एवज में भास्कर रिपोर्टर से 5 लाख रुपए मांगने के लिए कहा था।
कबूलनामे के बाद लोकायुक्त डीजी ने अफसरों की निगरानी के लिए इंटरनल विजिलेंस टीम गठित कर दी है। साथ ही अधिकारियों के कमरों में CCTV कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। डीजी ने स्वीकार किया कि भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद लोकायुक्त की छवि पर दाग लगा है, लेकिन संगठन की सफाई का मौका भी मिला है।
3 और 4 जून को बताया गया था कि लोकायुक्त में केस रफा-दफा करने के एवज में रिश्वत का नेटवर्क सक्रिय है। इस नेटवर्क में ड्राइवर से लेकर डीएसपी तक शामिल है। इस खुलासे के बाद लोकायुक्त की व्यवस्था में बदलाव हुआ है।
अमित का कबूलनामा- डीएसपी ने पैसे मांगने के लिए कहा
भास्कर के खुलासे के बाद डीजी लोकायुक्त ने ड्राइवर अमित विश्वकर्मा को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इससे पहले उससे पक्ष मांगा गया था। विश्वकर्मा ने बताया कि 30 अप्रैल को श्याम साहू (भास्कर रिपोर्टर) का फोन आया था। उसने कहा कि उसे मेरा नंबर मिला है और वह अपने रिश्तेदार के केस पर बात करना चाहता है।
मैंने उसे पीपुल्स मॉल के पास मिलने बुलाया। केस की जानकारी मिलने पर मैंने कहा- साहब से मिलकर बात होगी। अगले दिन मैं डीएसपी बीएम द्विवेदी से मिला।
केस पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि वॉयस सैंपल और इन्वेस्टिगेशन को जितना लंबा हो सकता है, उतना किया जा सकता है। मैंने पूछा कि क्या करना है, तो उन्होंने कहा कि श्याम साहू से 5 लाख रुपए की डील करो।

आवाज बदलकर बोलने की बात भी कबूली
4 मई को मैंने श्याम साहू को डीएसपी द्विवेदी से हुई बातचीत बताई। उसने कहा, ठीक है करवा देंगे, लेकिन अभी पूरा नहीं होगा। इसके बाद मैंने डीएसपी को फोन लगाया और श्याम साहू से कहा कि 19 तारीख को आधा पेमेंट कर दे, बाकी वॉयस सैंपल देने के बाद। 19 तारीख को श्याम साहू लोकायुक्त दफ्तर में मिला। मैंने उसे डीएसपी द्विवेदी से मिलाया।
वहां दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, मुझे नहीं पता। 23-24 मई को श्याम साहू मिला तो मैंने उससे कहा था कि आवाज बदलकर बोलना, जिससे केस कमजोर हो जाएगा।

हेड कॉन्स्टेबल यशवंत से सफाई भी नहीं मांगी
डीजी लोकायुक्त ने सागर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह को भी बर्खास्त किया है। यशवंत से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन डीजी लोकायुक्त ने उसे मान्य नहीं किया। आदेश में लिखा है कि भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन से प्रथम दृष्ट्या यह प्रमाणित होता है कि आपने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में जनता के साथ विश्वासघात किया है।
यह भी लिखा गया कि स्टिंग ऑपरेशन में दिए गए साक्ष्य पुख्ता हैं, इसलिए किसी जांच की जरूरत नहीं है।



