15 मिनट में राजधानी एक्सप्रेस के 2 डिब्बे जले;पैसेंजर बोले- कोच में धुआं उठते ही झाड़ियों में कूदे:बच्चों को बचाने में सामान छूटा
‘अचानक से कोच में आग लग गई, सभी लोग चिल्लाने लगे- जल्दी निकलो, जल्दी निकलो। हम लोग आवाज सुनकर उठे। कोच में धुआं ही धुआं था। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बच्चों को उठाकर किसी तरह कोच से बाहर निकले। इसी अफरा-तफरी में एक बड़ा और एक छोटा बैग कोच में ही रह गया। दोनों जल गए। बैग में कपड़े और जरूरी सामान रखा था।’
यह कहना है त्रिवेंद्रम-निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस के बी-1 कोच में सफर कर रहीं मीरा यादव का। मीरा अपने पति और दो बच्चों के साथ बड़ौदा से दिल्ली जा रही थीं। रविवार सुबह करीब 5:15 बजे कोटा मंडल के लूणी रीछा-विक्रमगढ़ आलोट (मध्य प्रदेश) स्टेशन के बीच ट्रेन के कोच नंबर B-1 और उसके पीछे लगे सेकेंड लगेज कम गार्ड वैन में आग लग गई।
घटना में जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लोगों के डॉक्यूमेंट्स, मोबाइल, गहने, जूते-चप्पल और कपड़े जल गए। कोच से निकलने की जद्दोजहद में कुछ यात्री चोटिल भी हुए। वहीं रेलवे ने घटना की जांच के लिए 6 मेंबर की उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है।

एक घंटे तक कोटा स्टेशन पर यात्रियों ने किया हंगामा
ट्रेन के कोटा पहुंचने पर कुछ यात्रियों की आंखों में आंसू थे तो कुछ के मन में खौफ। यात्रियों ने रेलवे की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि धुआं उठने के मात्र 15 से 20 मिनट बाद ही कोच पूरी तरह जल गए। जैसे-तैसे बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन कोच से सामान निकालने का समय नहीं मिल सका।
दमकल की गाड़ियां भी आग लगने के दो-तीन घंटे बाद मौके पर पहुंचीं। कोटा स्टेशन पहुंचने पर यात्रियों ने नुकसान की भरपाई और मुआवजे की मांग की। करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा। रेलवे प्रशासन ने कोच में सवार यात्रियों को सहायता के तौर पर 5-5 हजार रुपए का लिफाफा दिया।

यात्रियों की जुबानी, हादसे की कहानी…
झाड़ियों में कूदकर बचाई जान
गोवा से दिल्ली जा रही यात्री विरमति ने बताया- हम कोच में सो रहे थे। एक अंकल टॉयलेट जाने के लिए उठे थे, उन्हें कोच से धुआं उठता दिखाई दिया। अंकल ने सभी को आग के बारे में बताया। तब तक रेलवे के किसी स्टाफ ने आकर हमें सूचना नहीं दी थी।
हम जान बचाने के लिए तुरंत कोच से नंगे पैर ही बाहर की तरफ भागे। ट्रैक के आसपास की झाड़ियों में हम कूद गए। हमारा सारा सामान कोच में ही रह गया और सबकुछ जलकर राख हो गया। बैग में 25-30 हजार रुपए नकद भी रखे थे। इस हादसे में हमारा करीब 70-80 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।

3 घंटे देरी से पहुंची दमकल, तब तक जलकर राख हो चुका था जनरेटर यान
बारां जिले के अंता निवासी मोईज बोहरा भी इसी कोच में सूरत से कोटा आ रहे थे। मोईज ने बताया- सुबह 5 बजे अचानक कोच में धुआं दिखाई दिया। उस वक्त सब लोग नींद में थे। देखते ही देखते कोच में भगदड़ मच गई। यात्री अपना सामान कोच में ही छोड़कर नीचे उतरने लगे और खेतों में जाकर बैठ गए।
दमकल की गाड़ियां भी घटना के करीब दो से तीन घंटे बाद सुबह 8 बजे मौके पर पहुंचीं। तब तक कोच और जनरेटर यान (एसएलआर कोच) पूरी तरह जल चुके थे। लोगों का सारा सामान और मोबाइल जलकर राख हो गया। भागते समय पैरों में चप्पल तक नहीं रही, खेतों की तरफ भागे तो पैरों में कांटे चुभ गए।
अचानक सायरन बजा, तब हमारी आंख खुली
संजू मिश्रा भी अपने पति व बच्चों के साथ सूरत से दिल्ली जा रही थीं। संजू ने बताया- अचानक एसएलआर (SLR) कोच की तरफ से धुआं उठता दिखाई दिया।
देखते ही देखते बी-1 कोच में धुआं भरने लगा। जब एकदम से सायरन बजा, तब हमारी आंख खुली। पूरे डिब्बे में धुआं-धुआं हो रहा था।
हम लोग बच्चों को लेकर तुरंत बाहर निकले। हमारे बाहर निकलने के मात्र 15-20 मिनट में ही पूरा डिब्बा जलने लगा। बैग में 25 हजार रुपए नकद और सोने का मंगलसूत्र, कान के झुमके व अंगूठी रखी थी। हम लोगों के कपड़े भी उसी में थे। हमारी चप्पलें भी कोच में ही छूट गईं और जलकर राख हो गईं।

कल ही खरीदा था मोबाइल, आज आग की भेंट चढ़ गया
महाराष्ट्र निवासी प्रीति चौहान अपने पति और बच्चों के साथ कश्मीर घूमने जा रही थीं। प्रीति ने बताया- हमने घूमने के लिए बहुत सारा सामान पैक किया था, जो कुल चार बैग (लगेज) में था। कोच में आग लगने के बाद हम किसी तरह सिर्फ एक बैग ही बाहर निकाल सके, बाकी के तीन बैग कोच में सीट के नीचे ही रह गए।
हमारी प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी, इसलिए सामान पीछे छूट गया। कल ही मैंने एक नया मोबाइल खरीदा था, वह भी कोच में जलकर राख हो गया।



