यूपी में चलती ट्रेन और अस्पताल में तीन हत्याएं करने वाला साइको किलर रात 12 बजे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया:यूपी पुलिस बोली- आरोपी ने पिस्तौल छीनकर फायरिंग की

यूपी में चलती ट्रेन और अस्पताल में तीन हत्याएं करने वाला साइको किलर सोमवार रात 12 बजे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। चंदौली SP आकाश पटेल ने बताया- पुलिस आरोपी को क्राइम सीन रीक्रिएट कराने लेकर गई थी। इसी दौरान उसने पुलिस अफसर की पिस्टल छीन ली और फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की।
पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसे सिर और सीने में गोली लग गई। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मुठभेड़ शहर से 15 किमी दूर दरियापुर रेलवे लाइन के पास हुई। इसमें दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।
सेना से रिटायर साइको किलर गुरप्रीत सिंह (45) पंजाब का रहने वाला था। उसने चंदौली में 26 घंटे के भीतर बेवजह तीन हत्याएं की थीं। तीनों वारदात का पैटर्न एक जैसा था- गोली सीधे कनपटी पर मारी गई थी।
एनकाउंटर से जुड़ी 3 तस्वीरें



आरोपी ने 26 घंटे में 3 हत्याएं की थीं गुरप्रीत ने पहली हत्या रविवार (10 मई) सुबह करीब 7 बजे पैसेंजर ट्रेन में एक युवक को गोली मार दी। दूसरी हत्या रविवार रात 2 बजे जम्मूतवी एक्सप्रेस ट्रेन में बाथरूम गए युवक को गोली मार दी। तीसरी हत्या सोमवार सुबह साढ़े 8 बजे की। इसमें आरोपी ने प्राइवेट अस्पताल में घुसकर बेड पर लेटी महिला की कनपटी पर पिस्टल सटाकर गोली मार दी।
महिला की हत्या करके भागने लगा तो भीड़ ने पकड़कर पीटा, फिर पुलिस के हवाले कर दिया। पिटाई से गुरप्रीत जख्मी हो गया था। पुलिस ने उसका इलाज कराया। जब वह बोलने लायक हुआ तो महिला की हत्या करने की वजह पूछी गई। जवाब में उसने कहा- मैं मन का राजा हूं। शराब पीने के बाद मैं होश में नहीं रहता। घूम-घूमकर जो मन में आता है, करता हूं। एक नहीं, दो-तीन को मारकर आया हूं। ये जवाब सुनकर पुलिस चौंक गई। सख्ती से पूछताछ करने पर अपने सारे जुर्म कबूल कर लिए।

6 साल पहले सेना से रिटायर हुआ था
गुरप्रीत सिंह छह साल पहले आर्मी से रिटायर हुआ था। वह पंजाब के तरनतारन जिला के तरहतूचक गांव का रहने वाला था। उसके परिवार में पिता तरसेम सिंह (65), भाई सर्वजीत सिंह (47), भाई मनजीत सिंह (40), पत्नी रमनजीत कौर और दो बच्चे अश्विन कौर (14) और गुरसेवक सिंह (13) हैं।
दैनिक भास्कर हरप्रीत सिंह के गांव तरहतूचक पहुंचा। यह तरनतारन जिले में है। यहां उसके माता-पिता, ताऊ-ताई और अन्य रिश्तेदार रहते हैं।
गांववासियों के मुताबिक, घटना के बाद पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गुरप्रीत सिंह के मां नरिंदर कौर का 3 मई 2025 को निधन हो गया था। पिता गांव में ही रहते हैं। गुरप्रीत ने अपना अलग मकान बनाया हुआ था, जहां वह पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। वहीं, उसके घर से दो मकान छोड़कर उसकी जॉइंट फैमिली रहती है, जिसमें ताऊ-ताई और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं।
गुरप्रीत आखिरी बार 29 अप्रैल को गांव आया था। गांव के सरपंच और गुरप्रीत सिंह का साला बॉडी लेने के लिए यूपी रवाना हो गए हैं।
नौकरी से निकाले जाने के बाद साइको जैसी हरकतें करने लगा था
पीडीडीयू नगर के सीओ अरुण कुमार सिंह ने बताया- गुरप्रीत 29 अप्रैल को गार्ड की नौकरी करने के लिए बिहार के आरा शहर गया था। वहां कुछ दिनों तक काम करने के दौरान उसकी शराब पीकर हंगामा करने की आदत सामने आई। उसे नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद वह परेशान रहने लगा।
उन्होंने बताया- वह 9 मई से अलग-अलग ट्रेनों से प्रयागराज, चंदौली समेत कई स्थानों पर घूमता रहा। वह शराब पीने के बाद मानसिक संतुलन खो देता था। लोगों से उलझता रहता था। हिंसक हो जाता था। तीनों मर्डर में दो उसने झगड़े के बाद ही किए। शुरुआती जांच में आरोपी साइको लग रहा था।
अस्पताल में हत्या करने से पहले किलर ने बीपी चेक करवाया था
अस्पताल में महिला की हत्या करने से पहले गुरप्रीत सिंह ने अपना पर्चा बनवाया था। इस पर नाम वीरेंद्र और पता अंबाला लिखवाया। वार्ड बॉय ने उसका बीपी चेक किया। उसने पर्चे पर बीपी 130/80 लिखा, जिसे सामान्य माना जाता है। पल्स 109 थी, जिसे सामान्य से अधिक माना जाता है।
राजकीय महिला चिकित्सालय के प्रभारी डॉक्टर एसके चतुर्वेदी ने बताया- अगर बीपी सामान्य हो और पल्स 100 से ऊपर हो जाए, तो इसे एंग्जायटी डिसऑर्डर की स्थिति कहा जाता है। इसमें व्यक्ति लगातार तनाव और बेचैनी की अवस्था में रहता है।

लक्ष्मीना का पति बोला- अपराधी बेखौफ घुसा और गोली मार दी
चंदौली के अस्पताल में लक्ष्मीना देवी को सीरियल किलर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार बिहार के कैमूर जिले में किया गया। लक्ष्मीना के पति विदेशी राम ने बताया कि उनकी पत्नी का इलाज चंदौली के चहनिया स्थित विनायक हॉस्पिटल में चल रहा था। इसी दौरान एक अपराधी अस्पताल के गेट से अंदर घुसा।
अस्पताल प्रशासन ने उसकी कोई जांच-पड़ताल नहीं की और वह सीधे मेरी पत्नी के पास पहुंच गया। वहां उसने बिना कुछ कहे पिस्टल निकाली और मेरी पत्नी को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन ने उनकी सुनवाई नहीं की।
विदेशी राम का कहना है कि वे 24 घंटे अस्पताल में ही मौजूद रहे, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनसे ठीक से बात नहीं की और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। हालांकि, एनकाउंटर पर कहा कि अच्छा हुआ। ऐसे व्यक्ति का ऐसा ही होना चाहिए।
पुलिस ने साइको किलर को कैसे पहचाना, 4 पॉइंट में जानें
रविवार सुबह 7 बजे गुरप्रीत सिंह चंदौली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से पैसेंजर ट्रेन में सवार हुआ। कुचमन स्टेशन से पहले किसी बात पर यात्री मंगरू से उसकी कहासुनी हो गई। गुरप्रीत ने मंगरू की कनपटी पर गोली मार दी और शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया। ताजपुर गांव के पास ट्रेन की रफ्तार धीमी होते ही वह कूदकर फरार हो गया।
इसके बाद वह करीब 9 किमी दूर व्यासनगर गांव पहुंचा। यहां से पीडीडीयू जंक्शन से जम्मूतवी एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ गया। रविवार रात करीब 2 बजे उसने बिहार के दिनेश साहू की कनपटी पर गोली मारकर हत्या कर दी। व्यासनगर स्टेशन के पास ट्रेन धीमी हुई तो वह उतर गया।
चलती ट्रेन में 18 घंटे के भीतर दूसरी हत्या से पुलिस को शक हुआ। तरीका एक जैसा था- सीधे कनपटी पर गोली। पुलिस ने मान लिया कि हत्यारा एक ही है और उसी दिशा में जांच शुरू की। दूसरे मर्डर के करीब 6 घंटे बाद व्यासनगर से करीब 3 किमी दूर जीवक अस्पताल में घुसकर एक महिला के सिर में गोली मार दी। 26 घंटे में तीन हत्याओं से पुलिस उलझ गई। ट्रेन में दो और अस्पताल एक मर्डर हुआ, लेकिन तरीका एक ही था।
अस्पताल में हमले के बाद भागते वक्त भीड़ ने आरोपी को पकड़ लिया। पुलिस भीड़ से छुड़ाकर उसे अस्पताल ले गई। यहां पूछताछ में आरोपी बोला- तीन को मारकर आया हूं। पुलिस ने गाजीपुर के रहने वाले प्रवेश कुमार यादव से पूछताछ की, जो पहली हत्या के वक्त ट्रेन में मौजूद थे। उन्होंने बताया- हत्यारे ने सिर पर भगवा गमछा बांध रखा था, पैंट-शर्ट पहनी थी और कद करीब 6 फीट था। हुलिया मैच होने पर गुरप्रीत से सख्ती से पूछताछ की गई। उसने ट्रेन में की गई दोनों हत्याओं की बात कबूल कर ली।



