भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा-मैं चूरू के पास का हूं, वहां बावड़ियां हैं:संकट में प्यास बुझाती हैं, हमारे रिटायर जज भी समाज की ऐसी ही बावड़ियां हैं

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा- राजस्थान में बावड़ी होती है। मैं चूरू जिले के पास का हूं। हमारे पास के जिले में भी बावड़ियां हैं। बावड़ी में बारिश का पानी इकठ्ठा कर लिया जाता है। संकट के समय यह बावड़ियां लोगों की प्यास बुझाती हैं।
हमारे बुजुर्ग और अनुभवी न्यायाधीश भी समाज की ऐसी ही बावड़ियां हैं। जब भी न्याय व्यवस्था किसी संकट, जटिल विवाद या मार्गदर्शन की स्थिति में होती है। तब हमें इन्हीं अनुभवी लोगों की ओर देखना चाहिए।
उन्होंने कहा- एक बुद्धिमान न्यायपालिका इन अनुभवों को केवल दूर से सम्मान नहीं देती, बल्कि उन्हें संरक्षित करती है। समय आने पर उनसे शक्ति प्राप्त करती है।
सीजेआई सूर्यकांत ने शनिवार को जयपुर में यह बात कही। सीजेआई सूर्यकांत शनिवार को कॉन्सिट्यूशन क्लब में एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज ऑफ सुप्रीम कोर्ट एंड हाईकोर्ट्स ऑफ इंडिया और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की ओर से आयोजित एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस ‘दी बैंच बियॉड रिटायरमेंट’ के शुभारंभ के मौके पर बोल रहे थे।

सीजेआई ने कहा- कोर्ट और उससे जुड़ी संस्थाओं को ज्यादा जागरूक रहने की आवश्यकता है। देश की जनता का इन संस्थाओं पर गहरा विश्वास है। हमारा दायित्व है कि हम उस विश्वास को बनाए रखें।
सीजेआई ने दुष्यंत के शेर की पंक्तियां भी कहीं-
‘वो आदमी नहीं है, मुकम्मल बयान है माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है
सामान कुछ नहीं है, फटे-हाल है मगर झोले में उसके पास कोई संविधान है
उस सर-फिरे को यूं नहीं बहला सकेंगे आप वो आदमी नया है, मगर सावधान है’
सीजेआई ने कॉन्फ्रेस में मौजूद न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों से कहा- यह लाइनें मैं हमेशा न्यायपालिका के नजरिए से मेरे करीब महसूस करता हूं। आप भी इसका ध्यान रखेंगे तो न केवल जनता का विश्वास अटूट रहेगा, बल्कि वह ज्यादा बढ़ेगा।

सीएम ने कहा-समाज आपका अनुसरण करता है
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा- मैं हमेशा जनता के मन में आपके लिए सम्मान देखता हूं। क्योंकि आप जो कहते हैं, समाज उसका अनुसरण करता है। समाज को आप पर विश्वास है।
आपकी एक बात को वह अपने जीवन का आधार बना लेता है। क्योंकि आप न्याय की प्रतिमूर्ति हो। आपके प्रति समाज में सम्मान है। उस सम्मान के कारण समाज आपके पद चिन्हों पर भी चलता है।
आप जो भी दिशा देते हैं, समाज के अंदर उसको मान्यता मिलती है। जब समाज उस मान्यता को आगे बढ़ता है तो समाज के अंदर सकारात्मक परिवर्तन होता है। वह परिवर्तन हमारी न्याय की आधारशिला बनता है। इसलिए आपका काम हमेशा चलता है। आप सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज को दिशा देते हैं।



