हाईकोर्ट ने कहा-मरे हुए व्यक्ति की हत्या कैसे?:पुलिस ने अंग निकालने के आरोप में हत्त्या के प्रयास का केस दर्ज किया था, पूरी कार्रवाई रद्द
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- किसी भी मृत व्यक्ति की हत्या कैसे हो सकती है। जो व्यक्ति मर चुका, उसे न तो मारने का प्रयास हो सकता है और न ही कानूनी तौर पर मरे हुए व्यक्ति को मारने का प्रयास संभव है।
पुलिस ने अंग निकालने के आरोप में हत्या के प्रयास की एफआईआर में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की। साथ ही पूरी कार्रवाई को रद्द कर दिया। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की अदालत में यह सुनवाई हुई। जयपुर स्थित श्री शंकर सेवा धाम ट्रस्ट संस्थान के अध्यक्ष प्रहलाद गुप्ता और बिशन लाल जांगिड़ की याचिका मंजूर करते हुए यह आदेश दिया।
अंग निकालने का पता पोस्टमॉर्टम से चलता, वो हुआ नहीं
कोर्ट ने कहा- इस मामले में शिकायतकर्ता ने अपने भाई की गुमशुदगी की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई। अंग गायब होने का पता पोस्टमार्टम से चलता, लेकिन पोस्टमॉर्टम हुआ ही नहीं। इन परिस्थितियों में अपराध ही नहीं बनता है।
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता 4 के अग्रवाल ने कोर्ट को बताया- सीताराम सड़क पर गंभीर स्थिति में मिला, जिसका उपचार कराया और मृत्यु होने पर संस्थान ने आदर्श नगर मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किया।
ट्रस्ट विमंदित, दिव्यांग व निराश्रित व्यक्तियों को आश्रय, दवाइयां, भोजन व कपड़े उपलब्ध कराता है। 2 माह बाद मृतक सीताराम के भाई भागचंद ने अंग निकाले जाने की शिकायत दर्ज कराई। कालवाड़ थाना पुलिस ने एक बार आरोप आधारहीन माने, लेकिन दूसरी बार पेश शिकायत पर पुलिस की जांच के बाद कोर्ट ने भी प्रसंज्ञान ले लिया।राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ ने पुलिस जांच के दौरान केस डायरी में जज के व्यक्तिगत व्यवहार को लेकर दिया गया बयान आपराधिक अवमानना नहीं माना। जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने क्रिमिनल कंटेम्प्ट पिटीशन को पूरी रह से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने 7 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई खत्म कर दी
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