कुंभ के दौरान चर्चा में आई मोनालिसा की शादी को लेकर अब संत समाज की प्रतिक्रिया भी सामने आई; समाज के मुंह पर कालिख पोतने जैसा काम, खामेनेई पर बोले-किसी भी धर्मगुरु की हत्या स्वीकार्य नहीं

कुंभ के दौरान चर्चा में आई मोनालिसा की शादी को लेकर अब संत समाज की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अखिल भारतीय संत समिति मध्यप्रदेश के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष स्वामी अनिलानंद ने इस पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि देखिए शादी-विवाह करना तो आपसी मेल-मिलाप से होता है, इसमें कोई दो राय नहीं है। मोनालिसा जैसे व्यक्ति, जो कुंभ से चर्चा में आई और उसके बाद जिस तरह से वह ट्रोल हुई, उसके बाद जो कदम उन्होंने उठाया, वह पूरे समाज के मुंह पर कालिख पोतने जैसा है। अनिलानंद ने कहा कि इस मामले में परिवार की सहमति भी नहीं है। परिवार वाले भी इसके खिलाफ बताए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, अगर दूसरे नजरिए से देखा जाए तो उस समय वह जिस लड़के के साथ थीं, दोनों लव जिहाद फिल्म के ट्रेंड में काम कर रहे थे। वह फिल्म पर काम कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने शादी कर ली। स्वामी अनिलानंद ने समाज के दृष्टिकोण को भी सामने रखते हुए कहा कि अगर आप किसी भी समाज में हैं चाहे मुस्लिम समाज में हैं या हिंदू समाज में तो आपको उसी समाज में विवाह करना चाहिए। समाज अगर आपको सम्मान देता है, आपको आगे बढ़ाता है, तो आपको ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे समाज के सम्मान पर आंच आए।

किसी भी धर्मगुरु की हत्या स्वीकार्य नहीं ईरान के धर्मगुरु आयतुल्लाह अली खामेनई को लेकर सामने आए घटनाक्रम पर संत समाज ने प्रतिक्रिया दी है। स्वामी अनिलानंद ने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, जो व्यक्ति किसी समाज का धर्मगुरु होता है, अगर उसके ऊपर कोई आंच आती है, तो उसके अनुयायी आवाज जरूर उठाएंगे। यह पूरी तरह स्वाभाविक है। उन्होंने आगे कहा, “खामेनई शिया समाज के धर्मगुरु हैं और पूरे विश्व में उनके अनुयायी हैं। ऐसे में अगर उनके साथ इस प्रकार की घटना होती है, तो विरोध होना स्वाभाविक है और इसे गलत नहीं कहा जा सकता।
अनिलानंद ने अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या दुनिया में ऐसा कोई कानून है कि आप किसी के घर में घुसकर उसकी हत्या कर दें? क्या यह तरीका सही है? यह पूरी तरह गलत और निंदनीय है।” उन्होंने कहा, “जब इस तरह की घटनाएं होती हैं तो स्वाभाविक रूप से उनके अनुयायी, चाहे वे किसी भी धर्म या देश के हों, अपनी आवाज उठाते हैं। साथ ही उन्होंने कहा, “कोई भी देश अगर अपने आप को बड़ा मानता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह दूसरे देशों या लोगों को रौंदता चला जाए।

केरल को लेकर कहा वहां बहुत पहले से हो रहा धर्मांतरण
केरल को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और चर्चाओं पर स्वामी अनिलानंद ने विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक और वर्तमान दोनों संदर्भों में समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “देखिए पुराने समय से यह चलता आ रहा है कि जब कोई सशक्त राजा होता था, तो वह छोटे राज्यों को अपने में मिलाने के लिए उन पर आक्रमण करता था।
यह एक तरह का विस्तारवाद था। उन्होंने आगे कहा, लेकिन आज के समय में इस प्रकार का सीधा आक्रमण नहीं किया जाता। अब लोगों को धर्मांतरण के माध्यम से प्रभावित किया जाता है। यह एक नया तरीका है प्रभाव बढ़ाने का। केरल को लेकर उन्होंने कहा, “केरल को इसलिए टारगेट किया जाता है क्योंकि वह देश का एक किनारे का हिस्सा है। वहां पर धर्मांतरण की गतिविधियां अधिक देखने को मिलती हैं। अनिलानंद ने दावा किया, “आप देखेंगे कि वहां बड़े पैमाने पर धर्मांतरण होता है- चाहे वह क्रिश्चियनिटी में हो या इस्लाम में। यह स्थिति चरम सीमा तक पहुंच चुकी है।


