मध्य प्रदेश

बाबा नारायण गिरी ने सिर पर उगाई हरियाली:मां धारी देवी को किया समर्पित, अटूट श्रद्धा और साधना लोगों के लिए प्रेरणा

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित धारी देवी मंदिर चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्तों की आस्था का केंद्र बन गया है। हर साल नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस साल मंदिर में एक विशेष आकर्षण देखने को मिल रहा है। बाबा नारायण गिरी ने अपनी अनूठी भक्ति से सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है।

बाबा नारायण गिरी ने अपने सिर पर हरियाली उगाई है। उनका दावा है कि यह हरियाली सिर्फ तीन दिनों में उगी है और उन्होंने इसे मां धारी देवी को समर्पित किया है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।

बाबा नारायण गिरी की अनूठी भक्ति ने नवरात्रि के माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया है। यह श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया है।

बाबा नारायण गिरी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।

जूना अखाड़ा से जुड़े हैं नारायण गिरी नारायण गिरी मूल रूप से ग्वालियर के निवासी हैं और जूना अखाड़ा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन-चार वर्षों से मां धारी देवी की भक्ति में लीन होकर मंदिर क्षेत्र में ही निवास कर रहे हैं। उनके अनुसार यह हरियाली मात्र तीन दिनों में उनके सिर पर उगी है, जिसे उन्होंने मां धारी देवी को समर्पित किया है। उनका कहना है कि प्रकृति स्वयं देवी का स्वरूप है और इसी भावना के साथ उन्होंने यह विशेष साधना की है।

श्रद्धा और साधना लोगों के लिए प्रेरणा बाबा नारायण गिरी बचपन से ही पैरों से दिव्यांग हैं। इसके बावजूद उनकी अटूट श्रद्धा और साधना लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य को देखकर हैरान और प्रभावित हैं। कई लोग बाबा के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। वहीं कुछ इसे भक्ति और प्रकृति के अनूठे संगम का प्रतीक मान रहे हैं।

श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार की अनूठी आस्था नवरात्रि के माहौल को और अधिक भक्तिमय बना रही है और यह श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गई है।

दर्शन के बाद सफल मानी जाती है चारधाम यात्रा धारी देवी मंदिर का इतिहास द्वापर युग से बताया जाता है। पांडवों ने यहां मंदिर में आकर पूजा अर्चना की थी। आदि गुरु शंकराचार्य की ओर से भी यहां पूजा अर्चना का जिक्र है। यहां पूजा करने के बाद में वो यहां से बद्रीनाथ की यात्रा पर गए। आधुनिक युग में चार धाम पर आने वाले यात्री यहां दर्शन कर अपनी चारों धामों की यात्रा को सफल मानते हैं।

दिन में 3 बार स्वरूप बदलती है मां की मूर्ति मान्यता है कि धारी देवी की मूर्ति दिन में 3 बार अपना रूप बदलती है। सुबह जहां मां बाल्य अवस्था में भक्तों को दर्शन देती है। वहीं दोपहर में कन्या तो शाम के समय बुजुर्ग महिला के रूप में भक्त मां के दर्शन करते हैं।

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