मध्य प्रदेश

भोपाल और इंदौर में मेट्रो को यात्रियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा;ट्रिप घटी, टाइमिंग बदली…फिर भी भोपाल मेट्रो खाली:सुभाषनगर से RKMP तक सिर्फ रिपोर्टर ही बैठे

भोपाल और इंदौर में मेट्रो को यात्रियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रिप कम करने और समय-सारिणी में बदलाव के बाद भी मेट्रो ट्रैक पर लगभग खाली ही दौड़ रही है। भोपाल में वीकेंड को छोड़ दें तो एक दिन में 200 यात्री भी मेट्रो से सफर नहीं कर रहे हैं, जबकि सरकार रोजाना मेट्रो संचालन पर करीब 8 लाख रुपए खर्च कर रही है। ऐसे में मेट्रो की स्थिति “आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया” जैसी हो गई है।

 रिपोर्टर ने जब भोपाल मेट्रो में यात्रियों को लेकर रियलिटी चेक किया, तो हालात और भी चौंकाने वाले सामने आए। सुभाषनगर से रानी कमलापति स्टेशन (आरकेएमपी) तक रिपोर्टर अकेले ही सफर करते नजर आए। इसके बाद आगे के स्टेशन के लिए 900 यात्रियों की क्षमता वाली 3 कोच की मेट्रो में सिर्फ एक ही यात्री मौजूद था।

रिपोर्टर ने मेट्रो के दो रूट पर बारी-बारी से सफर किया। रानी कमलापति से सुभाषनगर और फिर सुभाषनगर से रानी कमलापति के बीच दो रूट पर टिकट लेकर यात्रा की। स्थिति यह थी कि मेट्रो में पैसेंजर के नाम पर सिर्फ भास्कर टीम ही सवार थी।

  • पहला रूट- दोपहर 1.26 बजे मेट्रो एम्स, अलकापुरी और डीआरएम स्टेशन से होती हुई रानी कमलापति स्टेशन पहुंची। जहां से भास्कर टीम सवार हुई। यहां तीनों कोच में 15-16 यात्री नजर आए। इनमें से 9 यात्री थे और बाकी मेट्रो कर्मी। ट्रेन आगे बढ़ी। अगले 4 मिनट के अंदर एमपी नगर और फिर डीबी मॉल स्टेशन पहुंच गई।

यहां पर कर्मचारियों को छोड़ सभी यात्री उतर गए। यानी, पैसेंजर के नाम पर मेट्रो में कोई नहीं था। केंद्रीय स्कूल स्टेशन से भी कोई भी यात्री मेट्रो में नहीं बैठा। सुभाषनगर तक मेट्रो बिना पैसेंजर के ही चली।

  • दूसरा रूट- दोपहर 1.55 बजे सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो फिर से चली। यहां भी वहीं तस्वीर देखने को मिली, जो रानी कमलापति से सुभाषनगर के बीच यात्री के दौरान थी। भास्कर टीम को छोड़ 1 भी यात्री सवार नहीं था। डीबी मॉल तक मेट्रो के तीनों कोच खाली ही रहे। डीबी मॉल स्टेशन से एक यात्री अंकित ही एम्स जाने के लिए मेट्रो में सवार हुए। अंकित पहली बार मेट्रो में बैठे थे। उन्होंने बताया कि अभी स्पीड कम है। वहीं, सुविधा के नाम पर कुछ नहीं। इसलिए यात्री नहीं आ रहे। मैं भी पहली बार ही बैठा हूं।
  • खाली नजर आ रहा रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन।

वीकेंड के दिनों में ही यात्रियों की संख्या 500 तक मेट्रो कॉरपोरेशन के अफसरों ने बताया कि वीकेंद्र के दिनों में यात्रियों की संख्या 500 के पार पहुंच जाती है। आम दिनों में यह संख्या 200 से भी कम तक रहती है। हालांकि, कई बार एम्स से सुभाषनगर तक मेट्रो के तीनों कोच खाली ही जाते हैं।

रोज 8 लाख रुपए खर्च, आमदानी 10 हजार भी नहीं मेट्रो के संचालन, सुरक्षा समेत अन्य व्यवस्था में सरकार हर रोज करीब 8 लाख रुपए खर्च कर रही है। इसमें अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन भी शामिल हैं। इस तरह ढाई महीने में सरकार 6 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। दूसरी ओर, आमदानी के रूप में प्रतिदिन 10 हजार रुपए भी नहीं मिल रहे हैं।

भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट का जमीनी काम साल 2018 में शुरू हुआ था, जो दिसंबर 2025 में पूरा हुआ। 8 साल बाद मेट्रो शुरू हुई, लेकिन कुछ ही दिन में लोगों की मेट्रो के प्रति दिलचस्पी कम हो गई। इसकी 4 वजह सामने आई हैं…

1. 6 किमी के सफर में 35 से 40 मिनट सुभाषनगर से एम्स तक मेट्रो में सफर की टाइमिंग 25 मिनट है। इसके पहले 10 मिनट स्टेशन पर टिकट लेने, चेकिंग व प्लेटफार्म पर आने में लगते हैं। ऐसे में 6 किमी का सफर 35 से 40 मिनट में तय होता है।

2. मेट्रो की स्पीड कम होना प्रायोरिटी कॉरिडोर में कुल 6 स्टेशन- सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, आरकेएमपी, डीआरएम, अलकापुरी और एम्स है। इनके बीच की दूरी 1 किमी भी है। इस वजह से स्पीड इतनी कम रहती है कि मेट्रो साइकिल से भी हार गई है।

3. पार्किंग व्यवस्था नहीं एक भी स्टेशन ऐसा नहीं है, जहां पर पार्किंग की व्यवस्था हो। इस कारण पैसेंजर कम रूचि दिखा रहे हैं। मेट्रो के अंदर एटीएम, फूड जोन या अन्य सुविधाएं भी अभी मौजूद नहीं है।

4. टाइमिंग सही नहीं जिस रूट पर मेट्रो दौड़ रही है, वहां सरकारी और प्राइवेट ऑफिस ज्यादा है। वहीं, एमपी नगर में बड़ा मार्केट है। दोपहर 12 बजे से एम्स से मेट्रो शुरू होती है, जबकि ऑफिस टाइमिंग एक-डेढ़ घंटा पहले है। वहीं, प्राइवेट सेक्टर 8 बजे तक खुला रहता है, जबकि मेट्रो का संचालन इससे पहले ही बंद हो जाता है।

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