5 दोषियों को 10-10 साल की जेल….ग्वालियर डाकघर मे फर्जीवाड़ा

पुराने एक चर्चित डाकघर फर्जीवाड़ा मामले में 17वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवि शंकर दोहरे की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है
करीब 10 साल पुराने इस मामले में पांच आरोपितों को कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। एक आरोपित को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, जबकि एक आरोपित अब भी फरार है।
सुनियोजित साजिश और फर्जीवाड़ा
यह था मामला फरियादी राजेश राजे जामदार ने शिकायत की थी कि उनकी बहन रजनी राजे जामदार का खाता प्रधान डाकघर, महाराज बाड़ा में था। रजनी की एक मार्च 2014 को मृत्यु हो गई थी और इसकी सूचना 14 मार्च 2014 को डाकघर को दे दी गई थी।
इसके बावजूद मई से जून 2014 के बीच उनके खाते से फर्जी चेक और फार्म के जरिये रकम निकाल ली गई। जांच में पता चला कि दस्तावेजों पर मृतका के नकली हस्ताक्षर किए गए थे।
दोषियों के नाम और सजा का विवरण
इस मामले में अदालत ने किशोरीलाल, राजकुमार जाटव, रामगोपाल शाक्य, नरेंद्र सिंह और भरत कपूर को साजिश रचकर फर्जी दस्तावेज बनाने और उनका इस्तेमाल कर रकम निकालने का दोषी माना। हालांकि एक आरोपित मुन्नालाल को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने माना कि मृत महिला की मौत की जानकारी होने के बावजूद दस्तावेज तैयार किए गए और भुगतान कराया गया, यह एक सुनियोजित साजिश थी। अदालत ने पांचों दोषियों को कूटरचना और साजिश की धाराओं में 10-10 साल की सजा और जुर्माना लगाया गया है।


