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क्या है ‘हेक्सागन ऑफ अलायंसेस’? भारत-इजराइल के नए गठबंधन से पाकिस्तान को लगी मिर्ची….

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा प्रस्तावित ‘हेक्सागन ऑफ अलायंसेस’ यानी छह देशों के गठबंधन की योजना ने वैश्विक राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस गठबंधन में भारत की प्रमुख भूमिका को लेकर पाकिस्तान ने कड़ा विरोध जताया है और इसे ‘मुस्लिम उम्मा’ (मुस्लिम समुदाय) की एकता को खंडित करने वाला कदम करार दिया है।

नेतन्याहू की योजना पर पाकिस्तान का बयान

पाकिस्तान की सीनेट ने इस मुद्दे पर सर्वसम्मति से एक निंदा प्रस्ताव पारित किया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सांसद पलवाशा मोहम्मद जई खान द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में नेतन्याहू की योजना को अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय स्थिरता के खिलाफ बताया गया है। सीनेट ने कड़े शब्दों में कहा कि यह गठबंधन दुनिया भर के मुस्लिम देशों की एकता को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश है। इसके साथ ही, पाकिस्तान ने कब्जे वाले फलस्तीन क्षेत्रों की कानूनी या ऐतिहासिक स्थिति में किसी भी तरह के बदलाव के प्रयासों का विरोध करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

अरब और एशियाई देश हो सकते हैं शामिल

इस विवाद की जड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल अवीव यात्रा से पहले नेतन्याहू द्वारा दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने मिडिल ईस्ट में एक नए सामरिक ब्लॉक की रूपरेखा पेश की थी। नेतन्याहू के अनुसार, इस ‘हेक्सागन गठबंधन’ में भारत, इजरायल, ग्रीस, ग्रीक साइप्रस प्रशासन के अलावा कुछ अन्य अरब और एशियाई देश शामिल हो सकते हैं। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य उन देशों को एक मंच पर लाना है जो समान सुरक्षा चुनौतियों और लक्ष्यों को साझा करते हैं।

 

नेतन्याहू ने इस योजना को मध्य-पूर्व में उभरती कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ एक संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में पेश किया है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व वाली ‘कट्टर शिया धुरी’, जिसमें हमास, हिज्बुल्लाह और हूती जैसे संगठन शामिल हैं, और आईएसआईएस के अवशेषों वाली ‘कट्टर सुन्नी धुरी’ के खिलाफ इसे एक रक्षात्मक गठबंधन बताया है।

क्या है पाकिस्तान की राय?

वहीं, पाकिस्तान ने इजरायल द्वारा सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के हालिया फैसले की भी निंदा की है। पाकिस्तान का मानना है कि इजरायल के ये कदम न केवल मुस्लिम देशों के संगठन (OIC) की भावनाओं को आहत करते हैं, बल्कि दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करते हैं। फिलहाल, नेतन्याहू के इस प्रस्ताव पर भारत समेत अन्य देशों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन पाकिस्तान की बौखलाहट ने इस भविष्य के गठबंधन को एक बड़े भू-राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है।

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