मध्य प्रदेश

डॉ.हेमलता की प्रॉपर्टी की आर्मी भी दावेदार:जबलपुर में हॉस्पिटल बनवाना चाहती थीं; निगम ने लीज निरस्त कर कब्जे में ली 60 करोड़ की जमीन

जबलपुर की सीनियर आई स्पेशलिस्ट डॉ. हेमलता श्रीवास्तव (80) की संपत्ति पर डॉ. हेमलता की दो बहनों सहित कुल पांच दावेदार हैं। इनमें इंडियन आर्मी भी शामिल है। डॉ. हेमलता ने 16 फरवरी को अंतिम सांस ली थी।

अंतिम संस्कार के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने उनकी 60 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की प्रॉपर्टी को सीज कर दिया था। जबलपुर के राइट टाउन जैसे पॉश इलाके में स्थित यह प्रॉपर्टी 25 हजार वर्ग फीट में फैली है।

उनकी मृत्यु से लगभग 15 दिन पहले तक यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा था। फिलहाल, इस प्रॉपर्टी को लेकर एसडीएम कोर्ट में केस चल रहा है।

निगम ने जमीन की लीज निरस्त की

नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने 18 फरवरी को आदेश जारी कर जमीन की लीज निरस्त कर दी। यहां रखा डॉ. हेमलता का सामान परिजन को सौंप दिया गया। जल्द यहां उप स्वास्थ्य केंद्र खोला जाएगा।

डॉ. हेमलता इस प्रॉपर्टी पर पति और बेटे की याद में अस्पताल बनाना चाहती थीं। उनके निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब इस प्रॉपर्टी का वास्तविक हकदार कौन होगा? स्वामित्व हासिल करने में क्या कानूनी दांव-पेंच हो सकते हैं?

कलेक्टर बोले- फाइनल फैसला SDM कोर्ट करेगा

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जमीन मूलतः नगर निगम की थी। लीज की शर्तों में यह नहीं था कि नगर निगम की अनुमति के बिना जमीन किसी को स्थानांतरित की जा सकती है।

अगर ट्रांसफर किया भी जाना होता तो उसके लिए एक पूरी प्रक्रिया है, जिसका पालन नहीं किया गया। इसी वजह से नगर निगम स्वतंत्र रूप से उस जमीन को वापस लेने की कार्रवाई कर रहा है। प्रॉपर्टी पर नोटिस भी चिपकाया जा चुका है।

गिफ्ट डीड की वैधता को लेकर इश्यू क्रिएट हुए थे। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि डॉ. हेमलता ने उसका पार्ट रिफ्यूज किया था। उन्होंने कहा था कि जमीन हमने उनको दी है लेकिन अनजाने में हमसे बेचने की भी अनुमति ले ली है।

विवादित प्रॉपर्टी के ये 5 दावेदार सामने आए

  1. दो बहनें: साल 2022 में डॉ. हेमलता के इकलौते बेटे डॉ. रचित श्रीवास्तव (नेत्र विशेषज्ञ) की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। साल 2025 में उनके पति डॉ. बीएल श्रीवास्तव का भी निधन हो चुका है। अब उनकी दो बहनें डॉ. कनकलता मिश्रा और शांति मिश्रा प्रॉपर्टी की दावेदार हैं।
  2. जैन दंपती: डॉ. सुमित जैन और उनकी पत्नी डॉ. प्राची जैन भी प्रॉपर्टी के दावेदार हैं। उनका दावा है कि 15 जनवरी 2026 को डॉ. हेमलता ने स्वेच्छा से होशहवास में 11 हजार स्क्वेयर फीट जमीन की गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर किए थे। यह दान उनके दिवंगत पति और बेटे की स्मृति में मेमोरियल हॉस्पिटल बनाने के उद्देश्य से किया गया। राइट टाउन में डॉ. हेमलता की जमीन पर जैन दंपती का क्लिनिक संचालित होने की बात भी सामने आई है।
  3. गायत्री परिवार: गायत्री परिवार के ट्रस्टी ब्रज बिहारी शर्मा ने कहा कि डॉ. हेमलता ने गायत्री परिवार के नाम वसीयत की है। इसमें किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की गई। डॉ. हेमलता की बहन कनकलता मिश्रा जबलपुर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि करीब दो साल पहले संपत्ति की जिम्मेदारी गायत्री परिवार को सौंपने का फैसला लिया गया था। वहीं, गायत्री परिवार का दावा है कि डॉ. श्रीवास्तव ने प्रॉपर्टी का विधिवत दानपत्र भी तैयार करवाया है।
  4. नगर निगम: प्रशासनिक जांच में यह सामने आया कि राइट टाउन एक्सटेंशन में स्थित प्लॉट नंबर 51 नगर निगम का है, जिसे डॉ. हेमलता श्रीवास्तव को लीज पर दिया गया था। साल 2020-21 से लीज का किराया भी जमा नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार, इस प्रॉपर्टी को दान नहीं दिया जा सकता। इसका हस्तांतरण भी तभी संभव है, जब नगर निगम से एनओसी ली जाए लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया।
  5. इंडियन आर्मी: जांच अधिकारी पंकज मिश्रा ने बताया कि दिवंगत डॉ. हेमलता ने अपने बयान में कहा था कि यदि उनकी जमीन को लेकर कोई धोखाधड़ी होती है या वहां मेमोरियल अस्पताल का निर्माण नहीं किया जाता है, तो यह संपत्ति इंडियन आर्मी या राज्य सरकार को दे दी जाए। इस आधार पर आर्मी भी दावेदार है। अन्य दावेदारों को भी नोटिस जारी किए गए हैं, जो जांच के दौरान अपना पक्ष रखेंगे।डॉ. हेमलता श्रीवास्तव के जबलपुर स्थित घर पर रिश्तेदार इकट्‌ठे हो रहे हैं।

भूमि के स्वामित्व के निर्धारण में 4 बातें अहम

प्रॉपर्टी मामलों के एक्सपर्ट वकील संपूर्ण तिवारी का कहना है कि भूमि के स्वामित्व के निर्धारण में 4 बातें अहम होती हैं। संपत्ति दानपत्र के जरिए प्राप्त हुई हो, वसीयत से मिली हो, उसे खरीदा गया हो या कोर्ट से भूमि स्वामित्व की डिक्री प्राप्त हुई हो।

डॉ. हेमलता की संपत्ति के मामले में ऐसी कोई भी स्थिति नहीं है। दानपत्र या वसीयत, ये दोनों दस्तावेज तभी प्रभावी (एक्टिवेट) होते हैं, जब दानपत्र लिखने वाले के पास उस संपत्ति का विधिक स्वामित्व हो। इस मामले में यह स्पष्ट सामने आया है कि संबंधित संपत्ति किसी के स्वामित्व की नहीं, बल्कि लीज की संपत्ति है।

यदि इस स्थिति का निराकरण मौत से पहले सक्षम कोर्ट के सामने करा लिया जाता और कोई डिक्री प्राप्त की जाती, तो इसका समाधान विधिसम्मत एवं उचित तरीके से हो सकता था।

वर्तमान स्थिति में जितने भी दावेदार हैं, जिनके पास किसी भी प्रकार के अभिलेख जैसे दानपत्र, वसीयत या कोई सेल एग्रीमेंट मौजूद हैं, उन सभी को कोर्ट में सिविल सूट दायर करना होगा।

इसके बाद कोर्ट यह निर्धारित करेगा कि यदि टाइटल विवाद खत्म हो जाता है, तो दानपत्र और अन्य सभी दस्तावेज प्रभावी हो जाएंगे। यदि टाइटल का अभाव पाया गया, तो संपत्ति शासन की मानी जाएगी।

बयान स्वीकार होगा या नहीं, शासन तय करेगा

एडवोकेट तिवारी ने बताया कि लीज भूमि की होती है। उस भूमि पर जो निर्माण कराया जाता है, जैसे बिल्डिंग, बाग-बगीचे या फूल-पौधे, उनका हस्तांतरण किया जा सकता है। यह संपत्ति उन्हीं को हस्तांतरित हो सकती है, जो उसके वैध उत्तराधिकारी हों।

डॉ. हेमलता ने अंतिम बयान में, जो उन्होंने जांच अधिकारी को दिया था, कहा था कि इस जमीन पर मेमोरियल हॉस्पिटल बनाया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो संपत्ति इंडियन आर्मी या राज्य सरकार को दी जाए। इस मामले में यदि वे एब्सोल्यूट ओनर होतीं, तो वही होता जो वे चाहती थीं।

अब यह पूरी तरह शासन पर निर्भर करता है कि वह उनके अंतिम बयान को आधार बनाते हुए उनकी इच्छा को स्वीकार करे या नहीं। उनका यह बयान न्यायालय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

SDM कोर्ट में 27 फरवरी को सुनवाई होगी

इस पूरे मामले को लेकर अगली सुनवाई 27 फरवरी को आधारताल एसडीएम कोर्ट में होगी। आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामला SDM कोर्ट से होते हुए कलेक्टर और फिर हाईकोर्ट तक जा सकता है।

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