मध्य प्रदेश

जंगल में रोने की आवाज आई…बोरे में मिला जिंदा नवजात:सतना में जन्म के बाद ही छोड़ा, नाड़ा भी नहीं कटा था; डॉक्टर बोले-बच्चा स्वस्थ है

सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक के विश्व विख्यात भरहुत गांव में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जन्म के महज डेढ़ से दो घंटे बाद एक नवजात शिशु (बालक) को जंगल क्षेत्र में पुरातत्व विभाग की बाउंड्रीवाल के भीतर बोरी में बंद कर छोड़ दिया गया। ठंड, भूख और अकेलेपन से जूझ रहे इस मासूम की जान समय पर ग्रामीणों, सरपंच और पुलिस की तत्परता से बच सकी।

घटना शनिवार सुबह की है। शौच के लिए निकले ग्रामीणों को जंगल की ओर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज का पीछा करते हुए जब वे बाउंड्रीवाल के भीतर पहुंचे, तो कपड़े में लिपटा एक नवजात बोरी के अंदर पड़ा मिला। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत गांव की सरपंच माया देवी को सूचना दी।

तीन तस्वीरों में देखिए नवजात…

बोरे में मिले नवजात को ग्रामीणों ने पुलिस की सहायता से अस्पताल पहुंचाया।

 

बोरे मे मिला नवजात।

एससीएनयू वार्ड में भर्ती नवजात का इलाज करती हुईं डॉक्टर।

बच्चा अस्पताल आने के डेढ़ से दो घंटे पहले ही जन्मा था

सरपंच माया देवी ने बिना देर किए उचेहरा थाने को खबर दी। सूचना मिलते ही सहायक उपनिरीक्षक संतोष सिंह, आरक्षक संतोष वर्मा, कौशल गुर्जर और महिला आरक्षक शिवानी मेहरा मौके पर पहुंचे। पुलिस ने नवजात को सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल सिविल अस्पताल उंचेहरा पहुंचाया।

अस्पताल में मौजूद महिला चिकित्सक और विकासखंड चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बच्चा अस्पताल आने के डेढ़ से दो घंटे पहले ही जन्मा था। डॉक्टर के मुताबिक, नवजात की नाल तक नहीं कटी थी और शरीर पर गंदगी लगी हुई थी। बच्चे की पूरी साफ-सफाई अस्पताल में की गई। डॉक्टर ने कहा कि यदि थोड़ी भी देर हो जाती तो बच्चे की जान जा सकती थी। फिलहाल नवजात की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार समय पर उपचार मिलने से बच्चा सुरक्षित है।

उचेहरा अस्पताल में नवजात का इलाज चल रहा है।

सरपंच ने नवजात की जिम्मेदारी संभाली

घटना के बाद सरपंच माया देवी ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए नवजात की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली। वे सुबह से अस्पताल में मौजूद रहकर बच्चे की देखभाल कर रही हैं। सरपंच का कहना है कि जब तक प्रशासन कोई निर्णय नहीं लेता, तब तक वह बच्चे को अकेला नहीं छोड़ेंगी।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। नवजात को जंगल में छोड़ने वाली महिला और परिजनों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। आसपास के गांवों, अस्पतालों और आंगनबाड़ी केंद्रों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

टीआई सतीश मिश्रा ने बताया कि मामले में जांच शुरू कर दी है। आशंका है कि सामाजिक दबाव या पारिवारिक कारणों से बच्चे को लावारिस छोड़ा गया हो सकता है। पुलिस आसपास के गांवों, स्वास्थ्य केंद्रों और आशा कार्यकर्ताओं से जानकारी जुटा रही है, ताकि नवजात को छोड़ने वाले परिजनों की पहचान की जा सके।

डॉक्टर ने कहा-बच्चे का नाड़ा लटक रहा था

उचेहरा अस्पताल के बीएमओ डॉ एके राय ने बताया कि नवजात को पुलिस और ग्रामीण सुबह लगभग 10.30 बजे अस्पताल लेकर आए थे। उस समय बच्चे का नाड़ा लटक रहा था। बच्चे की बॉडी काफी ठंडी थी। ड्यूटी डॉक्टर एवं नर्स ने नाड़ा काट कर बच्चे को क्लीन किया। इसके बाद शिशु गहन चिकित्सा इकाई में बच्चे को रखकर प्राथमिक ट्रीटमेंट दिया गया।

बच्चे का वजन साढ़े 3 किलो है और वह पूरी तरह स्वस्थ्य है। बच्चे को अस्पताल में जन्म के तुरंत बाद की फीडिंग भी कराई गई है। बच्चे को एससीएनयू वार्ड में भर्ती कराकर जिला अस्पताल सतना भेजा गया है। बीएमओ के अनुसार अस्पताल लाने के डेढ़ घंटे पहले ही बच्चे ने जन्म लिया है।

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