जयपुर

कजाकिस्तान की जेल में बंद हैं राजस्थान के MBBS स्टूडेंट्स:दोस्तों का झगड़ा सुलझाने गए थे, विवाद में बुरे फंसे; मां रोज पूछती हैं- बेटा कब आएगा?

राजस्थान से एमबीबीएस के लिए कजाकिस्तान गए 2 स्टूडेंट्स काे 31 दिसंबर 2024 को न्यू ईयर की पार्टी करना भारी पड़ गया। पार्टी के दौरान दो अन्य छात्रों में कहासुनी हो गई। मौके पर मौजूद जयपुर के कूकस निवासी प्रियांशु यादव और मुंडावर निवासी अमित यादव बीच-बचाव करने पहुंच गए।

बीच-बचाव करने के प्रयास में ये दोनों मुसीबत में पड़ गए हैं। पिछले 13 महीने से दोनों कजाकिस्तान जेल में बंद हैं।

दोनों ही परिवारों ने अपने बेटों को लोन और बचत के सहारे लाखों रुपए खर्च कर मेडिकल की पढ़ाई के लिए भेजा था। प्रियांशु एमबीबीएस के तीसरे और अमित चौथे साल की पढ़ाई कर रहा था। परिजनों की शिकायत है कि झगड़े के अगले दिन ही समझौता भी हो गया था। इसके बावजूद दोनों जेल में हैं।

परिजनों ने अब प्रवासियों की मदद करने वाली राजस्थान के प्रवासियों की संस्था (राना) से भी मदद की गुहार लगाई है। राना के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने उन्हें मदद का आश्वासन दिया।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

 

परिवार के साथ प्रियांशु यादव। प्रियांशु एमबीबीएस थर्ड ईयर में है।

पत्नी रोज पूछती है- बेटा आ गया क्या? प्रियांशु यादव के माता-पिता का भी बुरा हाल है। जिक्र करते ही आंखों से आंसू निकल रहे हैं। पिता राजेंद्र यादव ने बताया- मैंने तो बेटे को अच्छाई के लिए ही भेजा था…ऐसा हमारे साथ ही क्यों हुआ? 13 महीने से मैं जब भी घर पहुंचता हूं, पत्नी यही पूछती है कि मेरा बेटा आ गया क्या? कोई समाचार तो दे दो…क्या बताऊं? नजरें तक नहीं मिला पाता। रोज रोती है, फिर थक कर बैठ जाती है। बेटे के बिना जिंदगी कट सी रही है बस। हमारी स्थिति बिलकुल भी ठीक नहीं है। न पावर है न पैसा। न वहां की भाषा आती है, न ही इंग्लिश ज्यादा समझ में आता है। सरकार से मदद मांग रहे हैं, लेकिन कहीं से कोई मदद भी नहीं मिल रही है। अब ईश्वर के भरोसे ही जी रहे हैं।

अमित साल 2021 में कजाकिस्तान गया था। वह एमबीबीएस फोर्थ ईयर का स्टूडेंट है।

अमित के माता-पिता बीमार, मदद के लिए भटक रहा बड़ा भाई अमित के बड़े भाई मोहित यादव ने बताया हम घर बनवाना चाह रहे थे, लेकिन घर का सपना छोड़ पापा ने मेरे छोटे भाई को विदेश भेजकर पढ़ाई करवाने में पैसे खर्च किए। सोचा था कि उसका भविष्य संवर जाएगा। यहां पढ़ाते तो दोगुना पैसा खर्चा हो रहा था। अब घर का माहौल बहुत दुखदायी है। माता-पिता बीमार हैं। मैं उनके लिए और भाई के लिए भागदौड़ में लगा हूं। हर दिन घर पहुंचते ही मां-पिता पूछते हैं- भाई का कुछ हुआ? हफ्ते-महीने बीतते जा रहे हैं, मेरे पास कोई जवाब ही नहीं है। चिंता से वे न सो पा रहे हैं और न चैन से रह पा रहे हैं। 13 महीनों से लग रहा है कि समय एक जगह ही अटक गया है।

प्रियांशु के पिता कॉन्स्टेबल, अमित के पिता रिटायर्ड फौजी अमित ने 2021 और प्रियांशु ने 2022 में कजाकिस्तान की कैस्पियन मेडिकल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। प्रियांशु के पिता राजेंद्र यादव पुलिस कॉन्स्टेबल हैं। अमित के पिता सेना से रिटायर्ड हैं।

परिजनों का कहना है कि 2 जनवरी 2025 को हमें पता चला कि प्रियांशु और अमित एक झगड़े के मामले में डिटेंशन (हिरासत) में हैं।

31 दिसंबर 2024 को पार्टी के दौरान दो अन्य छात्रों संदीप मलिक और राहुल चहर के बीच हाथापाई हो गई थी। अमित और प्रियांशु ने बीच-बचाव की कोशिश की।

1 जनवरी 2025 को संदीप मलिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन बाद में उसने वह शिकायत वापस ले ली। पुलिस एवं कोर्ट के सामने लिखित समझौता एवं क्षमा बयान भी पेश किया। इसे कोर्ट ने स्वीकार किया। सभी स्टूडेंट्स ने मिलकर रेस्त्रां में हुई नुकसान की भरपाई कर दी। राहुल चहर द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।

कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है, रेस्त्रां के नुकसान की भी भरपाई की गई। किसी कजाक नागरिक को भी चोट नहीं पहुंची है। किसी भी छात्र का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। अमित और प्रियांशु से कोई हथियार भी बरामद नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि पुलिस जांच में भी हो चुकी है। परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद अमित और प्रियांशु को ही जेल भेजा गया। कोर्ट ने दोनों को साढ़े छह साल की सजा सुना दी।

परिवार का दावा है कि शिकायत वापस भी ले ली गई थी। इसके बावजूद दोनों को जेल भेज दिया।

मोहित ने बताया कि वकील को भी 10 लाख रुपए से अधिक फीस दी, लेकिन अच्छे से सुनवाई नहीं हो पा रही है। लगातार लाखों रुपए मांगे जा रहे हैं, लेकिन अब हम लोग खाली हो चुके हैं। राज्य सरकार और एम्बेसी तक का दरवाजा खटखटाते हुए थक चुके हैं। वकील भी गुमराह कर रहे हैं और कोई दस्तावेज नहीं पहुंचा रहे हैं। हमारा बच्चों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।

राजेंद्र और मोहित का कहना है कि केवल भारत सरकार एवं कजाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास ही प्रभावी हस्तक्षेप कर सकते हैं। सरकार चाहे तो कजाक में दया याचिका या क्षमा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकती है। सरकार दोनों बच्चों के निर्वासन (Deportation) का अनुरोध भी कर सकती है।

थक हारकर अब राना से मांगी मदद परिजनों ने अब प्रवासियों की मदद करने वाली राजस्थान के प्रवासियों की संस्था (राना) से भी मदद की गुहार लगाई है। राना के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने उन्हें मदद का आश्वासन दिया। भंडारी ने भास्कर से कहा कि दोनों बच्चों के परिजनों के फोन आए थे। उन्होंने मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि वे बीमा करवाने के लिए उन सभी परिजनों को जागरूक करने में जुटे हुए हैं, जो अपने बच्चों के पढ़ाई के लिए विदेश भेजते हैं। ये परिजन अपनी जमापूंजी लगाकर और लोन लेकर बच्चों को भेजते हैं और विदेश में कुछ अनहोनी हो जाए तो उसे संभालने के लिए इनके पास पैसा नहीं होता, हाथ खाली रहते हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button