उत्तर प्रदेश

UGC के नए नियमों पर रोक, काशी में उड़े रंग-गुलाल:भीम आर्मी ने बरेली में मुर्दाबाद के नारे लगाए; कहा- यही नियम लागू हों

 

UGC के नए नियम लागू किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। बीएचयू के छात्र डॉ. मृत्युंजय तिवारी समेत अन्य याचिका पर गुरुवार को CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले पर सुनवाई की। कोर्ट का आदेश आते ही 3 दिनों से चल रहा विरोध प्रदर्शन जश्न में बदल गया।

वाराणसी में छात्रों ने रंग-गुलाल उड़ाकर एक-दूसरे को बधाई दी। बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने एटा में कहा- यूजीसी के नए नियम सवर्ण समाज के लिए काला कानून हैं। ये सामान्य वर्ग को स्वघोषित अपराधी बनाने का काम कर रहा है।

उधर, बरेली में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में उतर आए। PCS अफसर अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। मांग करते हुए कहा- यूजीसी के नए नियम को तत्काल लागू किया जाए।

दरअसल, यूपी में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज के लोग पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों ने कहीं कफन पहन कर तो कहीं मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया। केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा उतरा।

इससे पहले कवि कुमार विश्वास, यूपी में बाबा…फेम अनामिका अंबर ने भी UGC पर रिएक्शन दिया था। साथ ही महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया समेत कई सेलिब्रिटीज और धर्मगुरुओं ने भी नए नियमों को गलत ठहराया था।

पहले  तस्वीरें देखिए …

यूजीसी के नए नियमों पर रोक के बाद वाराणसी में अबीर-गुलाल उड़ाकर जश्न मनाया गया।
लखनऊ विवि के छात्रों ने धरना दिया। यूजीसी रोल बैक के नारे लगाए।
बीजेपी के सीनियर लीडर व पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने कहा- नए UGC नियम कैंपस में अलगाव पैदा करेंगे।

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों? यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) ने 13 जनवरी को नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस, 2026।’ इसके तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं।

ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा।

आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।

 

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