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कब्ज से हैं परेशान! आज ही बदलें अपना खाने का तरीक़ा, इन 5 रोटियों को खाएं और सात दिन में देखें असर

आधुनिक जीवनशैली में कब्ज (Constipation) एक गंभीर समस्या बन चुकी है। गलत खानपान, पानी की कमी और शारीरिक सक्रियता न होने के कारण यह समस्या बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में देखी जा रही है।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कब्ज का समय पर समाधान न किया जाए, तो यह कई अन्य बीमारियों का कारण बन सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि अपनी रसोई में केवल ‘आटा’ बदलकर आप इस समस्या से काफी हद तक राहत पा सकते हैं।

 

क्यों होती है कब्ज की समस्या?

जब हमारे आहार में फाइबर (Fiber) की मात्रा कम हो जाती है, तो मल सख्त हो जाता है और पेट साफ होने में कठिनाई होती है। मैदा युक्त चीजें, तला-भुना खाना और कम पानी पीना इस समस्या को और गंभीर बना देता है।

पाचन सुधारने वाले 5 जादुई आटे

डॉक्टरों ने कब्ज दूर करने के लिए निम्नलिखित आटों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी है-

चोकरयुक्त गेहूं का आटा: बारीक पिसे हुए आटे या मैदा के बजाय मोटा पिसा हुआ आटा इस्तेमाल करें। इसकी भूसी (चोकर) फाइबर का बेहतरीन स्रोत है, जो आंतों की सफाई करती है।

ज्वार का आटा: यह पाचन के लिए अत्यंत सुपाच्य माना जाता है। सप्ताह में कम से कम 2-3 बार ज्वार की रोटी खाने से पुरानी कब्ज में भी सुधार होता है।

बाजरे की रोटी: सर्दियों के मौसम में बाजरा सबसे उत्तम है। यह न केवल मल को नरम बनाता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा भी देता है।

रागी (मंडुआ): डायबिटीज के रोगियों और कब्ज के मरीजों के लिए रागी एक वरदान है। इसका उच्च फाइबर कंटेंट पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है।

जौ का आटा: जौ आंतों की सफाई के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। इसे गेहूं के आटे में मिलाकर भी खाया जा सकता है।

इन चीजों से बनाएं दूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कब्ज के मरीजों को मैदा, सूजी और रिफाइंड आटे से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। ये पदार्थ आंतों में चिपक जाते हैं, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।

बेहतर परिणाम के लिए अपनाएं ये आदतें

सिर्फ आटा बदलना ही पर्याप्त नहीं है, इसके साथ कुछ जीवनशैली बदलाव भी जरूरी हैं-

फाइबर तभी काम करता है जब शरीर में पर्याप्त पानी हो।

भोजन में प्रोबायोटिक्स (दही) और कच्चा सलाद जरूर शामिल करें।

रात के खाने के बाद 15-20 मिनट टहलना पाचन को तेज करता है।

यदि आहार में बदलाव के बावजूद एक हफ्ते से अधिक समय तक कब्ज बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।

आपकी सेहत आपकी थाली से शुरू होती है। मैदा छोड़ें और मोटे अनाज (Millet) को अपनाएं, ताकि आपका पेट और मन दोनों स्वस्थ रहें।

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