उत्तर प्रदेशलखनऊ

लखनऊ में दो बहनों ने डॉग के लिए सुसाइड किया:एक महीने से बीमार था; मरते-मरते मां से बोलीं- उसे भगाना नहीं, दवा कराना

लखनऊ से एक हैरान वाली खबर सामने आई है। यहां 24 और 22 साल की दो सगी बहनों ने अपने पालतू डॉग के लिए जान दे दी। डॉग 1 महीने से बीमार है। उसकी लगातार दवा चल रही थी, लेकिन कुछ सुधार नहीं हो रहा था।

दोनों बहनों का अपने डॉग से काफी भावनात्मक लगाव था। पिता भी कई महीने से बीमार हैं। इससे दोनों बहनें डिप्रेशन में थी। बुधवार को दोनों ने एक साथ फिनायल पी लिया।

तबीयत बिगड़ने पर परिवार को जानकारी हुई। तत्काल दोनों को अस्पताल ले जाया गया। जहां पहले बड़ी बहन और बाद में छोटी बहन ने दम तोड़ दिया। घटना पारा थाना क्षेत्र के दोदा खेड़ा जलालपुर की है।

परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। आस-पड़ोस के लोग इकट्ठा हुए।

ग्रेजुएशन पास थीं दोनों बेटियां पारा थाना क्षेत्र के दोदा खेड़ा जलालपुर निवासी कैलाश सिंह (65 साल) की दो बेटियों राधा सिंह (24) और जिया सिंह (22) ग्रेजुएशन पास थीं। दोनों बहनों ने जर्मन शेफर्ड नस्ल का एक डॉग पाल रखा था। उसका नाम टोनी है। वह 1 महीने से बीमार है।

डॉग की तबीयत सही नहीं हो रही है। राधा और जिया को आशंका थी कि डॉग टोनी अब नहीं बचेगा। दोनों बहनें डिप्रेशन में रहने लगी थीं। बताया जा रहा है कि छोटी बहन जिया सिंह की पहले से भी मानसिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी।

बुधवार को दोनों ने फिनायल पीने के बाद तुरंत मां गुलाबा देवी को बताया। मां ने बड़े भाई वीर सिंह को फोन कर इसकी सूचना दी। वीर के घर पहुंचने से पहले आस-पड़ोस के लोगों की मदद से दोनों बहनों को रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन रास्ते में ही राधा की मौत हो चुकी थी। जिया ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

यही कुत्ता है जिसका इलाज चल रहा है। परिजनों का कहना है कि इसकी लगातार दवा चल रही है, लेकिन सुधार नहीं हो रहा।

मां ने सामान लेने भेजा था, लौटकर आईं तो कराहने लगीं भाई वीर सिंह ने बताया, दोनों बहनों डॉग से काफी प्यार करती थीं। डॉग का काफी इलाज कराया, लेकिन वह ठीक होने की स्थिति में नहीं था। बुधवार सुबह 11 बजे मां गुलाब देवी ने दोनों को दुकान से सामान लेने भेजा था। दुकान से लौटीं तो दोनों कराह रही थीं। उन्होंने मां को बताया कि हम दोनों ने फिनायल पी लिया है।

परिजनों का कहना है कि रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल से छोटी बहन जिया को हायर सेंटर रेफर किया गया था, लेकिन वहां भी उसे बचाया नहीं जा सका।

आस-पास के लोगों में दोनों बहनों के सुसाइड की चर्चा है। लोग यही कहते रहे कि डॉग के लिए क्या कोई जान दे सकता है। और कोई वजह होगी।

पिता रुई धुनाई का काम करते थे पड़ोसियों के अनुसार, राधा के पिता कैलाश सिंह रुई धुनाई का काम करते थे। वह 6 महीने से भी ज्यादा समय से बीमार हैं और घर पर बिस्तर पर पड़े रहते हैं। उनका भी इलाज चल रहा है। भाई वीर सिंह प्रॉपर्टी डीलिंग का करता है। एक छोटा भाई भी था, जिसकी करीब 7 साल पहले ब्रेन हेमरेज से मौत हो चुकी है।

कुत्ता बीमार हो तो खाना छोड़ देती थीं पड़ोसी लखनलाल ने बताया- बच्चियों ने क्या खाकर ऐसा कदम उठा लिया, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। दोनों अपने डॉगी टोनी को बहुत प्यार करती थीं। अगर वह खाना न खाए तो वे दोनों भी खाना छोड़ देती थीं। पिछले दिनों से जब से कुत्ता बीमार था, तब से वे दोनों बहनें ज्यादा ही डिप्रेशन में रह रही थीं। उन्होंने क्या खाकर सुसाइड किया, अगर जिंदा होतीं तो असल बात पता चल पाती।

बहनों ने कहा- हमारे मरने के बाद डॉगी को भगाना मत दो बेटियों की एक साथ मौत के बाद बुजुर्ग मां गुलाबा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह दरवाजे पर बैठी रो रही थीं। उन्होंने बताया- उन दोनों (राधा और जिया) ने मुझसे बताया कि मां, हमने फिनायल पी लिया है। अब हम दोनों ही मर जाएंगी। हमारे मरने के बाद डॉगी को घर से भगाना मत। उसको घर में रखना और दवा कराते रहना।

मां ने बताया- दोनों कुछ बोल नहीं रही थीं। मैंने उनसे खुद ही पूछा तो उन्होंने बताया कि फिनायल पी लिया है।

 

 

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