कोडीन सिरप कांड- दुबई में बैठे सरगना को बड़ा झटका:हाईकोर्ट का गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार, 22 याचिकाएं खारिज


यूपी में कोडीन कफ सिरप की तस्करी के मामले में सरगना शुभम जायसवाल समेत सभी आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका लगा है। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने सोमवार को FIR रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक की मांग वाली 22 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यानी अब किसी भी समय पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी कर सकती है।
25 हजार का इनामी शुभम जायसवाल दुबई में छिपा हुआ है। इस अवैध कारोबार के नेटवर्क में शामिल 6 बड़े चेहरे और 68 अन्य गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। 2 दिसंबर को मामले में ED की एंट्री हुई। मनी लॉन्ड्रिंग एंगल पर जांच चल रही है। एजेंसी के निशाने पर 50 आरोपी हैं।
एक हफ्ते पहले ED ने लखनऊ, रांची और अहमदाबाद समेत देशभर में सिंडिकेट से जुड़े आरोपियों के 25 ठिकानों पर छापेमारी की थी। STF के बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह की लखनऊ की कोठी, सहारनपुर के राणा बंधु विभोर और विशाल के ठिकानों, शुभम जायसवाल और उसके सहयोगियों के घर खंगाले थे।
सरकार के वकील अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा-
कफ सिरप में कोडीन फॉस्फेट नामक तत्व मिला है, जिसका उपयोग सिर्फ नशे के लिए किया जा रहा था। इसलिए मामला NDPS एक्ट का है, जिसके प्रावधानों का याचियों ने उल्लंघन किया। फर्जी फर्म बनाकर सिर्फ कागज पर ट्रांजैक्शन दिखाए गए। वास्तव में कफ सिरप को चोरी-छिपे नशे के लिए कई राज्यों में भेजा गया।

कोर्ट ने NDPS एक्ट के तहत मुकदमे को सही माना हाईकोर्ट ने कोडिन कफ सिरप मामले में आरोपियों पर NDPS एक्ट के तहत मुकदमा चलाने को सही बताया है।
कोर्ट ने अभिषेक शर्मा, विनोद अग्रवाल, प्रतीक मिश्रा, विशाल कुमार जायसवाल, भोला प्रसाद, नीरज सेठ, शुभम जायसवाल, पप्पन यादव, मो. सलमान अंसारी, अनुप्रिया सिंह, अंकित कुमार श्रीवास्तव, दिलीप कुमार उमर, मंजू शर्मा, आसिफ मोहम्मद, अरूण सोनकर उर्फ अर्जुन सोनकर, खुशबू गोयल, धर्मेंद्र कुमार जायसवाल, अक्षत यादव और अजित यादव की रिट पिटीशन को खारिज किया है।
जौनपुर में 3 फर्म संचालकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जौनपुर पुलिस ने कोडीनयुक्त कफ सिरप के मामले में तीन फर्म संचालकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए गए हैं, जो जांच में नाम सामने आने के बाद से फरार हैं। वहीं शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल को 21 दिसंबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा। जौनपुर पुलिस 14 दिन की रिमांड मांगेगी।
5 पॉइंट में जानिए कैसे कोडीन युक्त कफ सिरप के नेटवर्क का खुलासा हुआ
- प्रदेश में सबसे पहली FIR सोनभद्र जिले में रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में 18 अक्टूबर को दर्ज हुई थी। सोनभद्र एसपी अभिषेक वर्मा के मुताबिक, दीपावली का समय था। वाहनों की चेकिंग पर सख्ती बरती जा रही थी। 18 अक्टूबर की रात में एक्साइज विभाग के साथ पुलिस की टीम वाहनों की चेकिंग कर रही थी।
- तभी एक ट्रक को रोका गया। उसमें नमकीन भरा था। ट्रक त्रिपुरा जा रहा था। ड्राइवर के पास नमकीन के ही बिल थे। नमकीन के बीच में कोडीन कफ सिरप की शीशियां छिपाकर रखी गई थीं। पुलिस ने 3.5 करोड़ की 1.19 लाख शीशियां जब्त कीं।
- ट्रक ड्राइवर हेमंत पाल, बृजमोहन शिवहरे और एमपी के ट्रांसपोर्टर रामगोपाल धाकड़ की गिरफ्तारी हुई थी। त्योहार के चलते तीनों से बिना पूछताछ किए पुलिस ने जेल भेज दिया। त्योहार के बाद पुलिस ने ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टर से जेल में पूछताछ की।
- तब पता चला कि कोडीन कफ सिरप की ये शीशियां गाजियाबाद में लोड हुई थीं। पुलिस ने मेरठ से सौरभ त्यागी को दबोचा। इसके बाद वसीम और आसिफ के बारे में पता चला। पूछताछ के आधार पर टीम ने एक ट्रक रांची में और 4 ट्रक गाजियाबाद से जब्त किए। यहां चूने और चावल की बोरियों के बीच कफ सिरप की शीशियां छिपाकर रखी गई थीं।
- इसी पूछताछ में दुबई में छिपे आसिफ और वसीम के साथ शुभम जायसवाल का नाम पहली बार आया। इन तीनों के खिलाफ ही गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में इसकी एफआईआर दर्ज है। ये भी पता चला कि शुभम के जरिए वसीम और आसिफ कोडीन युक्त सिरप की शीशियां बांग्लादेश तक पहुंचाते हैं।
अब पढ़िए, शुभम जायसवाल पर क्या आरोप हैं?

- अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला जायसवाल सहित काशी के 28 दवा कारोबारियों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप है कि 100 करोड़ की 89 लाख शीशी प्रतिबंधित कफ सिरप खरीदी और बेची गई।
- काशी के ही 93 मेडिकल स्टोर के नाम पर 84 लाख शीशी प्रतिबंधित कप सिरप खरीदी-बेची गई है। जिस मेडिकल स्टोर के नाम पर कारोबार दिखाया गया, उनमें से ज्यादातर मौके पर नहीं मिले। बाद में बंगाल और बांग्लादेश तक फैले इस अवैध कारोबार के नेटवर्क के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
- जांच में सामने आया कि 9 बंद फर्मों को कफ सिरप बेचा गया। इनमें मेसर्स सृष्टि फार्मा, जीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, हर्ष फार्मा, डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएम. मेडिकल एजेंसी और श्री बालाजी मेडिकल के नाम शामिल हैं।
- आयुक्त के मुताबिक, सिर्फ कोडीन युक्त सिरप की खरीद-बिक्री के लिए ही फर्जी फर्में बनाई गईं। सोनभद्र, जौनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, चंदौली समेत अन्य जनपदों में भी शुभम जायसवाल के खिलाफ केस दर्ज हैं।
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किंगपिंग शुभम जायसवाल ने 14 दिन पहले वीडियो जारी कर खुद को बेगुनाह बताया था। कहा था- मैंने कोई जहरीली सिरप नहीं बेची। मेरी द्वारा बेची गई दवाओं से बच्चों की मौत नहीं हुई। मैं क्लियर करना चाहता हूं, ये सभी बातें झूठी हैं। फेंसिडिल (Phensydil) सिरप न तो जहरीली है, न ही प्रतिबंधित है। न ही इससे बच्चों की मौत हुई है।
सपा प्रमुख अखिलेश और अन्य नेताओं से मैं कहना चाहता हूं कि ऐसी राजनीति न करें। लोगों को भ्रम में न डालें। मैं सीएम योगी से हाथ जोड़कर कहता हूं कि मैं बेगुनाह हूं। मुझे फंसाया जा रहा है। सीएम जी, हमारी मदद कीजिए। आप जांच करा लीजिए। मेरे पास हर तरह के सबूत हैं।
क्या सच में फेंसिडिल के इस कफ सिरप से किसी की मौत हुई है? यूपी के स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश और राजस्थान में बच्चों के कफ सिरप का जो प्रकरण सामने आया था, वो तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी की कोल्ड्रिफ दवा थी। इससे दोनों राज्यों में 24 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी। उस सिरप के एक बैच में 48.6 प्रतिशत डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया। यही वह जहरीला रसायन है, जिससे पहले गांबिया, उज्बेकिस्तान व भारत में बच्चों की मौतें हुई थीं।
जबकि एबॉट कंपनी की फेंसिडिल कफ सिरप वयस्क लोगों के खांसी के लिए बनी है। इसमें ट्राइप्रोलिडिन हाइड्रोक्लोराडइ और कोडीन फास्फेट का मिश्रण होता है। इसका उपयोग लोग नशे के रूप में करते हैं। हेल्थ डिपार्टमेंट का दावा है कि दवा के रूप में सेवन से अब तक किसी की मौत नहीं हुई है।