उत्तर प्रदेश

यूपी BJP अध्यक्ष के लिए पंकज चौधरी सबसे आगे:राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष लखनऊ पहुंचे, CM के साथ मीटिंग की

यूपी में भाजपा के नए अध्यक्ष का नाम फाइनल हो चुका है। केंद्र में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी रेस में सबसे आगे हैं। वह योगी के गढ़ गोरखपुर से हैं। पंकज चौधरी पीएम मोदी और अमित शाह के बेहद करीबी हैं।

पंकज गोरखपुर से सटे महाराजगंज से 7 बार से सांसद हैं। भाजपा सूत्रों का दावा है कि पंकज चौधरी का नाम तय है। सिर्फ ऐलान होना बाकी है। हालांकि, एक चर्चा यह भी है कि हेल्थ इश्यू के चलते चौधरी खुद ये पद नहीं लेना चाहते हैं।

ओबीसी के कुर्मी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी 2021 से केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं। वह पीएम के कितने खास हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो साल पहले यानी 2023 में गोरखपुर दौरे के दौरान मोदी अचानक उनके घर पहुंच गए थे।

दरअसल, भाजपा ने तय किया है कि नया प्रदेश अध्यक्ष OBC वर्ग से ही होगा। पंकज चौधरी के अलावा केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का नाम भी रेस में है। वर्मा लोधी, जबकि साध्वी निषाद समुदाय से आती हैं।

प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी 3 दिनों से दिल्ली में डेरा जमाए हैं। गुरुवार को मोदी से करीब 35 मिनट मुलाकात की थी।

आज के अपडेट्स…

  • भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष लखनऊ पहुंच चुके हैं। उनकी सीएम योगी के साथ मीटिंग हुई है।
  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए पार्टी ने सभी प्रांतीय परिषद सदस्यों को लखनऊ पहुंचने का फरमान जारी कर दिया। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी भी लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं।
  • प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए पार्टी ने प्रांतीय परिषद के सदस्यों की सूची जारी की है। यह सदस्य ही प्रदेश अध्यक्ष चुनाव में प्रस्तावक, समर्थक और मतदाता होंगे।
  • शाम 4.30 बजे लखनऊ भाजपा ऑफिस में पार्टी की बैठक होगी। बीएल संतोष, भूपेंद्र चौधरी समेत तमाम दिग्गज बीजेपी नेता लखनऊ पहुंच रहे हैं।
  • पंचायत और विधानसभा चुनाव में बीजेपी पिछड़े वर्ग पर दांव खेलेगी। पिछड़े वर्ग में कुर्मी समाज की आबादी यादवों के बाद सबसे ज्यादा है। कुर्मी समाज को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है, लेकिन लोकसभा चुनाव में इस समाज का एक हिस्सा PDA के नाम पर सपा के साथ गया था।
  • पंकज चौधरी कद्दावर नेता हैं। 7 बार के सांसद हैं। अच्छे प्लानर माने जाते हैं। पार्षद से राजनीति की शुरुआत की। गोरखपुर के डिप्टी मेयर रहे और फिर 1991 में पहली बार सांसद बने। राहत रूह तेल कंपनी के मालिक हैं।
  • 2024 में 11 कुर्मी सांसद चुने गए। इनमें 3 भाजपा, 7 सपा के हैं। कुर्मी वोटों का ध्रुवीकरण हुआ। भाजपा नहीं चाहती कि कुर्मी वोट बंटे।
  • यूपी भाजपा में इससे पहले दो बार कुर्मी भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं। विनय कटियार और स्वतंत्र देव सिंह। अगर चौधरी का नाम फाइनल हुआ तो ये तीसरे कुर्मी जाति के अध्यक्ष होंगे।
  • गोरखपुर की राजनीति में योगी और पंकज चौधरी ही बीजेपी के दो पड़े क्षत्रप माने जाते हैं। दोनों की राजनीति का तरीका अलग है। एक को सरकार और एक को संगठन की कमान सौंपने के भी कई राजनीतिक मायने हैं।

अब रेस में 2 और नाम क्यों, जानिए…

1. बीएल वर्मा, केंद्रीय मंत्री

  • लोधी समाज की आबादी करीब 1.20 करोड़ है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के समय से यह समाज बीजेपी के साथ रहा है, लेकिन जब कल्याण सिंह बीजेपी से अलग हुए तो समाज भी बीजेपी से अलग हो गया। कल्याण सिंह के फिर बीजेपी में आने के साथ समाज का झुकाव भी बीजेपी की ओर हो गया।
  • कल्याण सिंह के निधन के बाद लोधी समाज में बीजेपी का कोई बड़ा चेहरा नहीं है। बीजेपी नेतृत्व बीएल वर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर समाज में नई लीडरशिप की तैयारी कर सकता है।

2. साध्वी निरंजन ज्योति, पूर्व केंद्रीय मंत्री

  • निषाद समाज में बीजेपी की पकड़ कमजोर है। इसके चले बीजेपी को निषाद पार्टी से गठबंधन करना पड़ता है। बीजेपी ने साध्वी निरंजन ज्योति को बिहार चुनाव में सह-प्रभारी बनाया था। उसके बाद बिहार में बीजेपी के विधायक दल की बैठक के लिए सह-पर्यवेक्षक भी बनाया।
  • इसके बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि बीजेपी नेतृत्व साध्वी निरंजन ज्योति को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे सकता है। इससे एक तीर से तीन निशाने लग जाएंगे। पहला- महिला वोट बैंक साधने का, दूसरा- पिछड़े वर्ग को नेतृत्व देना और तीसरा- निषाद समाज में अपनी पकड़ मजबूत करना।

रविवार दोपहर तक प्रदेश अध्यक्ष का नाम लोगों के सामने आ सकता है। पीयूष गोयल ऐलान करेंगे।

इन नामों की भी चर्चा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, यूपी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह और राज्यसभा सदस्य बाबूराम निषाद के नाम की भी चर्चा है। जबकि, ब्राह्मण वर्ग में राज्यसभा सदस्य डॉक्टर दिनेश शर्मा, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के नाम पर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, इसकी उम्मीद बहुत कम ही है।

मतदान हुआ तो 380 से अधिक प्रांतीय परिषद सदस्य हिस्सा लेंगे यूपी के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडे ने बताया, प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल शनिवार को लखनऊ आएंगे। उसी दिन दोपहर एक बजे से दो बजे तक पार्टी मुख्यालय पर नामांकन पत्र दाखिल कराए जाएंगे। नामांकन प्रक्रिया केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े की मौजूदगी में होगी।

अगले दिन रविवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराएंगे।

उन्होंने बताया, चुनाव में यदि मतदान की आवश्यकता हुई तो 84 संगठनात्मक जिलों से 380 से अधिक प्रांतीय परिषद के सदस्य मतदान करेंगे। भाजपा के 98 संगठनात्मक जिले हैं, लेकिन अभी 14 जिलों में जिला अध्यक्ष का चयन नहीं हुआ है। इसलिए वह जिले प्रदेश अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे।

मतदान की नौबत नहीं आएगी, निर्विरोध होगा चुनाव पार्टी सूत्रों का कहना है कि मतदान की नौबत नहीं आएगी। प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध होगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल परिषद की बैठक में नेता के नाम का प्रस्ताव रखेंगे। जिस पर CM योगी आदित्यनाथ या कोई अन्य नेता समर्थन करेगा। इसके बाद नाम की घोषणा कर दी जाएगी।

क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए कम से कम 10 प्रांतीय परिषद सदस्यों के प्रस्तावक और समर्थक होना आवश्यक है। ऐसे में पार्टी की ओर से तय नाम के खिलाफ जाकर किसी भी नेता की नामांकन दाखिल करने की हिम्मत नहीं होगी ना ही कोई प्रांतीय परिषद का सदस्य प्रस्ताव का समर्थन बनने की हिम्मत करेगा।

यूपी भाजपा की राजनीतिक दिशा क्या होगी, जानकार कहते हैं-

  • जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह या डॉ दिनेश शर्मा को कमान सौंप गई तो यह माना जाएगा कि केंद्रीय नेतृत्व में आगामी विधानसभा मजबूत किया है, उन्हें फ्री हैंड दिया है।
  • उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य या उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो ऐसा माना जाएगा कि केंद्रीय नेतृत्व यूपी में सत्ता की ताकत का संतुलन बनाए रखना चाहता है।
  • साध्वी निरंजन ज्योति पर पार्टी भरोसा जताती है तो यूपी में आगामी राजनीति पूरी तरह भगवामय में होगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री भी भगवा वस्त्र धारी हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी भगवा वस्त्र धारी होगी।

ये तस्वीर योगी सरकार के 2.0 के पहले मंत्रिमंडल विस्तार की है, जब ओपी राजभर को कैबिनेट में जगह दी गई थी।

11 महीने से नए अध्यक्ष का इंतजार यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति 15 जनवरी, 2025 को होनी थी। कभी महाराष्ट्र चुनाव, तो कभी यूपी में उपचुनाव। इसके बाद बिहार चुनाव के चलते मामला अटकता चला गया। यूपी भाजपा का अध्यक्ष केवल यूपी ही नहीं, पार्टी की केंद्रीय राजनीतिक के लिए भी महत्वपूर्ण है।

16 दिसंबर, 2025 से खरमास शुरू हो रहा है, लिहाजा दो दिन पहले 14 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष का चयन हो जाएगा।

तो होगा मंत्रिमंडल विस्तार योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार भी होना है। पूर्व पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद कैबिनेट मंत्री के पद खाली हैं। आगामी पंचायतीराज चुनाव और विधानसभा चुनाव के चलते सामाजिक समीकरण सेट करने के लिए भी कुछ जातियों का सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। दलितों का प्रतिनिधित्व भी बढ़ाया जाना है।

भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को भी फिर से मंत्रीमंडल में शामिल किया जाना है। प्रदेश सरकार के मौजूदा मंत्रियों में, जिनके कामकाज को लेकर सरकार, भाजपा और आरएसएस के साथ कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर भी किया जा सकता है। हालाकि, पार्टी का एक वर्ग चुनाव से पहले किसी को मंत्रिमंडल से बाहर करने के पक्ष में नहीं है।

योगी सरकार 2.0 का पहला मंत्रिमंडल विस्तार 5 मार्च, 2024 को किया गया था। इसमें सुनील शर्मा, दारा सिंह चौहान, रालोद के अनिल कुमार और सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को मंत्री कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार भी होना है। दलितों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है।

योगी सरकार में 54 मंत्री, 6 पद खाली योगी कैबिनेट में वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कुल 21 कैबिनेट मंत्री हैं। असीम अरुण, गुलाब देवी, जेपीएस राठौर और दयाशंकर सिंह समेत 14 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं। प्रतिभा शुक्ला, रजनी तिवारी, बलदेव सिंह औलख और जसवंत सिंह सैनी सहित 19 राज्यमंत्री हैं। इस तरह वर्तमान में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि कुल 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। लिहाजा, मंत्रिमंडल के लिए 6 पद खाली हैं।

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