मुंबई : बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपनी लंबे समय की साथी गौरी स्प्रैट से शादी करने के कुछ ही दिनों बाद एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। एक मुस्लिम मौलवी ने इस जोड़े के अंतरधार्मिक विवाह पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है और दावा किया है कि उनकी इस्लामी कानून की व्याख्या के अनुसार यह अनुमेय नहीं है।
खबरों के मुताबिक, आमिर खान और गौरी स्प्रैट ने 5 जुलाई, 2026 को एक निजी रजिस्टर्ड समारोह में विवाह किया, जिसमें करीबी परिजन और मित्र शामिल हुए। अभिनेता ने अभी तक इस विवाद को लेकर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, और उनके प्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं।
मौलवी ने शादी पर आपत्ति जताई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही मुख्य मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने आमिर खान की गौरी स्प्रैट से शादी को लेकर उनके खिलाफ फतवा जारी करने का दावा किया है और कहा है कि यह विवाह शरीयत का उल्लंघन करता है क्योंकि वह मुस्लिम नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में मौलवी ने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं की उनकी व्याख्या के अनुसार, एक मुस्लिम पुरुष को गैर-मुस्लिम महिला से विवाह करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने आगे दावा किया कि ऐसे विवाह को पाप माना जाता है और जो लोग इस व्याख्या को अस्वीकार करते हैं, उन्हें अंततः ईश्वर के समक्ष जवाबदेह होना पड़ेगा।

बहुविवाह पर टिप्पणी
मौलवी ने बहुविवाह की प्रथा पर भी टिप्पणी की और कहा कि विवाह करना, तलाक देना और फिर से विवाह करना उचित नहीं ठहराया जा सकता यदि कोई व्यक्ति प्रत्येक जीवनसाथी की जिम्मेदारियों और अधिकारों को समान रूप से पूरा करने में असमर्थ है।
आमिर खान का उल्लेख करते हुए उन्होंने अभिनेता की कथित तीसरी शादी की आलोचना की और अंतरधार्मिक विवाह पर अपनी धार्मिक आपत्ति दोहराई।
आमिर खान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
अब तक न तो आमिर खान और न ही गौरी स्प्रैट ने मौलवी की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया दी है। कथित फतवे को लेकर अभिनेता की प्रबंधन टीम की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर बहस
इस विवाद ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। जहां कुछ यूजर्स ने जोड़े के अपना जीवनसाथी चुनने के अधिकार का बचाव किया है, वहीं अन्य ने मौलवी की धार्मिक राय का समर्थन किया है।
कानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि फतवा एक गैर-बाध्यकारी धार्मिक राय है जो एक इस्लामी विद्वान द्वारा जारी की जाती है। भारत में इसे कानून की मान्यता प्राप्त नहीं है और यह लागू नागरिक कानूनों के तहत संपन्न विवाह की कानूनी वैधता को प्रभावित नहीं करता।
फिलहाल यह मामला सार्वजनिक बयानों तक ही सीमित है और इस विवाद को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई या सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ है।

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