ग्वालियर। आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता, प्रभाव और सुरक्षा को विज्ञानी कसौटी पर परखने के लिए ग्वालियर में स्थापित होने वाली प्रदेश की दूसरी रिसर्च लैब बजट स्वीकृत होने के बावजूद शुरू नहीं हो सकी है। प्रयोगशाला की स्थापना के लिए 90 लाख रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं, लेकिन आवश्यक उपकरणों की खरीदी नहीं होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय प्रबंधन उपकरणों की सूची तैयार कर शासन को भेज चुका है। प्रबंधन को अब उपकरणों की स्वीकृति मिलने का इंतजार है
ग्वालियर में रिसर्च लैब स्थापित करने की प्रक्रिया के तहत महाविद्यालय के चार सदस्यीय दल ने पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय व संस्थान, भोपाल में स्थापित रिसर्च लैब का भ्रमण किया था। दल ने वहां उपलब्ध सुविधाओं और कार्यप्रणाली का अध्ययन कर प्रतिवेदन तैयार किया था।

इसमें डॉ. कन्हैया लाल शर्मा को समिति का संयोजक बनाया गया था, जबकि डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. राहुल गुप्ता और साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. मनीष सिन्हा समिति के सदस्य थे। इस अध्ययन के बाद ही ग्वालियर में लैब की स्थापना के लिए शासन से स्वीकृति मिली थी। हालांकि, उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से इसका लाभ अभी नहीं मिल पा रहा है।प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरणों की मदद से औषधियों की एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल क्षमता की जांच की जाएगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि संबंधित औषधि किन परिस्थितियों में प्रभावी रहती है और तापमान सहित भंडारण की परिस्थितियों का उसकी गुणवत्ता पर क्या असर पड़ता है।


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