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Sat, Oct 31, 2026
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एम्स भोपाल में आउटसोर्स एजेंसी द्वारा 260 कर्मचारियों को बिना बताए हटाने पर हंगामा

भोपाल | एमजे एजेंसी 1100 में से 516 को ही रखना चाहती थी, विरोध के बाद प्रबंधन ने सभी को वापस लिया, गुरुवार को ओपीडी 6200 से घटकर 5420 पर आई, एम्स भोपाल में आउटसोर्स एजेंसी द्वारा 260 कर्मचारियों को ब…

एम्स भोपाल में आउटसोर्स एजेंसी द्वारा 260 कर्मचारियों को बिना बताए हटाने पर हंगामा

भोपाल | एमजे एजेंसी 1100 में से 516 को ही रखना चाहती थी, विरोध के बाद प्रबंधन ने सभी को वापस लिया, गुरुवार को ओपीडी 6200 से घटकर 5420 पर आई, एम्स भोपाल में आउटसोर्स एजेंसी द्वारा 260 कर्मचारियों को बिना बताए हटाने पर हंगामा खड़ा हो गया। विरोध में करीब 500 कर्मचारियों ने बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक ओपीडी के बाहर धरना दिया और काम बंद कर दिया। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा। करीब 800 मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ। कई मरीजों के पर्चे तक नहीं बन पाए।दरअसल, एम्स भोपाल में हाउसकीपिंग, वार्ड बाय और प्लंबर का काम एमजे एजेंसी के जरिए आउटसोर्स पर होता है। एजेंसी के पास कुल 1100 कर्मचारी हैं। एजेंसी ने नई व्यवस्था के तहत 1100 में से सिर्फ 516 कर्मचारियों को ही रखने का फैसला लिया और 260 कर्मचारियों की लिस्ट निकालकर उन्हें बिना सूचना के हटा दिया। लिस्ट सामने आते ही अन्य कर्मचारियों में भी डर फैल गया कि उन्हें भी धीरे-धीरे निकाल दिया जाएगा। इसके विरोध में निकाले गए कर्मचारी और बाकी कर्मचारी एकजुट हो गए।

बुधवार रात करीब 500 कर्मचारियों ने एम्स की ओपीडी के बाहर रातभर धरना-प्रदर्शन किया। 

गुरुवार सुबह वे कौटिल्य भवन के सामने, जहां डायरेक्टर और उप निदेशक प्रशासन का कार्यालय है, धरने पर बैठ गए। मामला तूल पकड़ता देख सुबह एम्स प्रबंधन ने एमजे एजेंसी के संचालकों को बुलाकर बातचीत की। लंबी चर्चा के बाद प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि किसी भी कर्मचारी को नहीं निकाला जाएगा। इसके बाद सभी 260 हटाए गए कर्मचारियों को वापस रखने पर सहमति बनी।

 

विरोध प्रदर्शन के कारण गुरुवार को एम्स की ओपीडी में भारी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को कुल ओपीडी 5420 रही, जिसमें 740 नए और 4680 पुराने मरीज थे। जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 6200 से 6500 के बीच रहता है। सुबह से ही रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर आउटसोर्स कर्मचारी बैठे हुए थे। जिससे मरीजों को ओपीडी काउंटर तक नहीं पुंच सके। बाहर लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन पर्चे बनने की रफ्तार बहुत धीमी रही।

 

कर्मचारी राजू सेन ने आरोप लगाया कि एजेंसी में नौकरी देने के नाम पर लेन-देन किया जाता है। उन्होंने बोनस नहीं मिलने, वेतन में अलग-अलग मदों में कटौती और पीएफ जमा नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने प्रबंधन से इन मामलों में लिखित समाधान की मांग की है।

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