भोपाल। राजधानी में शराब दुकान के लाइसेंस के लिए बैंक की कथित फर्जी एफडीआर जमा करने का मामला सामने आया है। पीएंडटी चौराहा कंपोजिट शराब दुकान समूह के तत्कालीन लाइसेंसधारी जसवंत पर 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिभूति राशि के बदले फर्जी ई-फिक्स्ड डिपाजिट रसीद (एफडीआर) और बैंक सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आरोप है। आबकारी विभाग ने बैंक से दोबारा सत्यापन कराया तो कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। इस मामले में सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालय ने 17 अक्टूबर को कोहेफिजा थाना प्रभारी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था, जिस पर पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

आबकारी विभाग के पत्र के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पीएंडटी चौराहा (BPL/F-14) शराब दुकान समूह को 27 करोड़ 55 लाख 35 हजार 348 रुपये के वार्षिक मूल्य पर जसवंत को आवंटित किया गया था। नियमानुसार उन्हें इसकी 10 प्रतिशत राशि यानी 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये प्रतिभूति के रूप में जमा करनी थी। लाइसेंसधारी ने एयू स्माल फाइनेंस बैंक की 12 मई 2024 की ई-एफडीआर कार्यालय में प्रस्तुत की थी।
इसके बाद 20 मई 2024 को अपनी ई-मेल आईडी से बैंक की सत्यापन रिपोर्ट भी विभाग को भेजी गई।दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह होने के बाद आबकारी विभाग ने 10 और 12 अक्टूबर 2026 को बैंक की एमपी नगर शाखा को पत्र भेजकर दोबारा सत्यापन कराया। बैंक ने 12 अक्टूबर को जारी अपने दो अलग-अलग पत्रों में स्पष्ट किया कि संबंधित ई-एफडीआर और सत्यापन रिपोर्ट उसके द्वारा जारी नहीं किए गए हैं। इसके बाद आबकारी विभाग ने दस्तावेजों को कूटरचित बताते हुए लाइसेंसधारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।सहायक आबकारी आयुक्त से मिले पत्र के आधार पर धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


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