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पशुआहार में तय सीमा से ज्यादा यूरिया:दूध भी इन्फेक्टेड, लिवर-किडनी डैमेज का रिस्क, पीने से पहले चेक करें क्वालिटी

दूध में पानी, डिटर्जेंट और सिंथेटिक केमिकल्स की मिलावट की खबरें अक्सर आती रहती हैं। अब मिलावट का खेल पशुओं के चारे तक पहुंच गया है। चिंता की बात यह है कि इसका असर पशुओं के साथ हमारी सेहत पर भी पड़ रहा है।

हाल ही में राजस्थान से पशुआहार में तय सीमा (1%) से ज्यादा (करीब 1.5% से 4% तक) यूरिया मिलाने का मामला सामने आया है। ज्यादा चिंता की बात ये है कि इसमें फीड ग्रेड की बजाय खराब क्वालिटी का यूरिया मिलाया जा रहा है।

सीमित मात्रा में ‘फीड ग्रेड यूरिया’ का इस्तेमाल पशुओं के पोषण के लिए किया जाता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा या खराब क्वालिटी का यूरिया पशुओं की सेहत बिगाड़ सकता है। इसका असर दूध की क्वालिटी पर भी पड़ता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाई यूरिया वाला पशुआहार खा रहे गाय-भैंस के दूध से किडनी और लिवर डैमेज का रिस्क हो सकता है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-

  • पशुआहार में यूरिया क्यों मिलाया जाता है?
  • हाई यूरिया मिल्क के क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं?
  • दूध खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

एक्सपर्ट:

डॉ. आदेश कुमार वर्मा, वेटेरिनरी कंसल्टेंट और असिस्टेंट प्रोफेसर, केएपीजी कॉलेज, प्रयागराज

डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- पशुआहार में किन चीजों की मिलावट की जा रही है?

जवाब- हाल ही में राजस्थान से पशुआहार में तय सीमा से ज्यादा यूरिया मिलाने का मामला सामने आया है। मिलावटखोर इसके अलावा खराब अनाज, भूसी, एग्रीकल्चरल वेस्ट और सस्ते फिलर्स भी मिलाते हैं। इससे पशुओं की सेहत, दूध उत्पादन और दूध की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।

सवाल- पशुआहार में यूरिया क्यों मिलाया जाता है?

जवाब- यूरिया पशुओं के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है।

  • तय मात्रा में फीड ग्रेड यूरिया (पशुओं के खाने वाला यूरिया) नॉन-प्रोटीन नाइट्रोजन (NPN) सोर्स के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  • गाय-भैंस जैसे जुगाली करने वाले पशु इसे अपने पेट में मौजूद सूक्ष्मजीवों की मदद से प्रोटीन में बदल सकते हैं।
  • इससे चारे की न्यूट्रिशन क्वालिटी बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिलती है।
  • आमतौर पर इसका इस्तेमाल आर्टिफिशियल प्रोटीन की मात्रा ज्यादा दिखाने के लिए किया जाता है।
  • समस्या तब होती है, जब पशुआहार में तय सीमा से ज्यादा या इंडस्ट्रियल यूरिया मिलाया जाता है।

सवाल- फीड ग्रेड यूरिया और इंडस्ट्रियल यूरिया में क्या अंतर है?

जवाब- फीड ग्रेड और इंडस्ट्रियल दोनों ही यूरिया हैं, लेकिन इनकी क्वालिटी और इस्तेमाल के उद्देश्य अलग होते हैं।

फीड ग्रेड यूरिया: ये खासतौर पर पशुओं के लिए बनाया जाता है। इसमें हानिकारक तत्वों की मात्रा तय मानकों के भीतर रखी जाती है, इसलिए यह सीमित मात्रा में पशुओं के लिए सुरक्षित माना जाता है।

इंडस्ट्रियल यूरिया: इसका इस्तेमाल केमिकल्स, रेजिन, प्लास्टिक, खाद और अन्य इंडस्ट्रियल कामों में होता है। इसमें हानिकारक तत्व और कुछ ऐसे केमिकल्स हो सकते हैं, जो पशुओं के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते।

सवाल- ज्यादा यूरिया वाला पशुआहार खाने से गाय-भैंस को क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब- पशुआहार में तय मानक से ज्यादा यूरिया होने पर गाय-भैंसों को कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है।

सवाल- क्या पशुआहार में ज्यादा यूरिया होने से दूध में भी यूरिया बढ़ सकता है?

जवाब- हां, अगर पशु लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा यूरिया वाला पशुआहार खाता है तो उसके शरीर में नाइट्रोजन और यूरिया का लेवल बढ़ सकता है। इसका असर दूध की क्वालिटी पर पड़ता है। इससे दूध में यूरिया की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो सकती है।

सवाल- हाई यूरिया वाला दूध पीने से बच्चों की सेहत पर क्या असर हो सकता है?

जवाब- बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में ज्यादा सेंसिटिव होता है। इसलिए उनकी सेहत पर जल्दी और ज्यादा असर पड़ता है। इससे पाचन संबंधी समस्याएं, कमजोरी और न्यूट्रिशन इम्बैलेंस हो सकता है। साथ ही शारीरिक ग्रोथ पर भी नेगेटिव असर पड़ता है।

सवाल- क्या दूध देखकर पता लगाया जा सकता है कि उसमें यूरिया ज्यादा है?

जवाब- नहीं, दूध देखकर यह पता लगाना मुश्किल है कि उसमें यूरिया ज्यादा है या नहीं। इसकी पुष्टि लैब टेस्ट या स्पेशल टेस्ट किट से ही की जा सकती है। इसलिए शक होने पर दूध की जांच करानी चाहिए।

सवाल- क्या दूध उबालने से यह रिस्क खत्म हो जाता है?

जवाब- नहीं, दूध उबालने से यूरिया खत्म नहीं होता। उबालने से दूध में मौजूद बैक्टीरिया तो नष्ट हो सकते हैं, लेकिन घुला हुआ यूरिया बना रहता है।

सवाल- दूध खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- कुछ बुनियादी सावधानियां बरतकर मिलावट और खराब क्वालिटी वाले दूध का रिस्क काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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