सुंदरता के लिए इंजेक्शन लगवाना:CDSCO ने बताया गैरकानूनी, नर्व डैमेज और एलर्जिक रिएक्शन का रिस्क, इससे दूर रहें

आजकल ‘इंस्टेंट ग्लो’ की चाह में कॉस्मेटिक इंजेक्शन और IV ड्रिप्स का ट्रेंड बढ़ा है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, मॉडल्स और सेलिब्रिटीज को देखकर लोग ये ब्यूटी ट्रेंड्स अपना रहे हैं। लेकिन यह कितना रिस्की हो सकता है, कम ही लोग जानते हैं।
हाल ही में ‘सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन’ (CDSCO) ने साफ किया है कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है और ऐसी प्रैक्टिसेज पर सख्ती जरूरी है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-
- कॉस्मेटिक इंजेक्शन क्या होते हैं?
- लोग इन्हें क्यों लेते हैं?
- इनके क्या साइड इफेक्ट्स हैं?
एक्सपर्ट: डॉ. विनोद विज, कंसल्टेंट, प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जरी, अपोलो हॉस्पिटल, नवी मुंबई
सवाल- कॉस्मेटिक इंजेक्शन क्या होते हैं?
जवाब- यह एक नॉन-सर्जिकल ब्यूटी ट्रीटमेंट है।
- इसमें स्किन या बॉडी में दवाएं, केमिकल्स या बायोलॉजिकल सब्सटेंस को इंजेक्ट करके चेहरे को खूबसूरत बनाया जाता है। इसमें खासतौर पर स्किन की बनावट को बदला जाता है।
- इनका इस्तेमाल झुर्रियां कम करने, स्किन को टाइट करने, वॉल्यूम बढ़ाने या ग्लो के लिए किया जाता है।
सवाल- कौन-से कॉस्मेटिक इंजेक्शन सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं?
जवाब- ब्यूटी इंडस्ट्री में कई तरह के इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट ट्रेंड में हैं। इन्हें लोग एंटी-एजिंग, ग्लो या फेस शेप सुधारने जैसे अलग-अलग जरूरतों के लिए चुनते हैं।
सवाल- ‘ग्लो इंजेक्शन’ क्या होता है?
जवाब- यह ऐसा ट्रीटमेंट है, जिसमें अंदर से स्किन का रंग निखारने या टोन हल्का करने का दावा किया जाता है।
- इसमें आमतौर पर ग्लूटाथियोन (नेचुरल एंटीऑक्सिडेंट), विटामिन-C या अन्य एंटीऑक्सिडेंट्स को इंजेक्शन/IV ड्रिप के जरिए शरीर में दिया जाता है।
- हालांकि, ‘ग्लो इंजेक्शन’ कोई ऑफिशियल मेडिकल टर्म नहीं है। यह आम बोलचाल में इस्तेमाल होता है।
सवाल- क्या ग्लो इंजेक्शन और कॉस्मेटिक इंजेक्शन एक ही चीज है?
जवाब- नहीं, ये एक ही चीज नहीं हैं। ग्लो इंजेक्शन, कॉस्मेटिक इंजेक्शन की एक सब कैटेगरी है।
सवाल- क्या ये इंजेक्शन सच में स्किन को गोरा या चमकदार बनाते हैं?
जवाब- नहीं, इन इंजेक्शन्स में मौजूद ग्लूटाथियोन, मेलानिन (स्किन पिगमेंट) बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इससे-
- स्किन थोड़ी ब्राइट या इवन-टोन दिख सकती है।
- यह असर सीमित, अस्थायी और व्यक्ति पर निर्भर होता है।
- इंजेक्शन लेना बंद करने पर स्किन पहले जैसी हो सकती है।
- किसी भी इंजेक्शन को ‘गारंटीड स्किन व्हाइटनिंग’ का उपाय नहीं माना जा सकता।
सवाल- कॉस्मेटिक इंजेक्शन का असर कितने समय तक रहता है?
जवाब- इनका असर आमतौर पर कुछ हफ्तों से कुछ महीनों तक रहता है।
- शुरुआत में असर दिखने में 3-6 हफ्ते लग सकते हैं।
- अगर असर दिखता है, तो यह आमतौर पर 2-3 महीने तक टिकता है।
- ट्रीटमेंट बंद करते ही स्किन धीरे-धीरे पहली स्थिति में लौट सकती है।
सवाल- क्या कॉस्मेटिक इंजेक्शन एक बार लेने के बाद बार-बार लेना पड़ता है?
जवाब- हां, आमतौर पर बार-बार लेना पड़ता है, क्योंकि इसका असर अस्थायी होता है।
सवाल- CDSCO ने कॉस्मेटिक इंजेक्शन को लेकर क्या कहा है?
जवाब- CDSCO ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कॉस्मेटिक्स केवल स्किन पर लगाने के लिए होते हैं, न कि शरीर में इंजेक्ट करने के लिए।
सवाल- CDSCO ने किन इंजेक्शन्स को गैरकानूनी बताया गया है?
जवाब- ‘ग्लो’ या ‘स्किन गोरा करने’ के नाम पर दिए जा रहे सभी इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट्स CDSCO के नियमों के खिलाफ हैं। इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।
सवाल- क्या भारत में ग्लूटाथियोन इंजेक्शन कॉस्मेटिक इस्तेमाल के लिए अप्रूव्ड नहीं है? क्या डॉक्टर ऑफ-लेबल इनका इस्तेमाल कर रहे हैं?
जवाब- हां, भारत में ग्लूटाथियोन इंजेक्शन को ‘स्किन व्हाइटनिंग/ग्लो’ के लिए मंजूरी नहीं है। इन्हें कुछ मेडिकल कंडीशन्स (जैसे एंटीऑक्सिडेंट सपोर्ट) के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ब्यूटी या स्किन लाइटनिंग के लिए इसका इस्तेमाल अप्रूव्ड नहीं है।
सवाल- कॉस्मेटिक इंजेक्शन के क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?
जवाब- मेडिकल प्रोसीजर होने से इसके कई शार्ट और लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
सवाल- क्या इससे इन्फेक्शन हो सकता है?
जवाब- हां, अगर-
- अनट्रेंड या अनक्वालिफाइड व्यक्ति इंजेक्शन दे।
- सुई या उपकरण रीयूज किए जाएं।
- इंजेक्शन के बाद स्किन की सही केयर न की जाए तो इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ता है।
सवाल- क्या इससे नर्व डैमेज का रिस्क भी हो सकता है?
जवाब- हां, अगर-
- इंजेक्शन गलत जगह लगे।
- गलत तरीके से दिया जाए।
- इंजेक्शन सीधे नर्व के पास या अंदर लग जाए।
- दवा गलत लेयर में चली जाए।
- चेहरे की एनाटॉमी की सही समझ न हो तो नर्व डैमेज (नसों को नुकसान) का रिस्क हो सकता है।
सवाल- क्या इससे फेशियल पैरालिसिस भी हो सकता है?
जवाब- हां, कुछ कंडीशंस में फेशियल पैरालिसिस का रिस्क हो सकता है। जैसे-
- इंजेक्शन फेशियल नर्व के पास लग जाए।
- दवा गलत जगह फैलकर नर्व सिग्नल ब्लॉक कर दे।
- अनट्रेंड व्यक्ति द्वारा गलत तकनीक से इंजेक्शन लगाए जाए।
- हालांकि ये काफी रेयर होता है।
सवाल- क्या ये इंजेक्शन जानलेवा भी हो सकता है?
जवाब- हां, खतरा तब बढ़ता है, जब-
- एलर्जिक रिएक्शन हो जाए।
- वस्कुलर ऑक्लूजन (ब्लड वेसल्स का ब्लॉक होना) हो जाए।
- गंभीर इन्फेक्शन हो जाए।
- गलत दवा/ओवरडोज ले लिया जाए।
सवाल- लोगों का मानना है कि सारे सेलिब्रिटीज ये ट्रीटमेंट करवाते हैं। तो ये अनसेफ कैसे हो सकता है?
जवाब- सेलिब्रिटीज आमतौर पर अनुभवी डॉक्टर और हाई-स्टैंडर्ड मेडिकल सेटअप में ये प्रक्रियाएं कराते हैं। जबकि आम लोग अनट्रेंड लोगों या असुरक्षित जगहों पर इन्हें करवा लेते हैं, इससे रिस्क बढ़ जाता है। इसके अलावा-
- सोशल मीडिया पर दिखने वाला ‘ग्लो’ अक्सर मेकअप, फिल्टर और लाइटिंग का भी असर होता है।
- कॉस्मेटिक इंजेक्शन एक मेडिकल प्रोसीजर है। इसमें इन्फेक्शन, एलर्जी या नर्व डैमेज जैसे जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होते। इसलिए सिर्फ सेलिब्रिटी ट्रेंड के आधार पर इसे सुरक्षित मानना सही नहीं है।
सवाल- आम लोगों के लिए ये ज्यादा खतरनाक क्यों है?
जवाब- इसके कई कारण हैं, जैसे-
- कई लोग पार्लर से इंजेक्शन लगवा लेते हैं, जहां क्लिनिक जैसा स्टरलाइजेशन और सेफ्टी नहीं होती।
- मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी या स्किन टाइप का आंकलन नहीं होता।
- इंजेक्शन गलत जगह या गलत मात्रा में लग सकता है।
- रिएक्शन होने पर तुरंत इलाज की सुविधा नहीं होती।
- सही देखभाल न होने से इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ता है।
सवाल- ग्लोइंग स्किन पाने का बेस्ट तरीका क्या है?
जवाब- ग्लोइंग स्किन के लिए महंगे इंजेक्शन जरूरी नहीं होते। सही स्किनकेयर, हेल्दी लाइफस्टाइल और सन प्रोटेक्शन से नेचुरल और लॉन्ग-लास्टिंग ग्लो पाया जा सकता है।



