
देश के जोधपुर, पाली और बालोतरा जिलों में प्रदूषित नदियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है। डीजीपी (DGP) राजीव कुमार शर्मा की ओर से 2 जून को इसे लेकर आदेश जारी किए गए हैं।
यह एसआईटी इन तीन जिलों से निकलने वाली जोजरी, बांडी और लूणी नदी के प्रदूषण मामले की जांच करेगी। इसके साथ ही, इससे संबंधित सीईटीपी (CETP) से लेकर राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (RSPCB) के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
इसके अलावा, एसआईटी इन तीनों जिलों में प्रदूषण के मामले में दर्ज पुरानी एफआईआर (FIR) को भी खंगालेगी। साथ ही, प्रदूषण फैलाने और भ्रष्टाचार के मामले सामने आने पर नई एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
सिविल राइट्स एंड एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग की एडीजी (ADG) लवली कटीयार को इस स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा तीनों जिलों के एसपी और जांच अधिकारियों को भी इस टीम में शामिल किया गया है।

एसआईटी में ये अधिकारी होंगे शामिल:
अध्यक्ष: लवली कटीयार (डीजीपी, सिविल राइट्स एंड एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग)
सदस्य: देवेंद्र कुमार विश्नोई (पुलिस उप महानिरीक्षक, आरपीटीसी, जोधपुर)
सदस्य: पंकज यादव (कमांडेंट, प्रथम बटालियन, आरएसी, जोधपुर)
जोधपुर जिले के लिए:
सदस्य: कमल शेखावत (पुलिस उपायुक्त – पश्चिम, जोधपुर)
जांच अधिकारी: नरेंद्र देवड़ा (अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, जोधपुर)
पाली जिले के लिए:
सदस्य: मोनिका सेन (एसपी, पाली)
जांच अधिकारी: निशांत भारद्वाज (एएसपी, पाली)
बालोतरा जिले के लिए:
सदस्य: रमेश (एसपी, बालोतरा)
जांच अधिकारी: अनिल राजपुरोहित
एसआईटी इन पॉइंट पर करेगी काम
एफआईआर और अवैध नेटवर्क की जांच: SIT दर्ज की गई हर एफआईआर की नए सिरे से जांच करेगी। साथ ही जोधपुर, पाली और बालोतरा में औद्योगिक कचरा (इंडस्ट्रियल वेस्ट), उसके बहाव, स्ट्रक्चर और उन गुप्त नालों (बायपास) की भी जांच की जाएगी जिनसे प्रदूषित पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है।
अवैध सिस्टम चलाने वालों पर शिकंजा: इस अवैध नेटवर्क और सिस्टम को चलाने वाली फैक्ट्रियों/इंडस्ट्री, भू-माफियाओं और अन्य जिम्मेदार लोगों को चिह्नित (Identify) किया जाएगा।
सीईटीपी और अधिकारियों की भूमिका की जांच: कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के पदाधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार, आरएसपीसीबी (RSPCB), रीको (RIICO) और स्थानीय निकायों के उन अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी, जिन्होंने इस प्रदूषण को बढ़ावा दिया या अनदेखी की। इस नेक्सस में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
कड़ा एक्शन और नई एफआईआर: जांच के दौरान यदि किसी भी एजेंसी या सरकारी अधिकारी का भ्रष्टाचार सामने आता है, तो उसके खिलाफ नए सिरे से मामला दर्ज करवाया जाएगा। प्रदूषण फैलाने में मिलीभगत या रिश्वतखोरी का मामला सामने आने पर भी तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।



