मध्य प्रदेश

भोपाल के चर्चित एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा का शव मॉर्चुरी में ‘डिकंपोज’ हो रहा:बड़ा सवाल– दोबारा पोस्टमॉर्टम से क्या मिलेगा; आखिरी चैट– मां मुझे ले चलो

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में कोर्ट ने दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग खारिज कर दी, लेकिन शव को सुरक्षित रखने के आदेश ने पुलिस और फोरेंसिक विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

 

कोर्ट ने ट्विशा के शव को सड़ने से रोकने के लिए माइनस 80° सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज या सरकारी अस्पताल में इतनी कम तापमान वाली सुविधा उपलब्ध नहीं है।

 

20 तारीख को पुलिस ने ट्विशा के पिता को शव ले जाने का आग्रह किया।

20 तारीख को पुलिस ने ट्विशा के पिता को शव ले जाने का आग्रह किया।

कोर्ट के आदेश का पालन करना चुनौती

ट्विशा का शव 13 मई से एम्स भोपाल की मॉर्चुरी में रखा है। 18 मई को एम्स ने पुलिस को बताया कि मॉर्चुरी का तापमान केवल माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तक ही रहता है। फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तापमान पर शव 4-5 दिन तक सुरक्षित रह सकता है। लंबे समय तक संरक्षण के लिए -50 से -80 डिग्री तापमान जरूरी माना जाता है।

फोरेंसिक साइंस के डायरेक्टर शशिकांत शुक्ला और पूर्व डायरेक्टर डॉ. डीके सतपथी ने भी पुष्टि की है कि प्रदेश में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इससे कोर्ट के आदेश के पालन को लेकर प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है।

पिता ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा का आरोप है कि अपील में देरी के कारण शव की स्थिति खराब हुई, जिससे सबूत प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसे न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया।

वकील का सवाल- ‘फंदा’ क्यों नहीं दिया

परिवार के वकील अंकुर पांडे ने दावा किया कि पोस्टमॉर्टम 13 मई को हुआ, लेकिन कथित फंदा या बेल्ट फोरेंसिक डॉक्टरों को 15 मई तक नहीं सौंपा गया। परिवार ने सवाल उठाया है कि कथित फंदा देखे बिना मौत के कारण का निष्कर्ष कैसे निकाला गया।

 

परिवार का आरोप है कि पोस्टमॉर्टम के दौरान ट्विशा की सास की बहन, जो सीनियर डॉक्टर हैं, एम्स में मौजूद थीं, जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका है।

परिवार के जांच एजेंसियों से पांच प्रमुख सवाल

 

परिवार ने सवाल उठाया कि 12 मई की रात मौत होने के बावजूद FIR 15 मई को क्यों दर्ज की गई।

परिवार ने यह भी पूछा कि कथित लिगेचर मटेरियल फोरेंसिक टीम को समय पर क्यों नहीं दिया गया।

परिवार ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशानों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

परिवार के अनुसार, 12 मई की रात 10:05 बजे ट्विशा मां से बात कर रही थी। कॉल कटने के 15 मिनट बाद सास का फोन आया कि वह सांस नहीं ले रही। परिवार ने इस दौरान की घटनाओं पर सवाल उठाए हैं।

परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि इनाम घोषित होने और कई टीमें गठित होने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हो सकी।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखा है कि मौत से एक हफ्ते पहले ही ट्विशा का गर्भपात हुआ था।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखा है कि मौत से एक हफ्ते पहले ही ट्विशा का गर्भपात हुआ था।

आरोपी समर्थ ने मप्र हाईकोर्ट में जमानत के लिए लगाई अर्जी

मप्र हाईकोर्ट में समर्थ की ओर से जमानत अर्जी लगाई गई है। फिलहाल, सुनवाई के लिए आवेदन लिस्टेड नहीं हुआ है।

ट्विशा की आखिरी वाट्सएप चैट… “मां, मेरा दम घुट रहा है”

ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई वॉट्सएप चैट्स को परिवार मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है। चैट्स में मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद के संकेत मिलते हैं।

30 अप्रैल: भोपाल पहुंचते ही ट्विशा ने लिखा-‘क्यों भेजा मुझे यहां… मेरा जीवन नरक हो गया है। यह (समर्थ) एयरपोर्ट से घर तक मुझसे बात ही नहीं कर रहा।’

7 मई (रात 3 बजे): ‘मां, मुझे यहां से लेने आ जाओ। समर्थ ने कहा है कि वह एक साल से मुझे झेल रहा है। हम चुपचाप यहां से निकलेंगे, पापा को मत लाना।’

 

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