राजस्थान

कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में प्रसुताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामले में सरकार ने 2 डॉक्टर व 2 नर्सिंग अधिकारियों को सस्पेंड किया:स्टैंडर्ड प्रोसीजर भी फॉलो नहीं हो रहा,विभागों के पास एसओपी ही नहीं;जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही

कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में प्रसुताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामले में सरकार ने 2 डॉक्टर व 2 नर्सिंग अधिकारियों को सस्पेंड किया है। यह कार्रवाई जयपुर से आई विशेषज्ञ टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।

जानकारी के अनुसार ड्रग एंड फूड सेफ्टी कमिश्नर डॉ. टी सुमंगला (सीनियर सर्जन गायनी) के नेतृत्व में डॉ. निधि, डॉ. वंदना की टीम द्वारा प्रत्येक केस की गहराई से जांच की गई।

गायत्री राठौड़ ने बताया कि दो दिन तक काफी गहन विचार विमर्श हुआ है। जयपुर से आई तीन डॉक्टर्स की टीम ने एक-एक केस में काफी गहराई तक जाकर जांच की।
पूरे मामले को लेकर भास्कर ने चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से बातचीत की। गायत्री राठौड़ ने बताया कि दो दिन तक काफी गहन विचार विमर्श हुआ है। जयपुर से आई तीन डॉक्टर्स की टीम ने एक-एक केस में काफी गहराई तक जाकर जांच की।

उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में ऑपरेटिंग डॉक्टर और अटेंडिंग डॉक्टर की लापरवाही सामने आई है। साथ ही पोस्ट ऑपरेटिव केयर में नर्सिंग स्टाफ की भी गंभीर नेगलिजेंसी पाई गई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल स्तर पर ओवरऑल सुपरविजन में भी बड़ी कमी नजर आई है, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

गायत्री राठौड़ ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि कई विभागों में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) ही तय नहीं हैं। मरीजों के इलाज और ऑपरेशन के दौरान आवश्यक चेकलिस्ट और तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा स्तर का एक बड़ा लेप्स है।

रात के समय सीनियर डॉक्टर नहीं रहते। पीजी डॉक्टर व सीनियर रेजिडेंट (SR डॉक्टर) भी बहुत कम रहते है-प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़

गायत्री राठौड़ ने कहा कि अब गायनी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी सहित सभी विभागों को स्पष्ट SOP तैयार कर उन्हें अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही न्यू मेडिकल हॉस्पिटल और जेके लोन हॉस्पिटल के अधीक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। शासन सचिव ने कहा कि अस्पताल प्रशासन को अपना सुपरविजन मजबूत करना चाहिए था।

यह भी फीडबैक आया है कि रात के समय सीनियर डॉक्टर नहीं रहते। पीजी डॉक्टर व सीनियर रेजिडेंट (SR डॉक्टर) भी बहुत कम रहते हैं। इसको भी हम थोड़ा स्ट्रेंथन करने की कोशिश कर रहे हैं।

निलंबन कार्रवाई के विरोध में गायनी विभाग के डॉक्टर और कई रेजिडेंट डॉक्टर देर रात मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ नीलेश जैन के घर पहुंचे।

इधर निलंबन कार्रवाई के विरोध में गायनी विभाग के डॉक्टर और कई रेजिडेंट डॉक्टर देर रात मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ नीलेश जैन के घर पहुंचे। सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर नाराजगी जताई। इस दौरान न्यू मेडिकल हॉस्पिटल कोटा के डॉ. बद्रीलाल (बीएल पाटीदार) व सह आचार्य डॉ. खुशबू मीणा भी मौजूद रहे। दोनों को सरकार ने देर रात सस्पेंड किया था।

IMA कोटा ने डॉक्टर्स के निलंबन पर नाराजगी जताई

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कोटा ने डॉक्टर्स के निलंबन पर नाराजगी जताई है आईएमए कोटा के अध्यक्ष डॉ दीपक गुप्ता व पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ अशोक शारदा ने बयान जारी कर कहा कि जांच पूरी होने से पहले डॉक्टर को दोषी ठहराना न्याय संगत नहीं है ये कार्रवाई चिकित्सा व्यवस्था व कार्यरत चिकित्सकों के मनोबल को आहत करने वाली है आईएमए ने निलंबन व बर्खास्त करने के आदेश वापस लिए जाने की मांग की है।

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