देवगुराड़िया में बोरिंग से निकल रहा गंदा पानी; लोगों के शरीर में खुजली, बाल भी झड़ रहे;भागीरथपुरा जलकांड के बाद भी इंदौर में पानी का संकट

इंदौर के भागीरथपुरा में हुए जल कांड के बाद भी शहर में दूषित पानी का संकट खत्म नहीं हुआ। भागीरथपुरा के बाद अब देवगुराड़िया पंचायत क्षेत्र में इन दिनों जल संकट गंभीर रूप ले चुका है।
भीषण गर्मी के बीच यहां के रहवासी पानी की कमी के साथ-साथ दूषित जल की समस्या से भी जूझ रहे हैं। ट्रेंचिंग ग्राउंड से छोड़े जा रहे गंदे पानी के रिसाव ने आसपास की कॉलोनियों के भूजल को प्रभावित कर दिया है, जिससे बोरिंग का पानी भी प्रदूषित हो गया है।
स्थिति यह है कि बोरिंग से निकलने वाला पानी इतना गंदा और बदबूदार है कि न तो इसका उपयोग नहाने-धोने में किया जा सकता है और न ही पीने में। खासकर बच्चों के लिए यह पानी खतरनाक साबित हो रहा है। बता दें कि दिसंबर-2025 में भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 35 लोगों की मौत हो गई थी।

बाल झड़ने और त्वचा रोगों की शिकायतें
स्थानीय महिलाओं ने बताया कि दूषित पानी के उपयोग से उनके बाल तेजी से झड़ रहे हैं। कंघी करते समय बाल गुच्छों में निकल रहे हैं। पुरुषों में भी यही समस्या देखने को मिल रही है। ग्राउंड लेवल पर जाकर स्थिति जानी तो गांव में वाकई बोरिंग से जो गंदा पानी आ रहा है वह काफी दूषित, बदबूदार है और दिखने में पीला डीजल जैसा है।
23 वर्षीय अनिल चौधरी ने बताया कि कई घरों में आरओ के फिल्टर दो-तीन माह में खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा मैं तो इस पानी की वजह से गंजा होता जा रहा हूं। डॉक्टरों का कहना है कि पानी में टीडीएस (घुले ठोस पदार्थ) की मात्रा अधिक हो सकती है।

सीएनजी प्लांट और ट्रेंचिंग ग्राउंड पर आरोप
अभिषेक जाट (किसान पुत्र) ने बताया कि क्षेत्र में एशिया का एक बड़ा सीएनजी प्लांट स्थित है, जहां पहले बड़े पैमाने पर कचरा जमीन में दबाया गया था। आरोप है कि प्लांट का गंदा पानी आसपास छोड़ा जा रहा है, जिससे वह पानी यहां स्थित तलैया में आने के साथ जमीन में जा रहा है जिससे भूजल लगातार खराब हो रहा है। देवगुराड़िया, पत्थर मुंडला, मान सरोवर से लेकर श्रीजी वैली तक कुछ इलाकों में बोरिंग का पानी दूषित हो चुका है। राऊ विधानसभा क्षेत्र के कई हिस्से जल संकट से जूझ रहे हैं। पानी में टीडीएस, खार इतना है कि बड़ी कंपनियों के नल, पाइप जल्दी खराब हो रहे हैं।
पानी में डीजल जैसी परत, बर्तन हो रहे पीले
ओमप्रकाश जाट ने बताया कि वार्ड 9 में ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा जलाया जा रहा है। मवेशी प्लास्टिक खा रहे हैं और उनकी मौत हो रही है। सड़ते अवशेषों से गंदगी जमीन में मिल रही है, जिससे पानी डीजल जैसा दिखने लगा है। रहवासियों का कहना है कि इस पानी से बर्तन पीले पड़ रहे हैं और बाल्टियों व बर्तनों में मोटी परत जम रही है।
खुजली, चकत्ते और अन्य बीमारियां
गीताबाई, विजय नाथ और दरियाव नाथ सहित कई लोगों ने बताया कि दूषित पानी से शरीर में खुजली, चकत्ते और अन्य त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। मजबूरी में लोग इसी पानी का उपयोग कर रहे हैं।
मानसरोवर कॉलोनी की मनीषा मालवीय ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उनके बाल लगातार झड़ रहे हैं। उन्होंने कंघी करने के दौरान टूटे हुए बालों का एक गुच्छा मौके पर बताया। वहीं रामलता चौहान ने कहा कि इस पानी से चाय तक फट जाती है और त्वचा पर चकत्ते हो गए हैं।

ड्रेनेज का पानी बोरिंग में, शिकायतों पर कार्रवाई नहीं
सपना साल्वे ने बताया कि हाल ही में बोरिंग के पानी में ड्रेनेज का पानी मिल गया था। पंचायत में शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऋतु रावत और दीपेश जायसवाल ने भी बताया कि पानी गर्म करने पर बर्तनों में परत जम जाती है और दाल भी ठीक से नहीं पकती।
महंगे टैंकर, बढ़ती परेशानी
रहवासियों का आरोप है कि क्षेत्र में नियमित रूप से पानी के टैंकर भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। मजबूरी में लोगों को 600 से 700 रुपये तक खर्च कर टैंकर मंगवाना पड़ रहा है, जो महंगाई के इस दौर में अतिरिक्त बोझ है।
अधिकारी बोले- मौके पर जाकर सैंपल लेंगे, पानी की जांच भी करेंगे
इंदौर में दूषित पानी की शिकायतों को लेकर पीएचई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रताप सिंह बुंदेला ने कहा है कि नगरीय सीमा से लगे देव गुराड़िया क्षेत्र की जिन कॉलोनियों में गंदा पानी आने की सूचना मिली है, वहां टीम को मौके पर भेजकर सैंपल लिए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पंचायत क्षेत्र के किन-किन हिस्सों में दूषित पानी की समस्या है, इसकी जानकारी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
जन आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर जन आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ने पर देवगुराडिया रोड को भी बंद कर देंगे। उन्होंने कहा हम भी इंसान हैं, हमारी समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए।
मामले में देवगुराडिया सरपंच भूरीबाई महेश वसुनिया ने बताया कि इसे लेकर जिला पंचायत, पीएचई को पहले भी अवगत कराया जा चुका है। विभाग की टीम यहां आकर निरीक्षण कर चुकी है। भागीरथपुरा दूषित पानी के दौरान भी हमने शिकायत की तो कहा गया कि मामला नगर निगम के प्लांट का है। वहीं से केमिकल का पानी छोड़ा जा रहा है। इस पर प्रशासन को अवगत कराया तो एसडीएम, तहसीलदार की टीम आई और स्थिति जानी। उस दौरान यहां के सैंपल टेस्ट कराए गए तो टीडीएस बहुत ज्यादा था। क्षेत्रीय विधायक मधु वर्मा यहां नर्मदा के लिए प्रयासरत है और मामला भोपाल में प्रक्रिया में है।
हार्ड वाटर से गंभीर स्वास्थ्य खतरे
डॉ. मीतेश अग्रवाल (डर्मोटोलॉजिस्ट) ने बताया कि हार्ड वाटर में घुले ठोस पदार्थ (टीडीएस) की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे खनिज उच्च स्तर पर होते हैं, जो पानी को कठोर बनाते हैं। ऐसे पानी के उपयोग से त्वचा में जलन, रूखापन और एलर्जी बढ़ती है रोमछिद्र (पोर्स) बंद हो जाते हैं, जिससे मुंहासे बढ़ते हैं।
एक्जिमा जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं। पानी में टीडीएस ज्यादा होने से बाल रूखे और कमजोर होकर टूटने लगते हैं बालों की चमक खत्म हो जाती है। डैंड्रफ और खुजली बढ़ती है। उन्होंने सलाह दी कि लोग पानी को शुद्ध करने वाले उपकरण लगाएं या कम से कम फिटकरी का उपयोग करें, जिससे पानी की कठोरता कुछ हद तक कम हो सके।



