राजस्थान

अजमेर में 350 साल पुरानी परंपरा के तहत प्रसिद्ध लाल्या-काल्या मेले का आयोजन हुआ सोटे की मार खाने सड़क पर उमड़े भक्त:होलिका ने बाजार में उत्पात मचाया; शहर में हुआ अनोखा लाल्या-काल्या मेला

अजमेर के नया बाजार में गुरुवार को 350 साल पुरानी परंपरा के तहत प्रसिद्ध लाल्या-काल्या मेले का आयोजन हुआ। मेले में आस्था और परंपरा का अनोखा संग देखने को मिला। यहां श्रद्धालु भगवान विष्णु के वराह और नृसिंह अवतार की लीलाओं के साक्षी बने।

मेले की सबसे खास बात यह रही कि यहां श्रद्धालु लाल्या (वराह अवतार) के सोटे का प्रहार प्रसाद के रूप में ग्रहण करते नजर आए। वहीं, काल्या (हिरण्याक्ष) के सोटे से बचते दिखे।

मान्यता है कि लाल्या का सोटा पड़ने से बिगड़े काम बनने लगते हैं। भाग्य साथ देने लगता है, वहीं काल्या के प्रहार को अशुभ माना जाता है।

गुरुवार को नया बाजार में 5 बजे शहनाई की गूंज के साथ मेला शुरू हआ। शहरवासी नृसिंह चतुर्दशी पर भरने वाला लाल्या-काल्या का मेला देखने पहुंचे। बाजार की हर दुकान, मकान, चबूतरा और छत शहरवासियों से भर गई। बाजार में 5:11 बजे काल्या (हिरणकश्यप) पहुंचते ही जमकर सोटे बरसाए गए। युवाओं की टोली काल्या के आगे पीछे चिढ़ाते हुए दौड़ी। इसी बीच लाल्या (वराह अवतार) भी मंदिर से सोटे बरसाते हुए निकले। शहवासी इनके सोटे प्रसाद के रूप में खाते दिखाई दिए।

श्रद्धालु लाल्या (वराह अवतार) के सोटे का प्रहार प्रसाद के रूप में ग्रहण करते नजर आए।

हर 10-15 मिनट के अंतराल में बाजार की ही दुकानों में काल्या-लाल्या को विश्राम कराया गया। हाथ-पैर दबाए गए। शाम 5.51 बजे नकटी (होलिका) बाजार में आई, खूब उत्पात मचाया। युवा इसके आगे-पीछे… नकटी-नकटी और बुआजी चिढ़ाते हुए दौड़े।

नकटी (होलिका) बाजार में आई। इस दौरान खूब उत्पात मचाया।

नृसिंह नोहरे के बाहर राजा (हिरणकश्यप) आ पहुंचे, तलवार घुमाते हुए आतंक मचाया, मूंछों पर ताव दीया।

उधर नृसिंह नोहरे के बाहर राजा (हिरणकश्यप) आ पहुंचे, तलवार घुमाते हुए आतंक मचाया, मूंछों पर ताव दीया। ब्रह्माजी, नारदजी के समझाने के बाद भी भक्त प्रहलाद को ठुकरा दीया गया। धीरे-धीरे जय-जय नृसिंह के जयकारों का घोष बढ़ने लगे। पात्रों को मंदिर में ले जाया गया।

खंभे के कागज को संभालकर रखते हैं लोग

शाम को 6:52 बजे भगवान नृसिंह खंभा फाड़कर प्रकट होते हैं। प्रहलाद को दुलारते हैं। अंत में भगवान नृसिंह मंदिर की छत पर भगवान नृसिंह भक्त प्रहलाद को दुलारते हैं। भक्त नृसिंह की पूंछ के फटकारों और कागज से बने खंभ के टुकड़ों को प्रसाद के रूप में लेते हैं। श्रद्धालु उसे अपनी तिजोरी में संभाल कर रखते हैं। मान्यता है कि इससे व्यापार में वृद्धि और घर में सुख समृद्धि आती है। मेला संयोजक साकेत बंसल ने बताया कि इससे पहले सुबह प्राकट्य आरती हुई, फूल बंगला सजाया गया था।

मेले में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए।

गुरुवार को नया बाजार में शहनाई के साथ लाल्या-काल्या के मेले का शुभारंभ किया गया।

हर उम्र के लोग बने मेले का हिस्सा

मेले में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। आसपास की इमारतों की छतों से भी लोगों ने इस अनूठे आयोजन का नजारा देखा। शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे।

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