देश का पहला AI हब बनेगा विशाखापट्टनम:जूनियर वेटलिफ्टिंग में भारत ने 3 गोल्ड जीते, 30 अप्रैल के करेंट अफेयर्स

जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं…
नेशनल (NATIONAL)
1.विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इक्वाडोर की गैब्रिएला से मुलाकात की
29 अप्रैल को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इक्वाडोर की रक्षा मंत्री गैब्रिएला सोमरफेल्ड से मुलाकात की। गैब्रिएला 3 दिन की यात्रा पर भारत आईं हैं।
- इस मुलाकात में दोनों प्रमुखों ने बिजनेस, एग्रीकल्चर और कैपिसिटी बिल्डिंग जैसे मुद्दों पर बात की।
- इक्वाडोर ISRO सोलर अलायंस और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) में शामिल हुआ है, जिसका प्रोसेस शुरू हो चुका है।
- इक्वाडोर पहले से ही कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) का सदस्य है।CDRI देशों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, बहुपक्षीय बैंकों, निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों का एक वैश्विक मंच है।
- इस बैठक में एस जयशंकर और गैब्रिएला ने क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स को लागू करने के लिए फंडिंग को लेकर एक समझौता भी किया है।
- भारत और इक्वाडोर ने इंपेक्ट प्रोजेक्ट को शुरू करने का एग्रीमेंट भी किया। ये दोनों देशों के बीच डेवलपमेंट पार्टनरशिप को आगे ले जाने के काम आएगा।
- भारत और इक्वाडोर के बीच 4 सेक्टर्स में मिलकर काम करना शामिल है। ट्रेड, इंवेस्टमेंट और बिजनेस इसका हिस्सा हैं।
- इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और व्यापार संबंधों को बढ़ावा देना शामिल है।
- दोनों प्रमुखों ने डिप्लोमेटिक ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट पर आपसी सहमति जताई और ट्रेनिंग इंस्टीटयूट्स के साथ एक MoU साइन किया। ।
- इस बैठक में दोनों देशों के प्रमुखों ने फार्मास्यूटिकल्स, एग्रीकल्चर और एजुकेशन जैसे मुद्दों पर भी बात की।

2. Google विशाखापट्टनम में देश का पहला AI हब बनाएगा
28 अप्रैल को आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू ने विशाखापट्टनम में Google AI हब की आधारशिला रखी। Google AI हब बनाने के लिए गूगल 2026 से 2030 तक 15 अरब डॉलर इंवेस्ट करेगा।
- AI हब के इस कार्यक्रम में सीएम नायडू, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, गूगल क्लाउड ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस प्रेसिडेंट बिकाश कोले, अडाणी ग्रुप के जीत अडाणी और भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन राकेश भारती समेत कई और लोग शामिल हुए।
- विशाखापट्टनम में ये AI हब Google के साथ AdaniConneX और Airtel Nxtra मिलकर बनाएंगे। ये देश का पहला और सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर होगा।
- इस प्रोजेक्ट में के विशाखापट्टनम में तीन AI डेटा सेंटर शुरू किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से 1.1 गीगावाइट (GW) का AI सिस्टम शुरू होगा।
- ये सेंटर विशाखापट्टनम के थरलुवाड़ा, अदाविवराम और रामबिली क्षेत्रों में लगभग 600 एकड़ में लगाए जाएंगे।
- AI गूगल हब का लक्ष्य 6.5 GW का है, ये क्लाउड कम्प्यूटिंग पावर, लार्ज स्केल डेटा स्टोरेज के लिए काम करेगा।
- ये प्रोजेक्ट अमेरिका-इंडिया कनेक्ट पहल का भी हिस्सा है। जिसका उद्देश्य फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क का विस्तार करना भी शामिल है।
- AI हब प्रोजेक्ट का स्ट्रक्चर सितंबर 2024 में राज्य मंत्री नारा लोकेश और गूगल टीम के साथ हुई बैठक में तैयार किया गया था और अक्टूबर 2025 में इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया गया था।
- भारत में गूगल का पहला ऑफिस 2007 में हैदराबाद में शुरू हुआ था। देश में गूगल के ऑफिस हैदराबाद, बेंगलूरु, गुरुग्राम, मुंबई और पुणे में हैं।

इंटरनेशनल (INTERNATIONAL)
3. UAE OPEC ऑर्गेनाइजेशन से अलग हुआ
28 अप्रैल को यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) को कच्चे तेल का उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन ओपेक (OPEC) और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान किया है।
- ये फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है।
- UAE का ये फैसला उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है।
- UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश के मुताबिक, ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों का रुख काफी कमजोर रहा है।
- दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 40% हिस्सा OPEC देशों के पास ही है। ये देश जब उत्पादन घटाते हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगती हैं।
- ओपेक (OPEC) की स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे देश शामिल हैं।
- OPEC का मुख्य काम दुनिया में तेल की सप्लाई को कंट्रोल करना है ताकि कीमतें स्थिर रहें।
- ओपेक प्लस (OPEC+) 2016 में तेल की गिरती कीमतों के चलते ओपेक देशों ने रूस जैसे अन्य बड़े तेल उत्पादकों के साथ मिलकर ये ऑर्गेनाइजेशन बनाया है।
- ओपेक के जरिए कीमतों को स्थिर रखा जाता है, यदि सदस्य देश एक साथ नहीं रहेंगे तो फिर तेल उत्पादन में मनमानी की स्थिति बनेगी।
- ओपेक के साथ नहीं रहने से ऐसी स्थिति में अलग-अलग देश अपनी मर्जी से ज्यादा तेल बाजार में बेच सकेंगे। जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाएगी।
- भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल इन्हीं देशों से आयात करता है।



