मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर चीता रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की सीमा में पहुंच गया:गांव की सड़कों पर घूमता रहा, 20 दिन पहले कूनो की टीम ले गई थी

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर चीता रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की सीमा में पहुंच गया है। चंबल नदी से सटे पालीघाट के अजीतपुरा गांव में गुरुवार सुबह चीता केपी-2 नजर आया। चीता अजीतपुरा गांव की सड़कों पर सुबह घूमता रहा। इसके बाद खेतों में चला गया।
सूचना मिलते ही सुबह 5 बजे से वन विभाग की टीम मॉनिटरिंग कर रही है। कूनो नेशनल पार्क की टीम भी पहुंच गई है और चीते की लोकेशन ट्रेस कर रही है।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात चीता चंबल पार कर कोटा जिले की सीमा में आया, इसके बाद रात के अंधेरे में वह चंबल पार कर दोबारा कोटा से सवाई माधोपुर जिले की सीमा में आ गया।
गौरतलब है कि 27 मार्च को पीपल्दा समेल गांव में इसे ट्रेंकुलाइज कर कूनों की टीम ले गई थी। अब ये दोबारा यहां पहुंचा है।

अजीतपुरा गांव में चीते का मूवमेंट
पालीघाट रेंजर किशन कुमार सांखला ने बताया कि पालीघाट रेंज के अजीतपुरा गांव में ग्रामीणों ने चीते के देखे जाने की सूचना दी। इस पर पालीघाट और फलौदी रेंज की टीमें मौके पर पहुंचीं और चीते की ट्रैकिंग शुरू की।
रणथंभौर की टीम ने इस संबंध में कूनो नेशनल पार्क के अधिकारियों को सूचित किया। कूनो से एक विशेष टीम भी रणथंभौर पहुंच गई।

18 दिन पहले ट्रेंकुलाइज कर ले गई थी टीम, दोबारा पहुंची
यही चीता 19 मार्च को कोटा जिले की सीमा में आ गया था। 27 मार्च को पीपल्दा समेल गांव में इसे ट्रेंकुलाइज कर कूनों की टीम ले गई थी। अब ये दोबारा यहां पहुंचा है।
इधर, केपी-2 के अलावा केपी-3 का मूवमेंट भी बारां जिले में लगातार नजर आ रहा है। दो दिन पहले उसकी अटरू और छबड़ा में लोकेशन ट्रेस की गई थी।
8 महीने पहले भी कूनो की मादा चीता ‘ज्वाला’ 130 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर जिले के बालेर गांव पहुंच गई थी। यहां एक बाड़े में बकरी का शिकार किया था।



